नियम -3 -अपने इरादे छिपाकर रखें- शक्ति के 48 नियम- रॉबर्ट ग्रीन-की ऑडियो बुक- #Audio #Book-Robert Greene ------- शक्ति के 48 नियम- - की ऑडियो बुक- 48 LAWS OF POWER - #Audio #Book - Robert Greene - ----- Hindi translation of 48 LAWS OF POWER - by Robert Greene
नियम -3 -अपने इरादे
छिपाकर रखें- शक्ति के 48 नियम- रॉबर्ट ग्रीन-की ऑडियो बुक- #Audio #Book-Robert Greene
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शक्ति के 48 नियम- - की ऑडियो बुक- 48
LAWS OF POWER - #Audio
#Book - Robert Greene -
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Hindi translation of 48 LAWS OF POWER - by Robert Greene
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By : रॉबर्ट ग्रीन - - Writer : Robert Greene
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नियम - 3 - अपने इरादे छिपाकर रखें
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विचार
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आप किस उद्देश्य से
काम कर रहे हैं, यह ज़ाहिर न होने दें। इससे लोग अँधेरे में रहेंगे और अपनी योजना नहीं
बना पाएँगे। अगर उन्हें इस बात का अंदाज़ा ही नहीं होगा कि आप क्या करना चाहते हैं,
तो वे अपनी रक्षा की योजना नहीं बना सकते। इस तरह आप उन्हें गलत दिशा में काफ़ी दूर
तक ले जा सकते हैं और काफ़ी समय तक गुमराह कर सकते हैं। जब तक उन्हें आपके इरादों का
एहसास होगा, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
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ज़्यादातर लोग खुली
किताब की तरह होते हैं। वे अपने मन की बात तत्काल कह देते हैं। वे मौक़ा मिलत ही अपने
विचार प्रकट कर देते हैं। वे अपनी योजनाओं और इरादों के बारे में लगातार बोलते रहते
हैं। वे ऐसा कई कारणों से करते हैं। पहली बात, अपनी भावनाओं और भावी योजनाओं के बारे
में बातें करने की इच्छा बहुत आम और स्वाभाविक होती है। अपनी जुबान पर लगाम कसना और
अपनी बातों पर नियंत्रण रखना मुश्किल होता है। दूसरी बात, कई लोग यह मानते हैं कि ईमानदारी
और स्पष्टतावादिता से वे लोगों का दिल जीत लेंगे और अपनी भलमनसाहत को प्रमाणित कर देंगे।
वे बहुत मुगालते में रहते हैं। ईमानदारी दरअसल एक भौंधरा हथियार है, जिससे कटता कम
है, खून ज़्यादा बहता है। आपकी ईमानदारी से लोगों को चोट पहुँचने की संभावना ज़्यादा
होती है। इसलिए समझदारी इसी में है कि शब्दों को नाप-तौलकर बोलें। बुद्धिमानी इसमें
है कि लोगों से वही कहें, जो लोग सुनना चाहते हैं। यह समझदारी नहीं है कि आप उन्हें
वह कटु सच्चाई बता दें, जो आप महसूस करते या सोचते हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह
है कि जब आप अपने इरादों और भावी योजनाओं के बारे में खुलकर बता देते हैं, तो आपके
बारे में कुछ भी छिपा नहीं रह जाता है। ऐसी स्थिति में लोग न तो आपका सम्मान करेंगे,
न ही आपसे डरेंगे। ध्यान देने वाली बात जिसका लोग सम्मान नहीं करते हैं या जिससे लोग
डरते नहीं हैं, उस व्यक्ति के पास शक्ति कभी नहीं आती है।
अगर आप शक्ति
चाहते हैं, तो ईमानदारी को एक तरफ़ रख दें
और अपने इरादों को छिपाने की कला सीखें। अगर आप इस कला में पारंगत हो जाएँगे, तो आप
हमेशा फ़ायदे में रहेंगे। इरादों को छिपाने की योग्यता के पीछे मानवीय स्वभाव की यह
साधारण सी सच्चाई है : प्रायः हम दिखने वाली चीज़ों पर भरोसा करते हैं। हम जो देखते
और सुनते हैं, उसकी सच्चाई पर हम संदेह नहीं करते हैं। अगर हम दिखने वाली चीज़ों के
पीछे दूसरी चीज़ों के छिपे होने की कल्पना करेंगे, तो हम न सिर्फ़ बहुत थक जाएँगे,
बल्कि दहशत में भी रहेंगे। इस कारण इरादों को छिपाना तुलनात्मक रूप से ज़्यादा आसान
हो जाता है। ऐसा लक्ष्य या उद्देश्य बताएँ, जिससे लोग प्रभावित हो जाएँ। ज़रूरी नहीं
है कि आपका असली लक्ष्य वही हो। जब आप उस लक्ष्य को लोगों की आँखों के सामने बार-बार
रखते रहेंगे, तो वे उसे ही आपका असली लक्ष्य मान लेंगे।
इरादों को छिपाने का
एक तरीक़ा यह है कि आप अपनी इच्छाओं और लक्ष्यों के बारे में लगातार बातें करें लेकिन
वे आपकी असली इच्छाएँ और लक्ष्य नहीं होने चाहिए। इस तरह आप एक पत्थर से तीन शिकार
करेंगे आप दोस्ताना, निष्कपट और विश्वसनीय नज़र आएँगे; आप अपने इरादों को छिपा लेंगे;
और आप अपने प्रतिद्वंद्वियों को गलत दिशा में भेज देंगे,
जिससे उनका समय बर्बाद होगा।
लोगों को गुमराह करने
का एक और सशक्त औज़ार है झूठी निष्कपटता (सिंसेरिटी)। लोग गलती से निष्कपटता को ईमानदारी
मान लेते हैं। जब लोगों को ऐसा लगता है कि आप जो कह रहे हैं, उसमें आप विश्वास करते
हैं, तो इससे आपके शब्दों का वज़न बहुत बढ़ जाता है। इयागो ने इसी तरह ओथेलो को धोखा
दिया था और उसे बर्बाद किया था। ऐसा लग रहा था कि इयागो की भावनाएँ सच्ची हैं। ऐसा
लग रहा था कि डेस्डेमोना की बेवफ़ाई के बारे में उसकी चिंता निष्कपट है। ऐसे में ओथेलो
उस पर अविश्वास कैसे कर सकता था ?
