तत्काल प्रभावित करने का आसान तरीक़ा - ऑडियो बुक An easy way to make an immediate impact - Audio Book LOK VYAVHAR BOOK
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लोक व्यवहार, प्रभावशाली व्यक्तित्व की कला
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आज आपको लोक व्यवहार पुस्तक के
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न्यूयॉर्क की एक डिनर पार्टी में कुछ मेहमान आए थे। उनमें एक अमीर महिला भी थी, जिसे अभी-अभी बहुत सा पैसा विरासत में मिला था। वह लोगों पर अच्छी छाप छोड़ना चाहती थी। इसी कारण उसने हीरों, मोतियों और सोने के आभूषणों को ख़रीदने में बहुत ख़र्च किया था। परंतु उसने अपने चेहरे के भावों को सुधारने के लिए कुछ भी नहीं किया था। उसके चेहरे से स्वार्थ और लालच के भाव टपक रहे थे। वह इस सत्य को नहीं समझ पाई थी जो हम सभी जानते हैं आपके चेहरे के भाव आपके कपड़ों से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
चार्ल्स श्वाब ने मुझे बताया था कि उनकी मुस्कराहट का मोल दस लाख डॉलर है। और शायद वे इसकी क़ीमत कम बता रहे थे। क्योंकि चार्ल्स श्वाब का व्यक्तित्व, उनका आकर्षण और लोगों का दिल जीतने की उनकी कला ही उनकी असाधारण सफलता के कारण थे और मनमोहक मुस्कान उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक हिस्सा थी।
हमारे काम शब्दों से ज़्यादा तेज़ स्वर में बोलते हैं। आपकी मुस्कराहट कहती है, "मैं आपको पसंद करता हूँ। आपसे मिलकर मुझे खुशी होती है। आपको देखकर मैं खुश हुआ।"
इसी वजह से हम कुत्तों को इतना प्यार करते हैं। वे आपको देखकर इतने खुश हो जाते हैं कि खुशी से झूमने और उछलने लगते हैं। इसलिए यह स्वाभाविक है कि हम भी उन्हें देखकर खुश होते हैं।
यही बच्चे की मुस्कराहट के बारे में भी सही है।
क्या आपने किसी डॉक्टर के क्लीनिक में इंतज़ार कर रहे उदास चेहरों को देखा है जो अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं? मिसूरी के रेटाउन में पशुचिकित्सक स्टीफ़न के. स्प्रॉल ने बताया कि एक दिन उनके मरीज़ काफ़ी बड़ी संख्या में अपने पालतू जानवरों को लेकर टीका लगवाने आए थे। कोई भी एक दूसरे से बात नहीं कर रहा था। और उनमें से ज़्यादातर लोग सोच रहे थे कि डॉक्टर के क्लीनिक में समय बर्बाद करने के बजाय वे कौन से काम निबटा सकते थे। उन्होंने हमारी क्लास को बताया "छह या सात मरीज़ वेटिंग रूम में बैठे थे।
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तभी नौ महीने के बच्चे और एक बिल्ली के बच्चे को लेकर एक युवा महिला आई। संयोग की बात थी कि वह युवती ऐसे आदमी के बगल में बैठ गई जो देरी के कारण सबसे अधिक विचलित और परेशान था। कुछ समय के बाद बच्चे ने उस आदमी की तरफ देखा और मुस्करा दिया जैसा बच्चे अक्सर किया करते हैं। और उस आदमी ने क्या किया ? वही जो आप या मैं करते, उसे भी प्रत्युत्तर में मुस्कराना पड़ा। जल्द ही वह आदमी उस युवती से उसके बच्चे के बारे में बात करने लगा और अपने नाती-पोतों के बारे में बताने लगा और कुछ ही समय बाद पूरा वेटिंग रूम चर्चा में शामिल हो गया और बोरियत और तनाव का पूरा माहौल सुखद और आनंददायक अनुभव में बदल गया।"
पर ध्यान रहे, झूठी मुस्कराहट से कोई फ़ायदा नहीं होगा। हम समझ जाते हैं कि यह बनावटी है और इसलिए हम उसे पसंद नहीं करते। मैं जिस मुस्कराहट की बात कर रहा हूँ, वह असली मुस्कराहट होती है, दिल को छूने वाली मुस्कराहट, एक ऐसी मुस्कान जो दिल से आती है और दिल तक पहुँचती है और इसीलिए बाज़ार में उसकी क़ीमत बहुत ज़्यादा होती है।
मिशिगन यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर जेम्स वी. मैकॉनल मुस्कराहट के बारे में अपनी भावनाएँ बताते हुए कहते हैं, "मुस्कराने वाले लोग ज्यादा अच्छी तरह सिखा और बेच पाते हैं और अपने बच्चों को ज्यादा सुखद ढंग से पाल पाते हैं। मुस्कान में तेवर से ज्यादा शक्ति होती है। इसलिए कोई बात सिखाने के लिए प्रोत्साहन दंड की तुलना में ज्यादा प्रभावी तरीका होता है।"
