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अपनी संभावना का ताला खोलें - लक्ष्य - Goals - लेखक : ब्रायन ट्रेसी - की ऑडियो बुक- #Audio #Book - Brian Tracy -लक्ष्य - Goals- उम्मीद से पहले पाएँ हर मनचाही चीज़- लेखक : ब्रायन ट्रेसी

           

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अपनी संभावना का ताला खोलें - लक्ष्य - Goals - लेखक : ब्रायन ट्रेसी - की ऑडियो बुक-  #Audio #Book - Brian Tracy -लक्ष्य - Goals-  उम्मीद से पहले पाएँ हर मनचाही चीज़- लेखक : ब्रायन ट्रेसी

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Goals -Get Everything You Want - Sooner Than You Expect -Writer : Brian Tracy

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अपनी संभावना का ताला खोलें -   

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आम इंसान की संभावना उस महासागर की तरह है, जिसमें यात्रा नहीं की गई है, उस नए महाद्वीप की तरह है, जिसे खोजा नहीं गया है। संभावनाओं की पूरी दुनिया मुक्त होने और महान काम करने के लिए मार्गदर्शन का इंतज़ार कर रही है। - ब्रायन ट्रेसी

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सफलता का मतलब लक्ष्य है और बाक़ी सारी चीजें कमेंट्री हैं। सभी सफल लोग पूरी तरह लक्ष्य केंद्रित होते हैं। वे जानते हैं कि वे क्या चाहते हैं और उसे हासिल करने के लिए वे हर दिन अपना पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं।

लक्ष्य तय करने की आपकी क्षमता ही सफलता की सबसे प्रमुख योग्यता है। लक्ष्य आपके सकारात्मक मस्तिष्क का ताला खोलते हैं और मंज़िल तक पहुँचाने वाले मददगार विचारों तथा ऊर्जा को मुक्त करते हैं। लक्ष्यों के बिना आप बस ज़िंदगी की लहरों पर डूबते-उतराते रहते हैं, जबकि लक्ष्य होने पर आप तीर की तरह उड़कर सीधे निशाने पर पहुँच जाते हैं।

सच तो यह है कि आपमें इतनी ज़्यादा नैसर्गिक संभावना है कि उसका पूरा इस्तेमाल करने के लिए आपको शायद सौ से ज़्यादा बार जन्म लेना पड़ेगा। आपने अब तक जो भी हासिल किया है, वह आपकी सच्ची संभावना का सिर्फ एक छोटा सा अंश है। सफलता का एक नियम यह है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ से रहे हैं; फ़र्क़ तो इस बात से पड़ता है कि आप कहाँ जा रहे हैं। और आप कहाँ जा रहे हैं, यह सिर्फ आप और आपके विचार ही तय करते हैं।

स्पष्ट लक्ष्य होने पर आपका आत्मविश्वास बढ़ता है, आपकी क्षमता का विकास होता है और आपकी प्रेरणा का स्तर ऊँचा होता है। जैसा कि सेल्स प्रशिक्षक टॉम हॉपकिन्स कहते हैं, "लक्ष्य उपलब्धि की अँगीठी का ईंधन हैं।"

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आप अपना खुद का संसार रचते हैं

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शायद मानव इतिहास की महानतम खोज यह है कि आपके मस्तिष्क में आपके जीवन के लगभग हर पहलू का निर्माण करने की शक्ति होती है। मानव निर्मित जगत में आप अपने चारों ओर जो भी चीज़ देखते हैं, वह किसी इंसान के दिमाग में एक विचार के रूप में आई थी और उसके बाद ही भौतिक जगत् में साकार हुई। आपके जीवन की हर चीज़ किसी विचार, इच्छा, आशा या सपने के रूप में शुरू हुई थी - या तो आपके दिमाग में या फिर किसी और के दिमाग में। आपके विचार रचनात्मक होते हैं। वे आपकी दुनिया और आपके साथ होने वाली हर चीज़ को आकार देते हैं।

सभी धर्मों, सभी दर्शनों, मेटाफ़िज़िक्स, मनोविज्ञान और सफलता का महान सार यह है : आप जिसके बारे में ज़्यादातर वक़्त सोचते है, वही बन जाते हैं। आपका बाहरी जगत अंततः आपके आंतरिक जगत का प्रतिबिंब बन जाता है। आपको वही प्रतिबिंब दिखता है, जिसके बारे में आप ज़्यादातर समय सोचते हैं। आप जिसके बारे में भी सोचते हैं, वह लगातार आपकी ज़िंदगी में प्रकट होता है।