अगर आप यह मानते हैं
कि धोखेबाज़ लोग हवाबाज़ होते हैं, जो बड़े-बड़े झूठों और अतिशयोक्तिपूर्ण कहानियों
से गुमराह करते हैं, तो आप बहुत गलत सोचते हैं। सबसे अच्छे धोखेबाज़ वे होते हैं, जो
उदासीन और अदृश्य मुखौटे का इस्तेमाल करते हैं, जिस वजह से उनकी तरफ़ किसी का ध्यान
नहीं जाता है।
वे जानते
हैं कि अनावश्यक शब्दों और हरकतों से लोगों
का संदेह तत्त्काल जाग जाएगा। इसलिए वे अपने लक्ष्य को सामान्य, जाने-पहचाने और मासूम
शब्दों के पीछे छिपा लेते हैं।
एक बार जब आप जाने-पहचाने
शब्दों का इस्तेमाल करके लोगों की सतर्कता को दबा देंगे, तो फिर उनका ध्यान इस तरफ़
नहीं जाएगा कि इन शब्दों के पीछे धोखा देने के इरादे हैं। आपका नक़ाब जितना एकरूप होगा,
आपके इरादे उतनी ही अच्छी तरह छिपे रहेंगे।
नक़ाब का सबसे आसान
रूप है चेहरे के भाव। उदासीन और भावहीन चेहरे के पीछे हर तरह की विनाशकारी योजना बनाई
जा सकती है, जिसकी किसी को भनक भी नहीं लगेगी। इतिहास के सबसे शक्तिशाली लोग इस हथियार
का इस्तेमाल करने में निपुण थे। कहा जाता है कि फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के चेहरे को
देखकर कोई भी उनके दिल की बात नहीं समझ सकता था। बैरन जेम्स रॉथ्सचाइल्ड ने तो पूरी
जिंदगी इस बात का अभ्यास किया कि वे नक़ली मुस्कराहटों और भावहीन चेहरे के पीछे अपने
असली विचार छिपा लें।
याद रखें : अपनी प्रभावशाली
बाकपटुता को छिपाने और भावहीनता का नक़ाब पहनने में धैर्य और विनम्रता की ज़रूरत होती
है। इस तरह के नीरस नक़ाब को लगाकर निराश न हों। अक्सर भावहीनता से लोग आपकी तरफ़ आकर्षित
होते हैं और आप शक्तिशाली नज़र आने लगते हैं।
तस्वीर भेड़ की खाल।
भेड़ कभी अचानक हमला नहीं करती है, भेड़ कभी धोखा नहीं देती है, भेड़ बहुत ही सीधी
और आज्ञाकारी होती है। भेड़ की खाल पहनकर लोमड़ी बड़े आराम से मुर्गियों के दड़बे में
घुस सकती है।
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विशेषज्ञ
की राय : जो योग्य सेनापति शत्रु पर अत्तचानक
हमला करने का इरादा रखता है, वह अपने शत्रु को अपने इरादे की भनक भी नहीं लगने देता
है। अपने उद्देश्य और अपनी प्रगति को छिपाएँ। अपनी योजनाओं को तब तक प्रकट न करें,
जब तक कि उनका विरोध करना असंभव न हो जाए, जब तक कि युद्ध पूरा ही न हो जाए। युद्ध
की घोषणा करने से पहले ही विजय हासिल कर लें। संक्षेप में, उन सेनापतियों का अनुसरण
करें, जिनकी योजनाएँ सिर्फ़ उन्हीं बर्बाद इलाक़ों को मालूम होती हैं, जहाँ से वे अपनी
सेना लेकर गुज़रे हैं। (निनॉन डे ला" एन्क्लोस, 1623-1706)
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हालाँकि आज की दुनिया
में चालाक बने बिना काम नहीं चल सकता, लेकिन चालाकी की छवि न बनाएँ। आपकी सबसे बड़ी
चालाकी यह होना चाहिए कि आप अपनी चालाकी को छिपा लें।-- बाल्थासार ग्रेटियन,
1601-1658---
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भरी दोपहर में समुद्र
पार करें इसका मतलब यह है कि अपने चेहरे के सामने जाना-पहचाना मुखौटा लगा लें। चूँकि
सब लोगों को जानी-पहचानी चीजें देखने की आदत पड़ जाती है, इसलिए रणनीति बनाने वाला
नज़र आए बिना आराम से अपनी योजना बना सकता है। -"द थर्टी सिक्स स्ट्रैटजीज़,"
थॉमस क्लियरी द्वारा उद्धृत, द जापानीज आर्ट ऑफ वार, 1991
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और दोस्तो ये था आज
का चैपटर -
और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
आप हमेशा खुश रहें, आबाद रहें, स्वस्थ रहें,
और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत
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Reviewed by Shiv Rana RCM
on
जून 01, 2026
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