LOK VYAVHAR BOOK SUMMARY IN HINDI - लोक व्यवहार in हिंदी लोक व्यवहार, प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला - लोक व्यवहार के मुख्य सिद्धांत - यह पुस्तक आपके लिए आठ काम करेगी - यह पुस्तक कैसे और क्यों लिखी गई - Lok Vyavhar (How to Win Friends and Influence People - Hindi) - Lok Vyavhar (Hindi) https://shivabooklibrary.blogspot.com/
LOK VYAVHAR BOOK SUMMARY IN HINDI - लोक व्यवहार in हिंदी लोक व्यवहार, प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला - लोक व्यवहार के मुख्य सिद्धांत - यह पुस्तक आपके लिए आठ काम करेगी - यह पुस्तक कैसे और क्यों लिखी गई - Lok Vyavhar (How to Win Friends and Influence People - Hindi) - Lok Vyavhar (Hindi)
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लोक व्यवहार, प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला
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हैल्लो दोस्तो, नमस्कार, आदाव, स्वागत है आपका मेरे चैनल पर आज मैं आपको ऐसी पुस्तक के बारे में बताने जा रहा हूं, जिसका नाम हैं लोक व्यवहार, प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला, चलिए सुनते है इस बुक की समरी और आप इस बुक को विस्थार सें अलग अलग भागों में सुन पाएगें।
आईये शुरू करते हैं।
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लोक व्यवहार जीवन की वह कला दर्शन है जो मनुष्य होने के नाते सबको प्रभावित करता है लेकिन कोई भी कला तब तक प्रभावित नहीं करती जब तक आप व्यवहार सिद्धांत को जमीनी हकीकत से नहीं मिलाते। आप चाहे किसी वर्ग या पेशे से हों, जीवन में आगे बढ़ने और सफलता पाने के लिए दूसरों को प्रभावित करना जरूरी है।
डेल कारनेगी की ‘लोक व्यवहार’ पुस्तक दिलचस्प शैली और सरल भाषा में पाठकों को जनसामान्य से जुड़ने के अचूक तरीके बताती है। जो प्रत्येक पाठक को जीवन जीने की कला को विकसित करती है।पुस्तक के आकर्षण• नए सपनों का सृजन करेगी।• शीघ्र नये दोस्त बनाने में मददगार।• एक अच्छा वक्ता बनाएगी।• साथियों में जोश भरना सिखाएगी।• सफलता के लिए लोगों को प्रेरित करती है।लोक व्यवहार सुधारेंऔर लोगों का दिल जीतें।
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लोक व्यवहार के मुख्य सिद्धांत:
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- दूसरों का सम्मान करें: - दूसरों के विचारों का सम्मान करें और उन्हें गलत ठहराने से बचें।
- प्रोत्साहन दें: - दूसरों को प्रोत्साहित करें और उनकी गलतियों को सुधारने में मदद करें।
- सहानुभूति रखें: - दूसरों की भावनाओं और इच्छाओं के प्रति सहानुभूति दिखाएं।
- वास्तविक रुचि दिखाएं: - लोगों में वास्तविक और सच्ची रुचि दिखाएं।
- सकारात्मक रहें: - हमेशा मुस्कुराएं और अपनी बातचीत की शुरुआत सकारात्मक तरीके से करें।
- दूसरों की तारीफ करें: - दूसरों के अच्छे गुणों की तारीफ करें और सुधारों के लिए भी खुले दिल से सराहना करें।
- अच्छा श्रोता बनें: - दूसरों को बोलने के लिए प्रोत्साहित करें और एक अच्छे श्रोता बनें।
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यह पुस्तक आपके लिए आठ काम करेगी
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1 आपके दिमाग पर लगी जंग साफ़ करेगी, नए विचार देगी, आपमें नए सपने जगाएगी और नई महत्वाकांक्षाओं की प्रेरणा देगी।
2 आपको ऐसा तरीका बताएगी जिससे आप जल्दी से और आसानी से दोस्त बना सकेंगे।
3 आपकी लोकप्रियता बढ़ाएगी।
4. लोगों से आपकी बात मनवाने में मदद करेगी।
5. आपके प्रभाव, मान-सम्मान को बढ़ाएगी और काम कराने की योग्यता को बढ़ाएगी।
6. शिकायतों से निपटने, बहस से बचने, और संबंधों को मधुर बनाने के तरीके सिखाएगी।
7. एक अच्छा वक्ता और दिलचस्प बातें करने वाला बनाएगी।
8. आपके साथियों में उत्साह भरने का तरीका सिखाएगी।
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दोस्तो यह थी - इस बुक की समरी,
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और अब सुनते है यह पुस्तक क्यो लिखी गई
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लोक व्यवहार
यह पुस्तक कैसे और क्यों लिखी गई
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बीसवीं सदी के शुरुआती पैंतीस सालों में अमेरिका में दो लाख से भी अधिक किताबें छपीं। उनमें से ज़्यादातर बेजान और नीरस थीं और बिक्री के लिहाज़ से भी उनमें से कई घाटे का सौदा थीं। मैंने क्या कहा, कई?' एक बड़े प्रकाशन समूह के प्रेसिडेंट ने यह स्वीकार किया कि हालाँकि उनकी कंपनी को प्रकाशन का पचहत्तर वर्षों का अनुभव है, फिर भी कंपनी को आठ में से सात किताबों में घाटा उठाना पड़ता है।
सवाल यह है कि यह जानने के बाद भी मैं यह किताब लिखने की जुर्रत क्यों कर रहा हूँ। और अगर मैं ऐसा कर रहा हूँ, तो आप इसे पढ़ने का कष्ट क्यों करें ?