 

कई हज़ार सफल लोगों से पूछा गया कि वे ज़्यादातर समय किस चीज़ के बारे में सोचते हैं। सफल लोगों का सबसे आम जवाब यह था कि वे ज़्यादातर वक़्त अपनी मनचाही चीज़ और उसे पाने के बारे में सोचते हैं।

असफल और दुखी लोग ज़्यादातर वक़्त अनचाही चीज़ों के बारे में सोचते और बातें करते हैं। वे अपनी समस्याओं और चिंताओं के बारे में बातचीत करते हैं तथा ज़्यादातर समय दूसरों को दोष देते रहते हैं। लेकिन सफल लोग अपने विचारों और बातों को अपने सबसे प्रबल इच्छित लक्ष्यों पर केंद्रित रखते हैं। वे ज़्यादातर वक़्त उस चीज़ के बारे में सोचते और बातें करते हैं, जिसे वे पाना चाहते हैं।

स्पष्ट लक्ष्यों के बिना जीना घने कोहरे में कार चलाने जैसा है। चाहे आपकी कार कितनी ही दमदार हो, चाहे इंजीनियरिंग कितनी ही बेहतरीन हो, आप धीमे-धीमे, झिझकते हुए कार चलाएंगे और बढ़िया से बढ़िया सड़क पर भी गति नहीं पकड़ पाएँगे। लक्ष्य स्पष्ट करने से कोहरा तत्काल छूट जाता है और आपको अपनी योग्यताओं तथा ऊर्जाओं पर ध्यान केंद्रित करने और उनका इस्तेमाल करने का मौका मिल जाता है। स्पष्ट लक्ष्य आपको यह सामर्थ्य देते हैं कि आप अपनी ज़िंदगी के एक्सीलरेटर को दबा दें और उस सफलता की ओर तेज़ी से बढ़े, जिसे आप वाक़ई हासिल करना चाहते हैं।

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आपका स्वचालित लक्ष्य-केंद्रित कार्य

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इस प्रयोग के बारे में सोचें आप एक पत्रवाहक कबूतर (होमिंग पीजन) को उसके बसेरे से बाहर निकालकर एक पिंजरे में रखते हैं, उस पिंजरे पर कंबल बैंककर एक बक्से में पैक कर देते हैं और फिर उस बक्से को एक बंद ट्रक में रख देते हैं। आप किसी भी दिशा में हज़ार मील दूर चले जाएँ और इसके बाद अपना ट्रक खोलें, बक्सा बाहर निकालें, कंबल हटाएँ और कबूतर को पिंजरे से वाहर निकाल दें। वह फ़ौरन हवा में उड़ जाएगा, तीन चक्कर लगाएगा और फिर बिना किसी गलती के एक हज़ार मील दूर स्थित अपने बसेरे की तरफ़ चल देगा। दुनिया के किसी भी अन्य प्राणी के पास यह अविश्वसनीय साइबरनेटिक, लक्ष्य-केंद्रित हुनर नहीं होता है- सिवाय इंसान के।

आपमें भी लक्ष्य हासिल करने की वही योग्यता है, जो पत्रवाहक कबूतर में है। दरअसल, आपमें एक और अद्भुत चीज़ है। जब आपका लक्ष्य बिलकुल स्पष्ट होता है, तो आपको तो यह पता करने की भी ज़रूरत नहीं है कि यह कहाँ है या इसे कैसे हासिल करना है। आप ठीक-ठीक क्या पाना चाहते हैं, बस इतना फ़ैसला भर कर लेने से ही आप बिना किसी गलती के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने लगेंगे और आपका लक्ष्य विना किसी गलती के आपकी ओर बढ़ने लगेगा। विलकुल सही समय और जगह पर आप और आपका लक्ष्य एक-दूसरे से मिल जाएंगे।

