हर जगह अपना स्वागत कैसे कराएँ - ऑडियो बुक How to make yourself welcome everywhere LOK VYAVHAR BOOK - Audio Book
हर जगह अपना स्वागत कैसे कराएँ - ऑडियो बुक
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ऑडियो बुक
लोक व्यवहार, प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला
हर जगह अपना स्वागत कैसे कराएँ
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हैल्लो दोस्तो, नमस्कार, आदाव,
स्वागत है आपका मेरे चैनल पर
आज आपको लोक व्यवहार पुस्तक के
नए चैपटर
हर जगह अपना स्वागत कैसे कराएँ
के बारे में बताने जा रहे हैं
आईये शुरू करते हैं।
इस चैपटर की ऑडियो बुक
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लोगों का दिल कैसे जीता जाए, यह सीखने के लिए आपको ला यह यह पुस्तक पढ़ने की क्या ज़रूरत है? इसके बजाय आप दुनिया के सबसे अच्छे दोस्त बनाने वाले की तकनीक क्यों नहीं पीवते? वह कौन है ? वह आपको कल सड़क पर आता हआ दिख सकता है। जब आप उससे दस फुट की दूरी पर होंगे तो वह अपनी पुंछ हिलाने लगेगा। अगर आप रुककर उसे पचकारेंगे तो वह कुदकर आपसे लिपट जाएगा और अपने प्यार का इज़हार करेगा। और आप जानते हैं कि उसके प्रेम की इस अभिव्यक्ति के पीछे उसके दिल में कोई स्वार्थ या कपट नहीं है वह आपको कोई चीज़ बेचना नहीं चाहता, या वह आपसे शादी नहीं करना चाहता।
क्या आपने कभी यह सोचा है कि कुत्ता ही ऐसा एकमात्र जानवर है जिसे ज़िंदा रहने के लिए कोई काम नहीं करना पड़ता। मुर्गी को अंडे देने पड़ते हैं, गाय को दूध देना पड़ता है और चिड़ियों को गाना पड़ता है। परंतु कुत्ता आपको सिर्फ़ प्रेम देता है, प्रेम के सिवा कुछ नहीं देता।
जब मैं पाँच साल का था, तो मेरे डैडी मेरे लिए पचास सेंट में एक छोटा सा पीले बालों वाला पिल्ला लाए थे। वह मेरे बचपन के सुख-दुख का साथी था। हर दोपहर साढ़े चार बजे के क़रीब वह आँगन में बैठ जाता था और अपनी सुंदर आँखों से सड़क पर देखता रहता था। जैसे ही वह मेरी आवाज़ सुनता था या मुझे आते हुए देखता था, वह गोली की रफ़्तार से दौड़ता था और खुशी और आनंद के स्वर में मेरा स्वागत करते हुए मुझसे लिपट जाता था।
टिपी पाँच साल तक मेरा सबसे अच्छा दोस्त रहा। फिर एक दुखद रात को और मैं इसे कभी नहीं भूल पाऊँगा वह मुझसे दस क़दम की दूरी पर बिजली गिरने से मर गया। टिपी की मौत मेरे बचपन का सबसे बड़ा हादसा थी।
तुमने कभी मनोविज्ञान की कोई पुस्तक नहीं पढ़ी, टिपी। तुम्हें इसकी कोई ज़रूरत भी नहीं थी। तुम किसी दैवी प्रेरणा से यह जानते थे कि दूसरों में रुचि लेकर आप दो महीने में इतने ज़्यादा दोस्त बना सकते हैं, जितने कि आप दो साल में बना पाएँगे अगर आप यह चाहें कि दूसरे आपमें रुचि लें। मैं इसे एक बार फिर दोहराना चाहूँगा। दूसरों में रुचि लेकर आप दो महीने में इतने ज़्यादा दोस्त बना सकते हैं, जितने कि आप दो साल में बना पाएँगे अगर आप यह चाहें कि दूसरे आपमें रुचि लें।
परंतु हम सभी ऐसे लोगों को जानते हैं जो इसी बात की कोशिश करते हैं कि दूसरे लोग उनमें रुचि लें और इसी वजह से वे एक के बाद एक गलतियाँ करते चले जाते हैं।
ज़ाहिर है कि उन्हें अपने प्रयास में सफलता नहीं मिलती और वे असफल हो जाते हैं। लोगों की आपमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उनकी मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उनकी दिलचस्पी तो खुद में है- सुबह, दोपहर, शाम, चौबीसों घंटे।
न्यूयॉर्क टेलीफोन कंपनी ने यह जानने के लिए एक सर्वे किया कि टेलीफ़ोन पर होने वाली चर्चा में किस शब्द का प्रयोग सबसे ज़्यादा बार किया जाता है। आप ठीक समझे। सर्वे से यह पता चला कि "मैं" शब्द सबसे ज़्यादा बार बोला जाता है। 500 चर्चाओं में "मैं", "मैं", "मैं" 3,900 बार बोला गया।
इसी तरह जब आप कोई ग्रुप फ़ोटो देखते हैं जिसमें आपकी तस्वीर हो, तो आप सबसे पहले किसकी तस्वीर खोजते हैं ?