दोनों ही सवाल वाजिब हैं, और मैं इन दोनों का जवाब देने की कोशिश करूँगा।
1912 से मैं न्यूयॉर्क में बिज़नेस से जुड़े व्यक्तियों और प्रोफ़ेशनल लोगों के लिए अपना शैक्षणिक पाठ्यक्रम चला रहा हूँ। शुरुआत में तो मैं सिर्फ़ लोगों को सार्वजनिक रूप से बोलने की कला सिखाता था ऐसे कोर्स जिनका लक्ष्य था वयस्क लोगों के दिल से बोलने का डर दूर करना, उनमें इतना आत्मविश्वास पैदा करना कि वे अपने पैरों पर खड़े होकर ज़्यादा स्पष्ट तरीके से अपने विचार व्यक्त कर सकें, चाहे वे बिज़नेस इंटरव्यू में बोल रहे हों या समूह में चर्चा कर रहे हों।
परंतु कुछ समय बाद मुझे यह महसूस हुआ कि न सिर्फ़ प्रभावी ढंग से बोलने की कला महत्वपूर्ण है, बल्कि लोगों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे रोज़मर्रा के बिज़नेस और सामाजिक जीवन में लोगों के साथ किस तरह व्यवहार करें।
मैंने यह भी महसूस किया कि मुझे भी ऐसे प्रशिक्षण की सख़्त ज़रूरत थी। जब मैंने पीछे मुड़कर अपने बीते हुए सालों को देखा तो मैं काँप गया कि समझदारी की कमी और इस कला के अज्ञान की वजह से मैंने ज़िंदगी में कितनी सारी गलतियाँ की थीं। काश किसी ने मेरे हाथों में ऐसी कोई पुस्तक बीस साल पहले रखी होती, यह मेरे लिए कितना अनमोल तोहफ़ा होता !
अगर आप बिज़नेस में हैं, तो लोगों को प्रभावित करना शायद आपकी सबसे बड़ी चुनौती होगी। अगर आप गृहिणी, या वास्तुविद या इंजीनियर हैं, तो भी आप लोगों को प्रभावित करना चाहते होंगे।
कुछ साल पहले कारनेगी फ़ाउंडेशन फ़ॉर द एडवांसमेंट ऑफ़ टीचिंग के तत्वावधान में एक रिसर्च की गई। इससे एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य पता चला एक ऐसा तथ्य जिसे कारनेगी इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में हुए अतिरिक्त अध्ययनों ने सही ठहराया। इस शोध से पता चला कि किसी की आर्थिक सफलता का केवल 15 प्रतिशत ही उसके तकनीकी ज्ञान पर निर्भर करता है, जबकि उसकी सफलता का 85 प्रतिशत उसके व्यवहार की कला पर निर्भर करता है, यानी उसका व्यक्तित्व और लोगों का नेतृत्व करने की उसकी कला उसे 85 प्रतिशत सफलता दिलवाती है।
कई सालों तक मैंने फिलाडेल्फिया के इंजीनियर्स क्लब में अपने कोर्स चलाए। इसके अलावा मैं अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स की न्यूयॉर्क शाखा के लिए भी कोर्सेज़ चला चुका हूँ। शायद डेढ़ हज़ार से भी ज़्यादा इंजीनियर मेरी कक्षाओं में आ चुके हैं। वे मेरे पास इसलिए आए क्योंकि वर्षों के अनुभव ने उन्हें यह सिखा दिया था कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में सबसे ज़्यादा तनख्वाह उन्हें नहीं मिलती जिनके पास इंजीनियरिंग का सबसे ज़्यादा ज्ञान है, बल्कि उन लोगों को मिलती है जिनमें व्यवहार की कला है। केवल तकनीकी ज्ञान या योग्यता के लिए आप किसी भी इंजीनियर, अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट को नाममात्र की तनख्वाह पर नौकरी पर रख सकते हैं। परंतु अगर किसी व्यक्ति में तकनीकी ज्ञान है, अपने विचारों को व्यक्त करने की कला है, लीडर बनने की योग्यता है और लोगों में उत्साह भरने की क्षमता है तो उसकी तनख्वाह निश्चित रूप से अधिक होगी।