आपके मस्तिष्क की गहराई में स्थित इस अविश्वसनीय साइबरनेटिक मेकेनिज़्म की वजह से आप लगभग हमेशा अपने लक्ष्य हासिल कर लेते हैं, चाहे वे जो भी हों। अगर आपका लक्ष्य रात को घर आकर टीवी देखना है, तो आप लगभग हमेशा इसे पा लेंगे। अगर आपका लक्ष्य सेहत, खुशी और दौलत से भरी अद्भुत ज़िंदगी जीना हो, तो आप इसे भी पा लेंगे। ठीक कंप्यूटर की तरह ही आपका लक्ष्य खोजने वाला मेकेनिज़्म भी अपनी तरफ़ से कोई निर्णय नहीं लेता। यह स्वचालित होता है. और आपकी मनचाही चीज़ को लगातार आपकी ओर लाता है, चाहे वह जो भी हो।

प्रकृति आपके लक्ष्यों के आकार के बारे में परवाह नहीं करती। अगर आप छोटे लक्ष्य तय करते हैं, तो आपका स्वचालित लक्ष्य प्राप्ति नत्र आपको छोटे लक्ष्य हासिल करने में समर्थ बनाएगा। अगर आप बड़े लक्ष्य तय करते हैं ना यह नैसर्गिक क्षमता आपको बड़े लक्ष्य हासिल करने में समर्थ बनाएगी। आपके न्नक्ष्यों का आकार, प्रकार और विवरण पूरी तरह आप पर निर्भर करता है। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप ज़्यादातर वक़्त किस चीज़ के बारे में सोचने का चुनाव करते हैं।

 

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लोग लक्ष्य तय क्यों नहीं करते

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यह एक अच्छा सवाल है अगर लक्ष्य खोजना स्वचालित है, तो फिर इतने कम लोगों के पास स्पष्ट, लिखित, नापने योग्य, समयबद्ध लक्ष्य क्यों होते हैं? हर किसी के पास ऐसे लक्ष्य क्यों नहीं होते, जिनकी दिशा में ये हर दिन काम करें? यह जीवन का एक बड़ा रहस्य है। मुझे यकीन है कि चार कारणों से लोग अपने लक्ष्य तय नहीं करते :

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वे लक्ष्यों को महत्वपूर्ण नहीं मानते

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पहली बात, ज़्यादातर लोगों को लक्ष्यों के महत्व का एहसास ही नहीं होता। अगर आप ऐसे घर में पले-बढ़े हैं, जहाँ किसी के पास लक्ष्य नहीं रहे हों या फिर ऐसे समूह में रहे हों, जहाँ लक्ष्यों पर कभी बातचीत हुई हो या उन्हें महत्व दिया गया हो, तो वयस्क होने के बाद भी आप लक्ष्यों की शक्ति से अनजान रह सकते हैं। आपको यह पता ही नहीं चलेगा कि लक्ष्य तय करने और हासिल करने की आपकी योग्यता आपकी ज़िंदगी पर किसी दूसरी योग्यता से ज़्यादा असर डालती है। अपने आस-पास गौर से देखें। आपके कितने दोस्तों या परिजनों के पास स्पष्ट लक्ष्य हैं और वे अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित हैं ?

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वे जानते ही नहीं है कि लक्ष्य कैसे तय किए जाते हैं

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लोगों के पास लक्ष्य होने का दूसरा कारण यह है कि वे यह जानते ही नहीं हैं कि लक्ष्य तय कैसे किए जाते हैं। इससे भी बुरी बात, कि कई लोग सोचते हैं कि उनके पास पहले से ही लक्ष्य हैं, जबकि उनके पास दरअसल इच्छाओं या सपनों की श्रृंखला भर होती है, जैसे "खुश रहो," या "बहुत सा पैसा बनाओ" या "अच्छा पारिवारिक जीवन जियो।"

लेकिन उन्हें लक्ष्य नहीं कहा जा सकता। ये तो सिर्फ़ फंतासियाँ हैं, जो हर एक के पास होती हैं। लक्ष्य, इच्छा से एकदम अलग होता है। यह स्पष्ट होता है, लिखित होता है और विशिष्ट होता है। इसे किसी को भी जल्दी से और आसानी से बताया जा सकता है। आप इसकी दिशा में अपनी प्रगति को नाप सकते हैं। जब आप इसे हासिल कर लेते हैं या नहीं कर पाते, तो आप यह बात जान जाते हैं।

