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नियम -2 - शत्रुओं से काम लेना सीखें- शक्ति के 48 नियम- रॉबर्ट ग्रीन-की ऑडियो बुक- #Audio #Book-Robert Greene ------- शक्ति के 48 नियम- - की ऑडियो बुक- 48 LAWS OF POWER - #Audio #Book - Robert Greene - ----- Hindi translation of 48 LAWS OF POWER - by Robert Greene -----

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नियम -2 - शत्रुओं से काम लेना सीखें- शक्ति के 48 नियम- रॉबर्ट ग्रीन-की ऑडियो बुक- #Audio #Book-Robert Greene

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शक्ति के 48 नियम-   - की ऑडियो बुक-  48 LAWS OF POWER - #Audio #Book - Robert Greene -

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Hindi translation of 48 LAWS OF POWER - by Robert Greene

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By : रॉबर्ट ग्रीन - - Writer : Robert Greene

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नियम - 2 - मित्रों पर कभी ज़्यादा भरोसा न करें, शत्रुओं से काम लेना सीखें

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विचार

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मित्रों से सावधान रहें। मित्र बहुत जल्दी से ईर्ष्या करने लगते हैं, इसलिए वे आपको बहुत जल्दी धोखा भी देंगे। मित्र भविष्य में कष्ट का कारण बन सकते हैं। इसके बजाय अगर आप किसी पुराने शत्रु को काम पर रखेंगे, तो वह मित्र से ज़्यादा वफ़ादार होगा, क्योंकि उसे बहुत कुछ साबित करना है। दरअसल आपको शत्रुओं से नहीं, बल्कि मित्रों से डरना चाहिए। अगर आपका कोई शत्रु नहीं है. तो शत्रु बनाने के तरीके खोजें।

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यह स्वाभाविक है कि ज़रूरत पड़ने पर हम अपने मित्रों को काम पर रखना चाहते हैं। यह दुनिया निर्मम है और आपके मित्र उसकी निर्ममता को कम करते हैं। इसके अलावा, आप उन्हें अच्छी तरह जानते भी हैं। मित्रों के होते हुए किसी अजनबी पर निर्भर क्यों रहें?

 

दिक्क़त यह है कि अक्सर आप अपने मित्रों को उतनी अच्छी तरह से नहीं जानते हैं, जितना आपको लगता है। मित्र अक्सर बहसे टालने के लिए आपकी हाँ में हाँ मिला देते हैं। आपको कष्ट न पहुँचे, इसलिए वे अपने अप्रिय गुण छिपा लेते हैं। आप जब मज़ाक़ करते हैं, तो वे थोड़ा ज़्यादा हँसते हैं। चूँकि ईमानदारी और सच्चाई से मित्रता की नींव मज़बूत नहीं होती है, इसलिए वास्तव में आपको यह पता ही नहीं होता कि आपके बारे में आपके मित्रों की असली भावनाएँ क्या हैं। मित्र आपके मुँह पर तो यही कहेंगे कि उन्हें आपकी कविता बहुत अच्छी लगती है, आपका गाना-बजाना बेहद पसंद है, आपके कपड़ों का चयन बेहद सुंदर लगता है हो सकता है वे सचमुच आपकी तारीफ़ कर रहे हों, लेकिन प्रायः ऐसा नहीं होता है।

 

जब आप अपने किसी मित्र को नौकरी पर रखने का निर्णय लेते हैं, तो आपके सामने वे गुण धीरे-धीरे सामने आते हैं, जिन्हें उसने अब तक छिपा रखा था। अजीब बात यह है कि आपकी उदारता के इस काम से संबंधों का संतुलन बिगड़ जाता है। सभी लोग यह महसूस करना चाहते हैं कि उन्हें यह अवसर अपने दम पर मिला है। इसलिए आपका एहसान उन्हें बोझ की तरह लगता है। वे जानते हैं कि उन्हें योग्यता के कारण नहीं, बल्कि मित्रता के कारण नौकरी मिली। मित्रों को नौकरी देने में एक एहसान छिपा होता है, जिससे वे मन ही मन परेशान हो जाते हैं।

मित्रों का प्रयोग करने या उन्हें नौकरी पर रखने में समस्या यह है कि इससे आपकी शक्ति निश्चित रूप से सीमित हो जाएगी। बहुत कम मामलों में ही ऐसा होता है कि मित्र किसी काम के लिए सबसे योग्य व्यक्ति हो और आपकी मदद करने में सबसे ज़्यादा सक्षम हो। अंतिम विश्लेषण में, योग्यता और क्षमता मित्रतापूर्ण भावनाओं से ज़्यादा महत्वपूर्ण होती हैं।

 

कामकाज की सभी स्थितियों में लोगों के बीच थोड़ी दूरी होना चाहिए। आप मित्र बनाने की नहीं, बल्कि कोई काम करने की कोशिश कर रहे हैं और मित्रता चाहे सच्ची हो या झूठी, इस तथ्य को ढँक लेती है। शक्ति की कुंजी यह है कि आपमें यह मूल्यांकन करने की क्षमता होनी चाहिए कि आपको सबसे ज़्यादा फ़ायदा कौन पहुँचा सकता है।

 