अपने सबसे सफल दौर में जॉन डी. रॉकफेलर ने कहा था, "लोगों से व्यवहार करने की कला भी उसी तरह ख़रीदी जाने वाली एक वस्तु है जैसे कि शकर या कॉफ़ी।" जॉन डी. ने यह भी कहा था, "और मैं इस कला के लिए दुनिया की किसी भी चीज़ से ज़्यादा क़ीमत देने के लिए तैयार हूँ।"
क्या आपको नहीं लगता कि जो कला दुनिया की किसी भी चीज़ से ज़्यादा क़ीमती है, उसे सिखाने के लिए दुनिया के हर कॉलेज में कोर्स चलने चाहिए? परंतु मैंने तो आज तक ऐसे किसी कोर्स या कॉलेज का नाम नहीं सुना।
युनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और युनाइटेड वाय.एम.सी.ए. स्कूल्स ने एक सर्वे कराया जिसमें लोगों से यह पूछा गया था कि वे क्या सीखना चाहते हैं।
इस सर्वे पर 25,000 डॉलर ख़र्च हुए और इसमें दो साल का समय लगा। सर्वे का अंतिम हिस्सा मेरिडन, कनेक्टिकट में किया गया। मेरिडन को एक औसत अमेरिकी क़स्बे के रूप में चुना गया था। मेरिडन के हर वयस्क के विचार जाने गए और उनसे 156 सवालों के जवाब पूछे गए इस तरह के सवाल जैसे, "आपका व्यवसाय या प्रोफ़ेशन क्या है? आपकी शिक्षा ? आप अपना ख़ाली समय किस तरह बिताते हैं? आपकी हॉबी क्या हैं? आपकी महत्वाकांक्षाएँ ? आपकी समस्याएँ ? आप किन विषयों के अध्ययन में सबसे अधिक रुचि रखते हैं?" इत्यादि। इस सर्वे का निष्कर्ष यह था कि वयस्कों की सर्वाधिक रुचि का विषय स्वास्थ्य है। इसके बाद सर्वाधिक रुचि का दूसरे नंबर का विषय था लोगों को समझना और लोगों से मेलजोल बढ़ाने के तरीके सीखना, यह जानना कि लोगों का दिल किस तरह जीता जाए और उन्हें प्रभावित कैसे किया जाए।
तो सर्वे कराने वाली कमेटी ने यह निर्णय लिया कि मेरिडन के वयस्कों के लिए ऐसा कोर्स आयोजित कराना चाहिए। उन्होंने इस विषय पर व्यावहारिक पाठ्यपुस्तक की खोज की, परंतु बड़ी मेहनत और खोजबीन के बाद भी उन्हें इस विषय पर काम की एक भी किताब नहीं मिली। आख़िरकार वे एडल्ट एज्युकेशन के एक विशेषज्ञ के पास गए और उनसे पूछा कि क्या इस विषय पर कोई अच्छी पुस्तक लिखी गई है। उनका जवाब था, "नहीं। मैं समझ सकता हूँ कि ये लोग कैसी पुस्तक चाहते हैं। परंतु इन लोगों को जिस पुस्तक की ज़रूरत और तलाश है, वैसी पुस्तक आज तक लिखी ही नहीं गई।"
मैं अपने अनुभव से जानता था कि यह बात सच थी क्योंकि मैंने भी ऐसी पुस्तक कई वर्षों तक खोजी थी, एक ऐसी पुस्तक जो मुझे लोगों के साथ व्यवहार करने की कला सिखा सके, लोगों को प्रभावित करने के सिद्धांत सिखा सके।
चूँकि ऐसी कोई पुस्तक आज तक नहीं लिखी गई है, इसलिए मैंने अपने कोर्स के लिए ऐसी पुस्तक लिखने की कोशिश की है। मुझे आशा है यह आपको पसंद आएगी।