अगर हम सिर्फ़ लोगों को प्रभावित करने और खुद में उनकी दिलचस्पी जगाने की कोशिश करेंगे तो हमारे पास सच्चे और अच्छे नहीं होंगे। दोस्त, सच्चे दोस्त, इस तरह नहीं बनाए जाते।
विएना के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड एडलर ने व्हॉट लाइफ़ मीन द यू नाम की एक पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में उन्होंने लिखा है, "जिस व्यक्ति की दूसरे लोगों में रुचि नहीं होती उसे बसे ज्यादा नुक़सान पहुंचाता है। इसी तरह के व्यक्ति ही सबसे जीवन में सबसे ज्यादा कठिनाइयाँ आती हैं और वह दूसरों को ज्यादा असफल देखे गए हैं।"
आप मनोविज्ञान पर टनों पोथियाँ पढ़ सकते हैं फिर भी आपको अपने काम का इससे महत्वपूर्ण वक्तव्य नहीं मिलेगा। डलर के इस वक्तव्य में इतना अर्थ भरा हुआ है कि मैं इसे एक बार फिर इटैलिक्स में दोहराना पसंद करूँगा :
जिस व्यक्ति की दूसरे लोगों में रुचि नहीं होती उसे जीवन में सबसे ज़्यादा कठिनाइयाँ आती हैं और वह दूसरों को सबसे ज्यादा नुक़सान पहुँचाता है। इसी तरह के व्यक्ति ही सबसे ज्यादा असफल देखे गए हैं।
मैंने एक बार न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में लघुकथा लेखन का एक कोर्स किया। उस कोर्स में एक प्रसिद्ध पत्रिका के संपादक ने हमारी क्लास से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वे अपनी डेस्क पर पड़ी इजनों कहानियों में से किसी भी कहानी को उठा लेते हैं और कुछ पैरखाफ़ पढ़ने के बाद उन्हें यह मालूम चल जाता है कि लेखक लोगों को पसंद करता है या नहीं। "अगर लेखक लोगों को पसंद नहीं करता," उन्होंने कहा, "तो लोग भी उसकी कहानी को पसंद नहीं करेंगे।"
यह अनुभवी संपादक कहानी लेखन के अपने लेक्चर में दो बार रुका और उसने भाषण देने के लिए क्षमा माँगते हुए कहा : "मैं आपको वही बता रहा हूँ जो आपका पादरी आपको बताएगा, परंतु याद रखें अगर आप सफल कहानीकार बनना चाहते हैं, तो आपको लोगों में रुचि लेनी होगी।"
अगर यह कहानीकार बनने के बारे में सही है, तो आप आश्वस्त हो सकते हैं कि यह लोगों से आमने-सामने बात करने के बारे में भी सही है।
जब हॉवर्ड थर्स्टन ब्रॉडवे में आख़िरी बार अपना शो दे रहे थे तो मैं उस शाम को उनके ड्रेसिंग रूम में था। थर्स्टन माने हुए जादूगर थे। चालीस साल तक उन्होंने दुनिया भर में घूमकर अपना मायावी जाल रचा था, दर्शकों को दाँतों तले उँगलियाँ दबाने पर मजबूर किया था और जनता को आश्चर्यचकित कर दिया था। 6 करोड़ से भी ज़्यादा लोगों ने उनके शो देखने के लिए टिकट खरीदे थे और उन्हें लगभग बीस लाख डॉलर का मुनाफ़ा हुआ था।
मैंने मिस्टर थर्स्टन से उनकी सफलता का रहस्य पूछा। इसका स्कूल की शिक्षा से कोई संबंध नहीं था क्योंकि वे बचपन में ही अपने घर से भाग गए थे। वे मालगाड़ियों में सवार होकर अपनी यात्राएँ करते थे, भूसे के ढेरों पर सोते थे, घर-घर जाकर अपने खाने की भीख माँगते थे और रेल की पटरियों के आस-पास लगे विज्ञापनों को पढ़-पढ़कर उन्होंने पढ़ना सीखा था।