यह संभव है कि किसी नामी यूनिवर्सिटी से बड़ी डिग्री लेने के बावजूद आपको लक्ष्य निर्धारण के बारे में एक घंटे का भी प्रशिक्षण मिला हो। लगता है, जैसे हमारे स्कूलों और यूनिवर्सिटीज़ की शैक्षिक सामग्री तय करने वाले लोग ज़िंदगी में सफलता हासिल करने में लक्ष्य निर्धारण के महत्व को लेकर बिलकुल अंधे हैं। और ज़ाहिर है, अगर बालिग होने तक आपने लक्ष्यों के बारे में कभी सुना ही नहीं है, जैसा मेरे साथ हुआ था, तो आपको पता भी नहीं होगा कि वे आपके हर काम में कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

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वे असफलता से डरते हैं

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लोगों के लक्ष्य तय करने का तीसरा कारण है असफलता का डर। असफलता से दिल को चोट पहुँचती है। यह भावनात्मक और अक्सर आर्थिक दृष्टि से भी दुखदायी और कष्टकारी होती है। हर व्यक्ति कभी कभी असफल हो चुका है। हर बार हम ज़्यादा सतर्क होने और भविष्य में असफलता से बचने का संकल्प करते हैं। इसके अलावा, कई लोग अचेतन रूप से खुद को नुकसान पहुँचाने वाली भारी गलती करते हैं: असफलता से बचने के लिए वे लक्ष्य ही तय नहीं करते। वे सफलता की अपनी संभावना से काफ़ी निचले स्तर पर ही काम करते-करते ज़िंदगी गुज़ार देते हैं।

 

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उन्हें अस्वीकृति का डर होता है

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लोगों के पास लक्ष्य होने का चौया कारण है अस्वीकृति (रिजेक्शन) का डर। लोग इस बात से डरते हैं कि अगर उन्होंने कोई लक्ष्य तय किया और कामयाब नहीं हो पाए, तो दूसरे लोग उनकी आलोचना करेंगे या हँसी उड़ाएँगे। यह भी एक कारण है कि शुरुआत में आपको अपने लक्ष्य गोपनीय रखने चाहिए। किसी को भी बताएँ। दूसरों को परिणाम देखने दें, उन्हें पहले से कुछ भी बताएँ। जो वे जानते ही नहीं हैं, उससे वे आपको चोट नहीं पहुँचा सकते।

 

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शीर्षस्थ 3 प्रतिशत लोगों में शामिल हों

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मार्क मैक्कॉरमैक ने अपनी पुस्तक व्हाट दे डोन्ट टीच यू एट हार्वर्ड विज़नेस स्कूल में 1979 और 1989 के बीच हार्वर्ड में हुए एक अध्ययन के बारे में बताया है। 1979 में हार्वर्ड के एमबीए ग्रेजुएट्स से पूछा गया, "क्या आपने अपने भविष्य के लिए स्पष्ट, लिखित लक्ष्य तय किए हैं और उन्हें हासिल करने की कोई योजना बनाई है ?" पता चला कि सिर्फ 3 प्रतिशत ग्रेजुएट्स के पास लिखित लक्ष्य और योजनाएँ थीं। तेरह प्रतिशत के पास लक्ष्य तो थे, लेकिन उन्होंने लिखे नहीं थे। 84 प्रतिशत के पास स्पष्ट लक्ष्य ही नहीं थे, सिवाय इसके कि वे बिज़नेस स्कूल से जाने के बाद गर्मियों का आनंद लें।

 

दस साल बाद 1989 में शोधकर्ताओं ने उस क्लास के सदस्यों से दोवारा संपर्क किया। उन्होंने पाया कि जिन 13 प्रतिशत के पास अलिखित लक्ष्य थे, वे लक्ष्य बनाने वाले 84 प्रतिशत विद्यार्थियों से औसतन दोगुना कमा रहे थे। लेकिन उन्हें सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह थी कि हार्वर्ड छोड़ते वक्त जिन 3 प्रतिशत प्रेजुएट्स के पास स्पष्ट, लिखित लक्ष्य थे, वे बाक़ी सभी 97 प्रतिशत से औसतन दस गुना ज़्यादा कमाई कर रहे थे। इन लोगों के मामले में इकलौता फर्क स्पष्ट लक्ष्यों का था, जो उन्होंने पढ़ाई पूरी करते वक्त बनाए थे।