दूसरी ओर, आपके शत्रु सोने की ऐसी अनछुई ख़ान हैं, जिसका दोहन करना आपको सीखना चाहिए। नेपोलियन का विदेश मंत्री टैलीरेंड 1807 में इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि नेपोलियन फ्रांस को बर्बादी के रास्ते पर ले जा रहा है, इसलिए उसके ख़िलाफ़ विद्रोह करना चाहिए। टैलीरैंड सम्राट के ख़िलाफ़ षड्यंत्र करने के ख़तरों को अच्छी तरह जानता था। उसे एक साथी की ज़रूरत थी। उसने सोचा, इस तरह के अभियान में वह किसी मित्र पर भरोसा नहीं कर सकता। उसने खुफिया विभाग के प्रमुख फ़ोके को चुना, जो उसका सबसे बड़ा शत्रु था और जिसने उसकी हत्या करवाने की भी कोशिश की थी। वह जानता था कि उन दोनों की पुरानी नफ़रत के कारण भावनात्मक समझौते का अवसर मिलेगा।

 

वह जानता था कि फ़ोके उससे कोई आशा नहीं रखेगा और यह साबित करने के लिए जीतोड़ मेहनत करेगा कि टैलीरैंड ने उसे चुनकर कोई ग़लती नहीं की है। जो व्यक्ति कुछ साबित करना चाहता है, वह आपके लिए ज़मीन-आसमान एक कर देगा। अंत में टैलीरेंड यह जानता था कि फोके के साथ उसका संबंध आपसी स्वार्थ पर आधारित होगा और मित्रता की व्यक्तिगत भावनाओं द्वारा दूषित नहीं होगा। उसका चुनाव सही साबित हुआ, हालाँकि वे नेपोलियन को सिंहासन से उतारने में सफल नहीं हुए। जब इतने शक्तिशाली और परस्पर विरोधी दो व्यक्तियों ने मिलकर सम्राट के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ी, तो जनता ने भी इसमें उत्सुकता दिखाई और धीरे-धीरे सम्राट के प्रति विरोध बढ़ने लगा। टैलीरैंड और फ़ोके के बीच सुखद कार्यकारी संबंध बने रहे। इसलिए जब भी मौक़ा मिले, अपने दुश्मन के प्रति दुश्मनी को दफ़न कर दें और उसे अपनी सेवा में रखने की कोशिश करें।

शत्रुओं की मौजूदगी से विचलित या दुखी न हों। आप मित्र के बजाय शत्रु के साथ बेहतर स्थिति में होते हैं, क्योंकि मित्रों के मामले में आपको यह मालूम ही नहीं होता है कि आपके छिपे हुए कौन से मित्र दरअसल आपके शत्रु हैं। शक्तिशाली व्यक्ति संघर्ष से लाभ उठाता है और अपने शत्रुओं का इस्तेमाल करता है। ऐसा करके वह उस आत्मविश्वासी योद्धा की छवि बना लेता है, जिस पर अनिश्चितता के समय में विश्वास किया जा सकता है।

 

तस्वीर : कृतघ्नता का जबड़ा आप जानते हैं कि अगर आप शेर के मुँह में उँगली रखेंगे, तो इसका परिणाम क्या होगा। इसलिए आप ऐसा नहीं करते हैं। मित्रों के साथ आप इस तरह की सतर्कता नहीं रखते हैं, इसलिए अगर आप उन्हें नौकरी पर रखेंगे, तो वे कृतघ्नता से आपको कच्चा चबा जाएँगे।

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विशेषज्ञ की राय यह सीखें कि अपने लाभ के लिए दुश्मनों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। आपको धार की तरफ़ से तलवार नहीं पकड़नी चाहिए, वरना आपका हाथ कट जाएगा। इसके बजाय आपको मूठ की तरफ़ से तलवार पकड़नी चाहिए, ताकि आप खुद की रक्षा कर सकें। बुद्धिमान व्यक्ति अपने शत्रुओं से भी लाभ लेता है, जबकि मूर्ख व्यक्ति अपने मित्रों से भी हानि उठाता है। (बाल्तेसर ग्रेशियन, 1601-1658)

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अपने शत्रुओं से लाभ लेना

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सम्राट हिएो को एक बार उनके एक शत्रु ने बताया कि उनके मुँह से बहुत बदबू आती है।

सम्राट को यह बात बहुत बुरी लगी और महल में पहुँचते ही उन्होंने रानी को फटकारा, "तुमने मुझे कभी इसके बारे में क्यों नहीं बताया ?" रानी चरित्रवान, पतिव्रता और भोली थी। उसने कहा, "स्वामी, मुझे लगा कि शायद सभी मर्दों के मुँह से इसी तरह की बदबू आती होगी।" इस तरह से यह स्पष्ट हो जाता है कि जो दोष स्पष्ट दिखाई देते हैं, उनके बारे में हमारे शत्रु हमारे मित्रों या परिचितों से ज्यादा जानते हैं। - प्लूटार्क, 46-120 ईस्वी -

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किसी के दिए लाभके बजाय नुकसान का बदला चुकाने के लिए लोग ज़्यादा तत्पर होते हैं, क्योंकि कृतज्ञता बोझ है और प्रतिशोध आनंद है। -टैसिटस, - 55-120 ईस्वी

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और दोस्तो ये था आज का चैपटर -

और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,

आप हमेशा खुश रहें, आबाद रहें, स्वस्थ रहें, और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत 

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