क्या उन्हें जादू का सबसे अधिक ज्ञान था ? नहीं, उन्होंने मुझे बताया कि जादू पर सैकड़ों पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं और बीसियों लोग उनके जितना जादू जानते हैं। परंतु उनके पास ऐसी दो चीजें थीं जो दूसरे लोगों के पास नहीं थीं। पहली, उनमें यह क्षमता थी कि वे स्टेज पर अपने व्यक्तित्व को बेच सकते थे। वे एक मास्टर शोमैन थे। वे मानव स्वभाव जानते थे। वे अपने हर काम, हर मुद्रा, आवाज़ की हर लहर, आँखें उठाने की हर हरकत की पहले से ही रिहर्सल कर लेते थे और उनकी टाइमिंग परफैक्ट थी। परंतु, इनके अलावा, थर्स्टन की लोगों में वास्तविक रुचि थी। उन्होंने मुझे बताया कि कई जादूगर दर्शकों को देखते हैं और खुद से कहते हैं, "मेरे सामने कुछ मूर्ख लोग बैठे हुए हैं जिनमें कोई बुद्धि नहीं है; मैं उन्हें आसानी से मूर्ख बना लूँगा।" परंतु थर्स्टन का तरीक़ा पूरी तरह अलग था। हर बार स्टेज पर जाते समय वे खुद से कहा करते थे। "मैं कृतज्ञ हूँ कि ये लोग मुझे देखने आए। इन्हीं लोगों के कारण सी रोजी-रोटी इतने अच्छे ढंग से चलती है। में पूरी कोशिश करूंगा कि मैं इनके सामने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं।"
उन्होंने बताया कि स्टेज पर जाने से पहले वे हमेशा खुद से बार-बार यही कहते थे. "मैं अपने दर्शकों से प्रेम करता हूँ। मैं अपने शंकों से प्रेम करता है।" मुर्खतापूर्ण ? बकवास ? आप जो चाहे सोच सकते हैं। मैं बिना अपनी तरफ़ से कुछ जोड़े हुए आपको दुनिया के सबसे प्रसिद्ध जादगरों में से एक की सफलता का नुस्खा बता रहा हूँ।
पेनसिल्वेनिया में रहने वाले नॉर्थ वॉरेन के जॉर्ज डाइक का प्रसंग सुनिए । तीस साल तक अपने सर्विस स्टेशन बिजनेस में काम करते रहने के बाद उन्हें मजबूरन रिटायर होना पड़ा क्योंकि उनके टेशन की साइट के ऊपर एक नया हाइवे बन रहा था। रिटायरमेंट के बाद निठल्ले बैठे-बैठे वे जल्दी ही बोर हो गए, इसलिए वे संगीत हे अपने शौक़ में समय देने लगे। उन्होंने कई प्रसिद्ध संगीतज्ञों से चर्चा करना भी शुरू कर दिया। अपने विनम्र और दोस्ताना तरीके। ने वे सामने वाले संगीतज्ञ की पृष्ठभूमि और उसकी रुचियों में रुचि सोते थे। हालाँकि वे खुद कोई बहुत अच्छे संगीतज्ञ नहीं थे, परंतु उन्होंने कई अच्छे संगीतज्ञों को अपना मित्र बना लिया।
उन्होंने प्रतियोगिताओं में भाग लिया और जल्दी ही अमेरिका के पूर्वी भाग के संगीतप्रेमी उन्हें "अंकल जॉर्ज, किन्जुआ काउंटी के संगीतज्ञ" के रूप में जानने लगे। जब अंकल जॉर्ज से हमारी बात हुई तो वे बहत्तर साल के थे और अपने जीवन के हर पल का आनंद ले रहे थे। दूसरे लोगों में लगातार रुचि लेने के कारण उन्होंने अपने लिए एक ऐसे वक़्त में नया जीवन खोज लिया था जब अधिकांश लोग यह सोच लेते हैं कि उनका जीवन ख़त्म हो चुका है।
यही थियोडोर रूजवेल्ट की लोकप्रियता का रहस्य था। उनके नौकर तक उनसे प्रेम करते थे। उनके वैलट जेम्स ई. एमॉस ने उन पर एक पुस्तक लिखी है: थियोडोर रूजवेल्ट, हीरो टु हिज़ वैलेट। इस पुस्तक में एमॉस ने इस घटना का वर्णन किया है :
मेरी पत्नी ने एक बार राष्ट्रपति से पूछा कि बॉब व्हाइट कैसा होता है। मेरी पत्नी ने बॉब व्हाइट कभी नहीं देखा था। रूजवेल्ट ने पूरे विस्तार से बॉब व्हाइट के बारे में बताया। कुछ समय बाद हमारे टेलीफ़ोन की घंटी बजी। (एमॉस और उसकी पत्नी रूज़वेल्ट के घर के पास ही रहते थे।) मेरी पत्नी ने फ़ोन उठाया। फ़ोन रूजवेल्ट का था। उन्होंने उसे बताया कि उनकी खिड़की के बाहर बॉब व्हाइट है और वह खिड़की खोलकर उसे देख सकती थी। इस तरह की छोटी-छोटी बातें रूजवेल्ट की खासियत थी। जब भी वे हमारे घर के पास से गुज़रते थे, तो चाहे हम उन्हें दिखें या न दिखें, हम उनकी आवाज़ सुन सकते थे : "ओह, एनी?" या "ओह, जेम्स!" यह एक दोस्ताना अभिवादन था जो वे पास से गुज़रते समय हमेशा किया करते थे।
इस तरह के मालिक को कौन कर्मचारी पसंद नहीं करेगा ? इस तरह के व्यक्ति को कौन पसंद नहीं करेगा ?