इस पुस्तक की तैयारी में मैंने बहुत मेहनत की है। इस विषय पर जहाँ से भी जानकारी मिलने की संभावना थी, मैंने वह सब पढ़ा। अखबार, पत्रिकाओं के लेख, पारिवारिक अदालतों के रिकॉर्ड, नए मनोवैज्ञानिकों और पुराने दार्शनिकों की पुस्तकें- मैंने ये सब पढ़े। इसके अलावा, मैंने एक प्रशिक्षित शोधकर्ता को भी डेढ़ साल तक काम पर रखा ताकि वह विभिन्न पुस्तकालयों में जाकर वह सब कुछ पढ़े जो मुझसे छूट गया था। मनोविज्ञान की जटिल पुस्तकें, पत्रिकाओं के सैकड़ों लेख, अनगिनत जीवनियाँ पढ़ी गईं। ताकि यह जाना जा सके कि सभी युगों के महानतम लीडर लोगों के साथ किस तरह व्यवहार करते थे। हमने उनकी जीवनियाँ पढ़ीं। हमने जूलियस सीज़र से लेकर थॉमस एडीसन तक सभी महान लीडर्स के जीवनचरित्र पढ़ डाले। मुझे याद है कि हमने अकेले थियोडोर रूजवेल्ट की ही सौ जीवनियाँ पढ़ीं। हमने यह तय कर लिया था कि हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे, चाहे कितना भी ख़र्च हो जाए।
हमने अपने प्रयास में कोई कमी नहीं रखी और हमने लोगों को प्रभावित करने के हर प्रैक्टिकल तरीके को जानने की पूरी कोशिश की।
सफल लोगों के मैंने व्यक्तिगत रूप से इंटरव्यू लिए जिनमें से कुछ विश्वप्रसिद्ध थे मार्कोनी और एडीसन जैसे आविष्कारक, फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट और जेम्स फ़ार्ले जैसे राजनीतिज्ञ, ओवेन डी. यंग जैसे बिज़नेस लीडर, क्लार्क गेबल और मैरी पिकफ़ोर्ड जैसे मूवी स्टार्स और मार्टिन जॉनसन जैसे खोजी लोग। मैंने इन सभी लोगों से यह जानने की कोशिश की कि लोगों से व्यवहार करते समय वे किन तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।
इस सारी सामग्री से मैंने एक छोटा सा लेक्चर तैयार किया। मैंने इसे नाम दिया, "हाऊ टु विन फ्रेंड्स एंड इन्फ्लुएंस पीपुल"। मैंने कहा, "छोटा"। शुरुआत में यह छोटा था, परंतु जल्दी ही यह डेढ़ घंटे का लेक्चर बन गया। सालों तक मैं न्यूयॉर्क के कारनेगी इन्स्टीट्यूट के कोर्सेज़ में यह लेक्चर देता रहा।
इस लेक्चर के बाद मैं श्रोताओं को प्रेरित करता था कि वे अपनी दुनिया में जाकर इन सिद्धांतों का प्रयोग करें, बिज़नेस और सामाजिक क्षेत्रों में इन्हें आज़माएँ और फिर क्लास में आकर अपने अनुभवों और परिणामों के बारे में बताएँ। यह बहुत दिलचस्प होमवर्क था। ये सभी पुरुष और महिलाएँ आत्म-सुधार के लिए उत्सुक थे और उन्हें इस नई तरह की प्रयोगशाला में काम करने का विचार बहुत आकर्षक लगा। इसमें कोई संदेह नहीं था कि यह एक नए क़िस्म की प्रयोगशाला थी मानवीय संबंधों की पहली और एकमात्र प्रयोगशाला।
यह पुस्तक उस तरह नहीं लिखी गई है, जैसे आम तौर पर पुस्तकें लिखी जाती हैं। यह तो उस तरह धीरे-धीरे बड़ी हुई है, जिस तरह कोई बच्चा बड़ा होता है। यह एक प्रयोगशाला में बड़ी हुई है, और इसमें हज़ारों वयस्कों के अनुभवों का निचोड़ है।
सालों पहले, हमने पोस्टकार्ड साइज़ के कार्ड पर लिखे सूत्रों से शुरुआत की थी। अगले साल हमने एक बड़ा कार्ड छपवाया, फिर एक लीफ़लेट, फिर बुकलेट की श्रृंखला, और इसका आकार और दायरा बढ़ता चला गया। पंद्रह साल के प्रयोगों और शोध के बाद यह पुस्तक आई।