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कोई साइन बोर्ड नहीं

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स्पष्टता का महत्व समझना आसान है। कल्पना करें कि आप किसी बड़े शहर के बाहरी इलाके में खड़े हैं और आपसे उस शहर में किसी खास घर या ऑफिस तक गाड़ी से पहुँचने को कहा जाता है। लेकिन यहाँ एक पेंच है: सड़क पर कोई साइन बोर्ड नहीं है और आपके पास शहर का नक्शा भी नहीं है। सच तो यह है कि आपको उस घर या ऑफ़िस का सिर्फ़ बहुत सतही वर्णन ही बताया गया है। सवाल यह है, आपको क्या लगता है कि नक़्शे और साइन बोर्ड के विना आपको शहर में बढ़ मकान या ऑफिस खोजने में कितना समय लगेगा ?

जवाब है, पूरी जिंदगी भी लग सकती है। अगर आप कभी उस मकान या ऑफ़िस को खोज लें, तो यह बहुत हद तक किस्मत का मामला होगा। और दुखद बात यह है कि ज़्यादातर लोग अपनी ज़िंदगी इसी तरह जीते हैं।

अधिकांश लोग ज़िंदगी भर नक़्शे और साइन बोर्ड के बिना दुनिया में निरुद्देश्य यात्रा शुरू कर देते हैं। यह जीवन में बिना लक्ष्यों और योजनाओं के काम शुरू करने जैसा है। वे बीच राह में चीजें सोचने के आदी होते हैं। नतीजा यह होता है कि आमतौर पर, दस-बीस साल नौकरी करने के बावजूद वे कड़के बने रहते हैं, अपनी नौकरी में दुखी नज़र आते हैं, अपने जीवनसाथी से असंतुष्ट रहते हैं और बहुत कम तरक्की कर पाते हैं। और इसके बावजूद वे हर रात घर जाकर टीवी देखते हैं और चीज़ों के बेहतर होने की उम्मीद करते हैं। लेकिन वे शायद ही कभी बेहतर होती हैं। अपने आप तो नहीं ही होतीं।

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खुशी के लिए लक्ष्यों की ज़रुरत होती है

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अर्ल नाइटिंगेल ने एक बार लिखा था, "खुशी किसी सार्थक आदर्श या लक्ष्य की क्रमिक प्राप्ति है।"

आप सच्ची खुशी तभी महसूस करते हैं, जब आप किसी महत्वपूर्ण चीज़ की ओर क़दम-दर-क़दम प्रगति कर रहे होते हैं। लोगोथेरेपी के संस्थापक विक्टर कल ने लिखा था कि इंसान की सबसे बड़ी ज़रूरत ज़िंदगी में अर्थ और उद्देश्य का एहसास होना है।

लक्ष्य आपको अर्थ और उद्देश्य दोनों का एहसास दिलाते हैं। लक्ष्य आपको दिशा का एहसास भी दिलाते हैं। अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ते वक़्त आप ज़्यादा खुश और शक्तिशाली महसूस करते हैं। आप ज़्यादा ऊर्जावान और प्रभावी महसूस करते हैं। आप ज़्यादा कार्यकुशल, योग्य और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। लक्ष्यों की ओर उठा हर क़दम आपके इस विश्वास को बढ़ा देता है कि आप भविष्य में ज्यादा बड़े लक्ष्य तय कर सकते हैं और उन्हें पा भी सकते हैं।

आज जितने लोग भविष्य के बारे में चिंतित हैं और परिवर्तन से डर रहे हैं, उतने इतिहास में किसी और युग में नहीं रहे। लक्ष्य निर्धारण का एक बहुत बड़ा फ़ायदा यह है कि लक्ष्य होने पर आप जीवन में परिवर्तन की दिशा को नियंत्रित कर सकते हैं। लक्ष्य होने पर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपनी ज़िंदगी के ज्यादातर परिवर्तन आप खुद तय करें और वे आपकी मनचाही दिशा में हों। लक्ष्य होने पर आप हर काम को सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बना सकते हैं।

यूनानी दार्शनिक अरस्तू की एक महत्वपूर्ण नसीहत यह थी कि इंसान एक उद्देश्यपूर्ण (टेलियोलॉजिकल) प्राणी है। ग्रीक शब्द टेलियॉस का अर्थ है लक्ष्य। अरस्तू का निष्कर्ष था कि इंसान का हर काम किसी किसी अर्थ में उद्देश्यपूर्ण होता है। आप सिर्फ तभी खुश रहते हैं, जब आप कोई ऐसा काम कर रहे हों, जो आपको मनचाही चीज़ की ओर ले जा रहा हो। तो फिर बड़ा सवाल यह है, आपके लक्ष्य क्या हैं? आप किन उद्देश्यों पर निशाना साध रहे हैं? आप दिन के अंत में कहाँ पहुँचना चाहते हैं ?