एक दिन प्रेसिडेंट टैफ़्ट और उनकी पत्नी कहीं बाहर गए थे और रूजवेल्ट व्हाइट हाउस आए। छोटे लोगों को सच्चे दिल से पसंद करने का तथ्य इस बात से उजागर हो जाता है कि उन्होंने व्हाइट हाउस के सभी पुराने कर्मचारियों को उनके नाम से बुलाया, यहाँ तक कि बर्तन माँजने वाली नौकरानियों को भी।
"परंतु जब उन्होंने एलिस नाम की कुक को देखा," आर्की बट लिखते हैं, "तो उन्होंने उससे पूछा कि क्या वह अब भी कॉर्न ब्रेड बनाती है। एलिस ने बताया कि वह कभी-कभार नौकरों के लिए बनाती है, परंतु मालिक लोग उसे नहीं खाते।"
"उन्हें अच्छे खाने की समझ नहीं है," रूजवेल्ट ने गरजते हुए कहा, "और मैं जब प्रेसिडेंट से मिलूँगा तो मैं उन्हें यह बात बता दूँगा।"
"एलिस एक प्लेट में रखकर कॉन ब्रेड लाई और रूजवेल्ट ने पूरे ऑफ़िस में घूम-घूमकर उसे खाया और जाते समय मालियों और मजदूरों का भी अभिवादन किया...
"उन्होंने हर व्यक्ति को उसी तरह संबोधित किया जैस तरह पहले किया करते थे। आइक हूवर जो व्हाइट हाउस में चालीस से सालों में यह सबसे सुखद दिन था और हममें से कोई भी सौ साल से प्रमुख प्रवेशक थे आँखों में आँसू भरकर कहते हैं। 'पिछले डॉलर के नोट के बदले में भी इसे बदलने के लिए तैयार नहीं होता।"
महत्वहीन दिखने वाले लोगों में रुचि लेने की यही प्रवृत्ति घटहेम, न्यू जर्सी के सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एडवर्ड एम. साइक्स में भी गी। और इस प्रवृत्ति की वजह से उन्हें एक ग्राहक को बनाए रखने का लाभ भी हुआ । "कई साल पहले, मैं मैसेश्यूटस क्षेत्र में जॉनसन एड जॉनसन कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में ग्राहकों से मिलने जाया करता था। हिंगडैम में एक दवाई की दुकान में हमारा खाता था। जब भी मैं इस स्टोर में जाता था तो उसके मालिक से बात करने और इससे ऑर्डर लेने से पहले मैं सोडा क्लर्क और सेल्स क्लर्क से कुछ बेर तक बातें करने के लिए रुक जाता था। एक दिन में मालिक मिला और उसने मुझसे कहा कि अब वह जॉनसन एंड जॉनसन का सामान नहीं ख़रीदना चाहता क्योंकि वे अपनी गतिविधियों को फुड और डिस्काउंट स्टोर्स पर केंद्रित कर रहे हैं जिससे उसकी दवाई की दुकान को घाटा हो रहा है। मैं बहुत निराश हो गया और मैं घंटों तक कार में बैठकर शहर का चक्कर लगाते हुए इस बारे में सोचता रहा। आख़िरकार मैंने फ़ैसला किया कि मैं वापस जाऊँगा और स्टोर के मालिक से एक बार फिर मिलकर उसके सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करूँगा।
"जब मैं वापस लौटा तो मैंने हमेशा की ही तरह सोडा क्लर्क और सेल्स क्लर्क से हलो किया और इसके बाद मैं मालिक से मिलने गया। वह मेरी तरफ़ देखकर मुस्कराया और उसने मेरा स्वागत करते हुए मुझे सामान्य से दुगुना ऑर्डर दिया। मैंने उसकी तरफ़ हैरत से देखा और यह पूछा कि कुछ घंटे पहले तो वह मुझे बिलकुल भी ऑर्डर नहीं दे रहा था, जबकि अब वह दुगुना ऑर्डर दे रहा था।