यहाँ जो नियम दिए गए हैं, वे कोरे सिद्धांत या अँधेरे में छोड़े गए तीर नहीं हैं। वे जादू की तरह असर दिखाते हैं। आपको यक़ीन नहीं होगा, परंतु मैंने देखा है कि इन सिद्धांतों पर चलने से कई लोगों की ज़िंदगी में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं।
एक उदाहरण लें। 314 कर्मचारियों वाले एक मालिक ने इस कोर्स में भाग लिया। सालों से यह मालिक अपने कर्मचारियों को बिना झिझके या बिना रुके डाँटता-फटकारता आ रहा था। दयालुता, प्रशंसा, प्रोत्साहन जैसे शब्द उसकी डिक्शनरी में थे ही नहीं। इस पुस्तक में दिए गए सिद्धांतों के अध्ययन के बाद इस मालिक ने अपने जीवन की फ़िलॉसफ़ी पूरी तरह बदल डाली। अब उसके ऑफ़िस में एक नए क़िस्म की वफ़ादारी, नया उत्साह, नया टीमवर्क नज़र आता है। पहले उसके 314 दुश्मन हुआ करते थे,
अब उसके 314 दोस्त बन चुके हैं। जैसा उसने क्लास के सामने अपने भाषण में गर्व से कहा, "पहले जब मैं अपने ऑफ़िस में घुसता था, तो कोई मुझे नमस्ते तक नहीं करता था। मेरे कर्मचारी मुझे आते देखकर अपना मुँह फेर लेते थे। परंतु अब वे मेरे दोस्त बन चुके हैं और दरबान तक मुझे नाम से सम्मानपूर्वक बुलाता है।"
इस मालिक को अपना व्यवहार बदलने से ज़्यादा मुनाफ़ा हुआ, ज़्यादा फुरसत मिली- और जो चीज़ इनसे बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण है- उसे अपने बिज़नेस और घर में ज़्यादा सुख मिला।
इन सिद्धांतों के इस्तेमाल से अनगिनत सेल्समैन अपनी बिक्री को बहुत तेज़ी से बढ़ाने में कामयाब हुए हैं। कई ने नए ग्राहक बना लिए हैं- ऐसे ग्राहक जो पहले उनसे सामान ख़रीदने के लिए तैयार नहीं थे। एक्ज़ीक्यूटिव्ज़ अपनी तनख्वाह और प्रभाव बढ़वाने में कामयाब हुए हैं। एक एक्ज़ीक्यूटिव ने बताया कि इन सच्चे सिद्धांतों पर अमल करने के बाद उसकी तनख्वाह बहुत बढ़ गई।
फिलाडेल्फिया गैस वर्क्स कंपनी के एक और एक्ज़ीक्यूटिव का कहना था कि पैंसठ वर्ष की उम्र में अपने लड़ाकू स्वभाव के कारण उसका डिमोशन होने वाला था। इस ट्रेनिंग की वजह से न सिर्फ उसका डिमोशन रुक गया बल्कि उसका प्रमोशन हो गया और उसकी तनख्वाह बढ़ गई।
अनगिनत बार, पत्नियों ने कोर्स ख़त्म होने पर मुझे गुलदस्ते दिए हैं और यह बताया है कि जब से उनके पतियों ने इस कोर्स में भाग लिया है, उसके बाद से उनके घर का माहौल ज़्यादा सुखद हो गया है।
लोगों को अक्सर हैरत होती है कि इन सिद्धांतों में ऐसा क्या है, जिसके ऐसे चमत्कारी परिणाम मिलते हैं। मैं आपको बता दूँ कि इन सिद्धांतों में जादू है। कई बार तो लोग इतने ज़्यादा उत्साहित हो गए कि उन्होंने मुझे रविवार के दिन घर पर फ़ोन किया, क्योंकि वे अपनी उपलब्धि या परिणाम के बारे में बताने के लिए एक दिन का इंतज़ार नहीं कर सकते थे।
एक व्यक्ति इन सिद्धांतों पर हो रही चर्चा में इतना तल्लीन हो गया कि वह क्लास के दूसरे सदस्यों के साथ देर रात तक इन पर विचार करता रहा। तीन बजे सुबह उसके साथी घर चले गए परंतु वह अपनी पिछली गलतियों पर विचार करने में इतना मशगूल था, नए और अधिक समृद्ध संसार के खुलने के विचार को लेकर इतना प्रेरित था कि उसकी नींद उड़ गई। वह उस रात नहीं सोया, न ही अगले दिन, न ही अगली रात।