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स्पष्टता ही सब कुछ है 

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आपकी नैसर्गिक संभावना असाधारण है। आपके भीतर इसी वक़्त लगभग हर वह लक्ष्य हासिल करने की क्षमता है, जिसे आप अपने लिए तय कर लें। अपने प्रति आपकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यह है कि आप पूरी तरह स्पष्ट कर लें कि आप ठीक-ठीक क्या चाहते हैं और आप इसे सबसे अच्छी तरह कैसे हासिल कर सकते हैं। अपने सच्चे लक्ष्यों के बारे में आप जितने ज़्यादा स्पष्ट होंगे, आपके बेहतर जीवन की संभावना भी उतनी ही ज़्यादा होगी।

आपने शायद यह बात सुनी होगी कि आम इंसान सिर्फ अपनी 10 प्रतिशत क्षमता का ही इस्तेमाल कर पाता है। दुखद सच्चाई यह है कि स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसार आम आदमी अपनी सिर्फ 2 प्रतिशत मानसिक क्षमता का ही इस्तेमाल कर पाता है। बाक़ी क्षमता रिज़र्व रहती है और बाद के किसी समय के लिए बचाकर रखी जाती है। यह ठीक वैसा ही होगा, जैसे आपके माता-पिता आपके लिए एक लाख डॉलर का ट्रस्ट फंड छोड़ जाएँ, लेकिन आप ख़र्च करने के लिए ज़िंदगी भर में सिर्फ़ 2,000 डॉलर ही निकालें। परिणाम बाक़ी 98,000 डॉलर अकाउंट की ही शोभा बढ़ाते रहे और आप उनका इस्तेमाल ही नहीं कर पाए लक्ष्य प्राप्ति का शुरुआती बिंदु है इच्छा। अगर आप सचमुच अपने लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, तो आपको उनके लिए ज्वलंत इच्छा विकसित करनी होगी। जत्र आपकी इच्छा तीव्र होती है, तभी आपको तमाम बाधाओं से उबरने की ऊर्जा और जोश मिलता है।

अच्छी खबर यह है कि आप जिस चीज़ को लंबे समय तक और प्रवलता से चाहें, उसे अंततः हासिल कर सकते हैं।

महान ऑइल विलियनेअर एच. एल. हंट से एक वार सफलता का रहस्य पूछा गया। उन्होंने जवाच दिया कि सफलता के लिए दो चीज़ों की ज़रूरत होती है और सिर्फ दो ही चीजों की ज़रूरत होती है। उन्होंने कहा, पहली बात, आपको यह पक्का पता होना चाहिए कि आप क्या चाहते हैं। क्योंकि ज़्यादातर लोग यह वात कभी पता कर ही नहीं पाते। दूसरी बात, आपको वह कीमत तय कर लेनी चाहिए, जो आप अपनी मनचाही चीज़ को पाने के लिए चुकाना चाहते हैं और फिर आपको वह क़ीमत चुकाने में जुट जाना चाहिए।

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सफलता का कैफेटेरिया मॉडल

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ज़िंदगी रेस्तराँ के बजाय वफ़े या कैफेटेरिया ज़्यादा है। रेस्तराँ में आप पूरा भोजन करने के बाद विल चुकाते हैं। लेकिन बफ़े या कैफेटेरिया में आप खुद परोसते हैं और भोजन का आनंद लेने से पहले ही पूरी कीमत चुकाते हैं। कई लोग गलती से यह मान बैठते हैं कि सफलता मिलने के वाद वे उसकी क़ीमत चुका देंगे। वे ज़िंदगी के स्टोव के सामने बैठकर कहते हैं, "पहले मुझे थोड़ी गर्मी दो, फिर मैं तुममें लकड़ी डालूँगा।"

जैसा कि प्रेरक वक्ता ज़िग ज़िग्लर ने एक बार कहा था, "सफलता की लिफ्ट खराव हो गई है। लेकिन सीढ़ियाँ हमेशा मौजूद हैं।"