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इसका कारण क्या था ? उसने सोडा फाउंटेन वाले कर्मचारी की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, 'तुम्हारे जाने के बाद यह सोडा क्लर्क में से एक हैं जो मालिक के अलावा दूसरे कर्मचारियों से बात करने मेरे पास आया। इसने मुझसे कहा कि आप उन गिने-चुने सेल्समैनो की जहमत उठाते हैं। उसने मुझसे कहा कि आप बहुत ही अच्छे सेल्समैन हैं और अगर किसी सेल्समैन को बिज़नेस दिया जाना चाहिए तो वह सेल्समैन आप हैं। मुझे उसकी बात माननी पड़ी और इस कारण मैं आपको पहले से दुगुना ऑर्डर दे रहा है।' में यह कभी नहीं भूला कि दूसरे लोगों में सचमुच दिलचस्पी लेना सेल्समैन के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है- वैसे देखा जाए तो यह हर एक के लिए बहुत महत्वपूर्ण गुण है।"
मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से जानता हूँ कि अगर हम किसी व्यक्ति में सचमुच दिलचस्पी लेते हैं, तो वह चाहे कितना ही प्रसिद्ध या व्यस्त क्यों न हो, वह हमारी तरफ़ ध्यान देगा, हमें अपना समय और सहयोग देगा। मैं आपको इसका उदाहरण देता हूँ।
बरसों पहले मैंने ब्रुकलिन इंस्टीट्यूट ऑफ़ आर्ट्स एंड साइंसेज में कथा-लेखन का एक कोर्स चलाया था। हमने कैथलीन नॉरिस फ़ैनी हर्स्ट, इडा टारबेल, अल्बर्ट पेसन टरह्यून और रूपर्ट ह्यूज़ जैसे प्रसिद्ध और व्यस्त लेखकों को ब्रुकलिन आकर अपने अनुभव सुनाने का आमंत्रण दिया। हमने अपने पत्र में उन्हें यह बताया कि हम उनके लेखन को कितना पसंद करते हैं, हम उनकी सलाह जानने में सचमुच दिलचस्पी रखते हैं और हम उनकी सफलता के रहस्य जानना और सीखना चाहते हैं।
हर पत्र पर एक सौ पचास विद्यार्थियों के हस्ताक्षर थे। हमने यह भी लिखा कि हम जानते थे कि यह लेखक व्यस्त होंगे इतने व्यस्त कि भाषण तैयार करना उनके लिए आसान नहीं होगा। इसलिए हमने उनके लिए प्रश्नों की एक सूची भी साथ लगा दी जिसके आधार पर वे अपने जीवन और अपने काम की तकनीक पर हमारे सवालों के जवाब दे सकते थे। उन्हें यह अच्छा लगा। यह किसे अच्छा नहीं लगेगा ? तो वे अपने घर को छोड़कर, अपने काम-धाम को वहाँ के नागरिकों को उसी देश की भाषा में संबोधित कर सकें। और दक्षिण अमेरिकी लोगों को यह बहुत पसंद आया।
कई साल से मेरी आदत है कि मैं अपने दोस्तों के जन्मदिन याद रखता हूँ। कैसे ? हालाँकि ज्योतिष में मेरा ज़रा भी विश्वास नहीं है, पर मैं सामने वाले से पूछता हूँ कि क्या उनके अनुसार जन्मतिथि और व्यक्ति के स्वभाव में कोई संबंध होता है। फिर मैं उनसे उनकी जन्मतिथि पूछता हूँ। अगर वे कहते हैं 24 नवंबर तो मैं मन ही मन दुहराता हूँ, "24 नवंबर, 24 नवंबर" और जैसे ही मेरे दोस्त की पीठ मेरी तरफ़ होती है, मैं उसका नाम और जन्मदिन लिख लेता हूँ और बाद में इसे अपनी बर्थडे बुक में नोट कर लेता हूँ। हर साल के शुरू में, मैं इन जन्मतिथियों को अपने कैलेंडर पेड पर लिख लेता हूँ ताकि वे मेरी नज़रों के सामने रहें। जब जन्मदिन आता है तो मैं चिट्ठी या टेलीग्राम भेज देता हूँ। इसका कितना अच्छा प्रभाव पड़ता है? शायद दुनिया में मैं अकेला ऐसा व्यक्ति होता हूँ जिसे उसका जन्मदिन याद रहा।