वह कौन था ? कोई नादान, या अप्रशिक्षित व्यक्ति जो किसी भी नए सिद्धांत को लेकर उत्साहित हो गया ? नहीं। ऐसा बिलकुल नहीं था। वह एक सफल आर्ट डीलर था, जो तीन भाषाओं का विशेषज्ञ था और दो यूरोपियन विश्वविद्यालयों से ग्रैजुएट था।
इस अध्याय को लिखते समय, मुझे पुराने स्कूल के एक जर्मनीवासी का पत्र मिला। यह व्यक्ति एक सामंत था जिसके पूर्वज कई पीढ़ियों तक सेना के अफ़सर रह चुके हैं। उसने यह पत्र एक जहाज़ से लिखा था। इसमें उसने बताया था कि इन सिद्धांतों पर अमल करने से उसके जीवन में कितने अद्भुत परिवर्तन हुए हैं। उसके पत्र की भाषा में लगभग धार्मिक उन्माद झलक रहा था।
न्यूयॉर्क का एक अमीर व्यक्ति जो हार्वर्ड ग्रैजुएट था, एक बड़ी कारपेट फैक्ट्री का मालिक है। उसने बताया कि उसने इस ट्रेनिंग के चौदह हफ्तों में लोगों को प्रभावित करने की कला के बारे में जितना सीखा उतना कॉलेज में चार साल में नहीं सीखा। बकवास ? हास्यास्पद ? काल्पनिक ? आप अपनी इच्छानुसार इस वक्तव्य को हँसी में उड़ाने वाला कोई भी शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं। मैं बिना अपनी तरफ़ से कुछ जोड़े एक बेहद सफल हार्वर्ड ग्रैजुएट का कथन बता रहा हूँ जो उसने न्यूयॉर्क के येल क्लब में मंगलवार, 23 फ़रवरी, 1933 को छह सौ लोगों के सामने कहा था।
"हम जो हो सकते हैं," हार्वर्ड के प्रसिद्ध प्रोफ़ेसर विलियम जेम्स ने कहा था, "हम जो हो सकते हैं, उसकी तुलना में हम सिर्फ़ आधे जागे हुए ही होते हैं। हम अपनी क्षमताओं का बहुत कम हिस्सा ही हासिल कर पाते हैं। हम अपनी शारीरिक और मानसिक योग्यताओं का बहुत थोड़ा हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं। इंसान अपनी संभावनाओं का पूरा दोहन नहीं करते। उनके पास ऐसी बहुत सी क्षमताएँ या शक्तियाँ होती हैं, जिनका उपयोग करने में वे आम तौर पर असफल रहते हैं।"
ऐसी क्षमताएँ या शक्तियाँ जिनका उपयोग करने में आप "आम तौर पर असफल रहते हैं।" इस पुस्तक का एकमात्र लक्ष्य यही है कि आप अपनी सोई हुई क्षमताओं या शक्तियों से परिचित हों और इन शक्तियों को जागृत करें ताकि आपका जीवन सुखमय बन सके।
प्रिंस्टन युनिवर्सिटी के भूतपूर्व प्रेसिडेंट डॉ. जॉन जी. हिब्बन ने कहा था, "शिक्षा जीवन की स्थितियों का सामना करने की योग्यता है।"
अगर पहले तीन अध्याय पढ़ने के बाद आपको यह लगे कि आपने कुछ नहीं सीखा, कि आप जीवन की स्थितियों का सामना करने के बेहतर योग्य नहीं हुए, तो मैं समझेंगा कि आपके प्रकरण में यह पुस्तक पूरी तरह विफल हुई है। क्योंकि जैसा हरबर्ट स्पेंसर ने कहा था, "शिक्षा का महान लक्ष्य ज्ञान नहीं, बल्कि कर्म है।"
और यह पुस्तक कर्म के बारे में है, यह एक एक्शन बुक है।
डेल कारनेगी
Reviewed by Shiv Rana RCM
on
अक्टूबर 24, 2025
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