अरस्तू का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था कि इंसान के हर काम का अंतिम उद्देश्य व्यक्तिगत खुशी पाना है। उनके अनुसार आपके हर काम का मक़सव किसी किसी तरह अपनी खुशी बढ़ाना है। आप खुशी पाने में सफल हों या असफल, खुशी हमेशा आपका अंतिम लक्ष्य होती है।

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खुशी की कुंजी

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लक्ष्य तय करना, हर दिन उनकी दिशा में काम करना और अंततः उन्हें हासिल करना ज़िंदगी में खुशी की कुंजी है। लक्ष्य तय करने में इतनी शक्ति है कि उन्हें हासिल करने की दिशा में पहला कदम उठाने से पहले ही आप रोमांचित हो उठते हैं। उनके वारे में सोचने भर से ही आप खुश हो जाते हैं।

अपनी पूरी संभावना का ताला खोलने और उसे मुक्त करने के लिए आपको हर दिन लक्ष्य निर्धारण और लक्ष्य प्राप्ति की आदत डाल लेनी चाहिए ज़िंदगी भर के लिए। आपका फ़ोकस लेज़र जैसा होना चाहिए, ताकि आप अनचाही चीज़ के बजाय हमेशा मनचाही चीज़ के बारे में सोचते और बातें करते रहें। आपको इसी पल संकल्प कर लेना चाहिए कि आप लक्ष्य तक पहुँचने वाले प्राणी वनेंगे, गाइडेड मिसाइल या पत्रवाहक कबूतर बनेंगे और विना चुके अपने महत्वपूर्ण लक्ष्यों की ओर बढ़ेंगे।

लंबे, सुखद, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की इससे बड़ी कोई गारंटी नहीं है कि आप अपनी मनचाही चीज़ हासिल करने और मनचाहा व्यक्ति बनने पर लगातार काम करें। स्पष्ट लक्ष्य होने पर आप व्यक्तिगत और व्यावसायिक सफलता की अपनी पूरी संभावना मुक्त कर सकते हैं। लक्ष्य आपको हर बाधा पार करने और भावी उपलब्धि को असीमित बनाने में समर्थ बनाते हैं।

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अपनी संभावना का ताला खोलें

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कल्पना करें कि आप अपने लिए जो भी लक्ष्य तय करेंगे, आपमें उसे हासिल करने की जन्मजात योग्यता है। आप सचमुच क्या बनना, पाना और करना चाहते हैं?

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वे कौन सी गतिविधियाँ हैं, जो ज़िंदगी में आपको सार्थकता और उद्देश्य का सबसे ज़्यादा एहसास दिलाती हैं ?

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आज ही अपने व्यक्तिगत और कार्य जीवन की ओर देखें और पहचानें कि आपकी सोच किस तरह आपके संसार को बनाती है। आपको क्या बदलना चाहिए या आप क्या-क्या बदल सकते हैं ?

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आप ज़्यादातर वक़्त किसके बारे में सोचते और बात करते हैं मनचाही चीज़ों के बारे में या अनचाही चीज़ों के बारें में ?

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आप अपने सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल करने के लिए कौन सी क़ीमत चुकाएँगे ?

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ऊपर दिए सवालों के जवाबों के आधार पर वह कौन सा एक काम है, जो आपको फ़ौरन शुरू कर देना चाहिए ?

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और दोस्तो ये था आज का चैपटर -

और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,

खुश रहें, आबाद रहें, स्वस्थ रहें, और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत 

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अपनी संभावना का ताला खोलें - लक्ष्य - Goals - लेखक : ब्रायन ट्रेसी - की ऑडियो बुक- #Audio #Book - Brian Tracy -लक्ष्य - Goals- उम्मीद से पहले पाएँ हर मनचाही चीज़- लेखक : ब्रायन ट्रेसी अपनी संभावना का ताला खोलें - लक्ष्य - Goals - लेखक : ब्रायन ट्रेसी - की ऑडियो बुक-  #Audio #Book - Brian Tracy -लक्ष्य - Goals-  उम्मीद से पहले पाएँ हर मनचाही चीज़- लेखक : ब्रायन ट्रेसी Reviewed by Shiv Rana RCM on अप्रैल 20, 2026 Rating: 5

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