अगर हम दोस्त बनाना चाहते हैं, अगर हम लोगों का दिल जीतना चाहते हैं तो हमें लोगों से उत्साह से मिलना चाहिए। जब कोई आपसे फ़ोन पर बात करे, तो भी आपको उसी उत्साह का प्रदर्शन करना चाहिए। इस तरह 'हलो' बोलें कि सामने वाले को यह लगे कि आप उससे बातें करके खुश हो रहे हैं। कई कंपनियाँ अपने टेलीफ़ोन ऑपरेटर्स को इस तरह बात करना सिखाती हैं कि उनकी आवाज़ की टोन से रुचि और उत्साह प्रदर्शित हो। सामने वाले को यह महसूस होना चाहिए, यह लगना चाहिए कि कंपनी उनका ख़्याल रख रही है। कल जब हम फ़ोन पर बात करें, तो इस बात को ज़रूर याद रखें।
दूसरों में सचमुच दिलचस्पी लेने से न केवल आप लोगों को अपना दोस्त बना लेते हैं, बल्कि आप अपनी कंपनी के ग्राहकों को स्थायी भी बना सकते हैं। न्यूयॉर्क की नेशनल बैंक ऑफ़ नाँध अमेरिका के एक अंक में यह पत्र प्रकाशित हुआ था। इसे मैडलीन रोज़डेल नाम की एक ग्राहक ने लिखा था "मैं आपको यह बताना चाहेगी कि मैं आपके स्टाफ़ से कितनी प्रभावित है। सभी कर्मचारी विनम्र, मददगार और मधुरभाषी हैं। कितना अच्छा लगता है जब लंबी लाइन में इंतज़ार करने के बाद टेलर मधुर आवाज़ में आपका स्वागत करती है।
"पिछले साल मेरी माँ पाँच महीने तक अस्पताल में एडमिट रहीं। अक्सर मैं पैसे निकलवाने के लिए टेलर काउंटर पर बैठी मैरी पेटसेलो के पास जाती थी। उन्होंने मुझसे हर बार मेरी माँ की तबियत के बारे में पूछा। वे सचमुच उनको लेकर चिंतित थीं।"
क्या अब भी आपको इस बात में कोई संदेह है कि मिसेज़ रोजडेल उस बैंक की ग्राहक बनी रहेंगी?
न्यूयॉर्क की ही एक बड़ी बैंक ने चार्ल्स आर. वॉल्टर्स को किसी कॉरपोरेशन के बारे में गोपनीय रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा। वॉल्टर्स को मालूम था कि केवल एक ही व्यक्ति उसे सारे तथ्य इतने कम समय में दे सकता था। जब वॉल्टर्स उस प्रेसिडेंट से मिलने गए, तो एक महिला ने दरवाज़े के अंदर अपना सिर डाला और प्रेसिडेंट को बताया कि उस दिन की डाक में विदेशी टिकट नहीं आए थे।
प्रेसिडेंट ने वॉल्टर्स को बताया, "मैं अपने बारह वर्ष के पुत्र के लिए डाक टिकट इकट्ठे कर रहा हूँ।"
वॉल्टर्स ने अपनी समस्या बताई और सवाल पूछना शुरू कर दिया। प्रेसिडेंट ने गोलमोल जवाब दिए जो न तो स्पष्ट थे, न ही वॉल्टर्स की समस्या को सुलझाने में सहायक थे। कंपनी का प्रेसिडेंट बात नहीं करना चाहता था और यह साफ़ था कि उससे बातें नहीं उगलवाई जा सकती थीं। कुल मिलाकर, यह इंटरव्यू संक्षिप्त और व्यर्थ साबित हुआ था।
हमारी कक्षा के सामने यह कहानी सुनाते हुए वॉल्टर्स ने बताया, "सच कहा जाए, तो मैं नहीं जानता था कि इस परिस्थिति में क्या किया जाए। फिर मुझे याद आया कि उसकी सेक्रेटरी ने क्या कहा था- डाक टिकट, बारह साल का पुत्र... और मझे यह भी याद आया कि हमारी बैंक का विदेश विभाग डाक टिकट इकटठे करत था हर देश से आने वाले पत्रों के डाक टिकट हमारे संग्रह में थे।
"अगले दिन मैं फिर उसी प्रेसिडेंट से मिलने गया और मैंने यह संदेश भिजवाया कि मैं उसके पुत्र के लिए कुछ डाक टिकट लेकर आया हूँ। मुझे बहुत जल्दी बुलवाया गया और उसने मुझसे इतनी गर्मजोशी से हाथ मिलाया जैसे वह संसद का चुनाव लड़ने से रहा हो। उसकी आँखों में दोस्ताना चमक थी और उसके चेहरे पर मुस्कराहट थी। जब उसने डाक टिकटों को देखा तो वह बहुत खुश हुआ। 'हाँ, यह मेरे जॉर्ज को बहुत पसंद आएगा। और वो वाला डाक टिकट कितना सुंदर है!'
"हम आधा घंटे तक डाक टिकटों के बारे में बात करते रहे और उसने मुझे अपने बच्चे की तस्वीर भी दिखाई। इसके बाद उसने मेरे द्वारा चाही जानकारी अपने आप दे दी, जबकि मैंने इस बारे में कुछ भी नहीं कहा था। एक घंटे से भी ज़्यादा समय तक उसने मुझे वह सब बताया जो उसे मालूम था, उसने अपने स्टाफ़ को बुलवाया और उनसे सवाल पूछे।
उसने कुछ लोगों से फ़ोन पर भी जानकारी ली। उसने मुझे तथ्य, आँकड़े, रिपोर्ट और पत्रव्यवहार सब कुछ दे दिया। अख़बार वालों की भाषा में कहा जाए तो मुझे एक स्कूप मिल गया था। ऐसा लग रहा था जैसे चमत्कार हो गया था।"
एक और उदाहरण देखिए :
फिलाडेल्फिया के सी. एम. नाफ्ले बरसों से एक बड़े चेन स्टोर संगठन को अपना ईंधन बेचने की कोशिश कर रहे थे। परंतु चेन स्टोर संगठन शहर के बाहर के किसी डीलर से ईंधन बुलवाता था और मज़े की बात यह थी कि इस ईंधन को नाफ्ले के ऑफ़िस के दरवाज़े के पास ही स्टोर किया जाता था। नाफ्ले ने हमारी क्लास में एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने चेन स्टोर्स पर अपना गुस्सा निकाला और उन्हें देश के लिए अभिशाप बताया।
और इसके बाद भी उन्हें हैरत हो रही थी कि वे उन्हें माल क्यों नहीं बेच पाए।
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मैंने यह सुझाव दिया कि वे दूसरा तरीका आज़माएँ। संक्षेप जो हुआ वह यह था। हमने अपने कोर्स के सदस्यों के बीच एक वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की। वाद-विवाद का विषय था: पेन स्टोर्स से देश को लाभ कम हैं और नुकसान ज्यादा।
मेरे सुझाव पर नाफ्ले ने विषय के विपक्ष में यानी चेन स्टोर के पक्ष में बोलने का निर्णय लिया। इसके बाद वे उसी चेन स्टोर संगठन के मालिक के पास गए जिससे वे बरी तरह चिढते थे। माले ने उससे कहा, "मैं यहाँ पर आपको ईंधन बेचने नहीं आया बल्कि आपसे मदद माँगने आया हूँ।" फिर उन्होंने वाद-विवाद प्रतियोगिता के बारे में बताया और कहा, "मैं चाहता है कि आप मेरी मदद करें। कोई दूसरा व्यक्ति मुझे इसके लाभों के बारे में उतने आंकड़े और जानकारी नहीं दे सकता, जितनी कि आप दे सकते हैं। मैं यह प्रतियोगिता जीतना चाहता हूँ और मैं आपकी मदद से ही इसे जीत सकता हूँ।"
बाक़ी की कहानी आप नाफ्ले के शब्दों में ही सुनिए।
मैंने इस व्यक्ति से केवल एक मिनट का समय माँगा था। इसी शर्त पर वह मुझसे मिलने के लिए तैयार हुआ था। पर जब उसने मेरी बात सुनी तो उसने मुझसे एक घंटे और सैंतालीस मिनट तक बातें कीं। उसने एक और एक्जीक्यूटिव को बुलवाया जिसने चेन स्टोर्स पर एक पुस्तक लिखी थी। उसने नेशनल चेन स्टोर एसोसिएशन को फ़ोन करके मेरे लिए इस विषय पर हुई वाद-विवाद प्रतियोगिता की रिपोर्ट भी मँगाकर मुझे दी।
उसे विश्वास था कि चेन स्टोर्स सचमुच मानवता की सच्ची सेवा कर रहे थे। उसे इस बात पर गर्व था कि वह समाज के बहुत बड़े हिस्से का भला कर रहा था। बातें करते समय उसकी आँखों में चमक थी और मुझे यह मानना पड़ेगा कि उसने मेरी आँखें खोल दीं। मुझे ऐसी बातें पता चलीं, जो मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था। उसने मेरा सोचने का नज़रिया ही बदल दिया।
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जब में चलने लगा तो वे मुझे दरवाज़े तक छोड़ने आए, उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा, मुझे प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएँ दीं और इसके बाद मुझसे कहा कि मैं इसके परिणाम के बारे में बताने के लिए एक बार फिर उनसे मिलूँ। उन्होंने मुझसे जो आख़िरी शब्द कहे, वह ये थे, "मैं चाहूँगा कि आप मुझसे वसंत में फिर मिलें। मैं आपको ईंधन का ऑर्डर देना चाहूँगा।"
मेरे लिए तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। मैं सालों से उसे ईंधन बेचने की कोशिश कर रहा था, पर वह मेरी बात सुन ही नहीं रहा था। और अब वह मेरे बिना कहे मेरे सामने ईंधन ख़रीदने का प्रस्ताव रख रहा था। मैंने उसमें और उसकी समस्याओं में दो घंटे तक जो वास्तविक रुचि ली थी, उसी की वजह से यह चमत्कार हुआ था। अगर मैं दस साल तक यह कोशिश करता कि वह मुझमें और मेरे सामान में रुचि ले तो भी ऐसा होना संभव नहीं था।
आपने कोई नई बात नहीं खोजी है, मिस्टर नाफ्ले। सदियों पहले, ईसा मसीह के पैदा होने के भी एक सदी पहले प्रसिद्ध रोमन कवि पब्लिलियस सायरस ने कहा था, "जब दूसरे लोग हममें रुचि लेते हैं तब हम उनमें रुचि लेते हैं।"
जैसा मानवीय संबंधों के हर सिद्धांत के बारे में सच है, रुचि का प्रदर्शन सच्चा होना चाहिए। इससे रुचि प्रदर्शित करने वाले का ही भला नहीं होना चाहिए, बल्कि उस व्यक्ति का भी भला होना चाहिए जिसमें रुचि ली जा रही है। यह टू वे स्ट्रीट है- दोनों ही पक्षों को लाभ होता है।
मार्टिन गिन्सबर्ग, जिन्होंने न्यूयॉर्क के लाँग आइलैंड में हमारा कोर्स किया था, बताते हैं कि किस तरह एक नर्स द्वारा ली गई विशेष रुचि ने उनके जीवन को बदलकर रख दिया :
"थैंक्स गिविंग डे था और मैं दस साल का था। मैं शहर के एक अस्पताल में वेलफेयर वॉर्ड में था और अगले दिन मेरा एक बड़ा ऑपरेशन होने वाला था। में जानता था कि मुझे महीनों तक दर्द सहना होगा और ठीक होने से पहले विस्तर पर पड़ा रहना पडेगा। मेरे पिता की मृत्यु हो चुकी थी। मेरी माँ और मैं एक छोटे अपार्टमेंट में रहते थे और हम लोग वेलफेयर पर थे। मेरी माँ उस दिन मुझसे मिलने नहीं आ पाई थीं।
"जब शाम हई, तो मुझे अकेलेपन, निराशा और डर का प्रबल एहसास हुआ। मैं जानता था कि मेरी माँ घर पर अकेली होगी और मेरे बारे में चिंतित होंगी क्योंकि उनके पास कोई नहीं होगा जिसके साथ वे खाना खा सकें और उनके पास इतना पैसा नहीं होगा कि वे थैंक्सगिविंग डे के डिनर का ख़र्च उठा सकें।
"मेरी आँखों में आँसू आ गए और मैंने अपने सिर को तकिए में छुपाकर ऊपर से चादर ओढ़ ली। मैं चुपचाप रोता रहा, परंतु मेरे मन में इतनी कड़वाहट थी कि मेरा शरीर दर्द से कराहने लगा।
"एक युवा स्टुडेंट नर्स ने मेरे रोने की आवाज़ सुनी और वह मेरे पास आई। उसने मेरे चेहरे से चादर हटाई और मेरे आँसू पोंछना शुरू कर दिया। उसने मुझे बताया कि वह कितनी अकेली थी, उसे दिन भर काम करना पड़ता था और वह अपने परिवार के साथ रहने में असमर्थ थी। उसने मुझसे पूछा कि क्या मैं उसके साथ डिनर लेना चाहूँगा। वह दो ट्रे भोजन लाई : स्लाइस्ड टर्की, आलू, क्रेनबरी सॉस और आइस्क्रीम । उसने मुझसे बातें कीं और मेरा डर कम करने की कोशिश की। हालाँकि उसकी ड्यूटी शाम चार बजे ख़त्म हो जाती थी, परंतु अपनी इच्छा से वह रात को 11 बजे तक रुकी। उसने मेरे साथ गेम्स खेले, मुझसे बातें कीं और मेरे साथ तब तक रही जब तक कि मुझे गहरी नींद नहीं आने लगी।
"कई थैंक्सगिविंग डे आए और गए, परंतु हर थैंक्सगिविंग डे पर मुझे वही पुराना दिन याद आता है। मुझे याद आता है कि मैं कितना कुंठित, डरा हुआ, अकेला था और किमी अजनबी ने मुझे वह प्रेम और कोमलता प्रदान की थी जिसकी वजह से मैं सब कुछ सहन करने के क़ाबिल बना।"
अगर आप चाहते हैं कि दूसरे आपको पसंद करें, अगर आप सच्चे दोस्त बनाना चाहते हैं, अगर आप अपनी मदद करने के साथ-साथ दूसरों की मदद भी करना चाहते हैं, तो इस सिद्धांत को याद रखें।
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यह था इस चैप्टर का
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सिद्धांत 1
दूसरे लोगों में सचमुच रुचि लें।
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और दोस्तो ये था आज का चैपटर
और अब मिलेगें नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
धन्यावाद, नमस्कार, जै हिन्द
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