न्यूयॉर्क के एक बडे डिपार्टमेंट स्टोर के एम्प्लॉयमेंट मैनेजर ने मुझे बताया कि वह मनमोहक मुस्कराहट वाले किसी कम पढ़े-लिखे सेल्स क्लर्क को नौकरी पर रखना पसंद करेंगे, जबकि उदास और गंभीर चेहरे वाले डॉक्टर ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी को काम पर नहीं रखेंगे।
मुस्कान का प्रभाव बहुत शक्तिशाली होता है- चाहे यह प्रभाव हमें दिखाई दे या न दे। अमेरिका की टेलीफ़ोन कंपनियाँ एक प्रोग्राम "फोन पॉवर" चलाती हैं। इस कार्यक्रम में कर्मचारियों को यह सिखाया जाता है कि अपनी सेवाएँ या सामान बेचने में टेलीफोन का उपयोग किस तरह किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में वे आपको यह सलाह देते हैं कि आप फ़ोन पर बातें करते समय मुस्कराएँ। आपकी "मुस्कराहट" आपकी आवाज़ में सुनाई दे जाती है।
रॉबर्ट क्रायर सिनसिनाटी, ओहियो की एक कंपनी में कंप्यूटर डिपार्टमेंट के मैनेजर थे। उन्होंने हमें यह बताया कि उन्होंने एक मुश्किल से भरे जाने वाले पद के लिए सही उम्मीदवार खोजने में किस तरह सफलता पाई :
"मैं अपने डिपार्टमेंट में एक ऐसे व्यक्ति को रखना चाहता था जो कंप्यूटर साइंस में पीएच.डी. हो। मैंने आख़िरकार आदर्श योग्यताओं वाले एक युवक को ढूँढ़ लिया जो परड्यू युनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन पूरा करने ही वाला था। कई बार फ़ोन पर हुई चर्चाओं के दौरान मुझे मालूम हुआ कि उसे कई और कंपनियों के ऑफ़र भी मिले थे। उनमें से कई कंपनियाँ मेरी कंपनी से बड़ी और ज़्यादा प्रसिद्ध थीं। उसने जब हमारा ऑफ़र मान लिया तो मुझे बेहद खुशी हुई। जब वह हमारे यहाँ काम करने लगा तो मैंने उससे पूछा कि उसने दूसरी कंपनियों के बजाय हमारी कंपनी में काम करने का फैसला क्यों किया। वह एक पल रुका और उसने कहा, 'इसका कारण शायद यह है कि दूसरी कंपनियों के मैनेजर मुझसे फोन पर ठंडे. बिजनेसमैन वाले अंदाज में बात करते थे और मुझे ऐसा लगता था जैसे यह भी एक बिजनेस वार्ता है। आपकी आवाज़ से ऐसा लगा जैसे आपको मुझसे बातें करके खुशी हो रही थी... जैसे आप सचमुच चाहते थे कि मैं आपकी कंपनी में काम करूँ।' आप समझ ही चुके होंगे कि मैं अब भी फ़ोन पर मुस्कराता रहता हूँ।"
अमेरिका की एक बहुत बड़ी रबर कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन ने मुझसे कहा कि उनका यह मानना था कि आम तौर पर जब तक लोगों को किसी काम में मज़ा नहीं आता, तब तक वे उसमें सफल नहीं हो पाते। यह उद्योगपति उस पुरानी कहावत से सहमत नहीं था कि कड़ी मेहनत, और सिर्फ कड़ी मेहनत ही वह जादुई कुंजी है जो आपके सपनों के दरवाज़े का ताला खोल देगी। उसका कहना था, "मैं ऐसे बहुत से सफल लोगों को जानता हूँ जो सिर्फ़ इसलिए सफल हुए थे क्योंकि उन्हें अपने बिज़नेस में मज़ा आ रहा था। बाद में मैंने देखा कि जब इन लोगों को काम में मज़ा आना बंद हो गया तो उनका धंधा भी मंदा हो गया। चूँकि अब उन्हें काम में विलकुल भी मज़ा नहीं आता था, इसलिए अब वे असफल होने लगे।"
मैंने हज़ारों विज़नेसमैनों से यह आग्रह किया है कि वे एक सप्ताह हर दिन प्रति घंटे किसी की तरफ़ देखकर मुस्कराएँ। इसका क्या प्रभाव होता है? आइए देखते हैं। यहाँ हमारे सामने न्यूयॉर्क के स्टॉक ब्रोकर विलियम बी. स्टीनहार्ड का पत्र है। उनका प्रकरण बहुत ही आम है। दरअसल इस तरह के सैकड़ों प्रकरण देखे जा सकते हैं।
"मेरी शादी को अठारह साल हो चुके थे।" मिस्टर स्टीनहाई लिखते हैं, "मैं अपनी पत्नी से ज्यादा बातें नहीं करता था, और उसकी तरफ देखकर मुस्कराने का विचार मेरे दिल में कभी आया ही नहीं। मैं सोकर उठता था और तैयार होकर काम पर निकल पड़ता था। इस दौरान मैं दो दर्जन से अधिक शब्द नहीं बोलता था। शायद में दुनिया का सबसे बोरिंग आदमी था।
"जब आपने मुझे मुस्कराने की सलाह दी और मुझसे इसके परिणामों पर चर्चा करने को कहा तो मैंने सोचा कि एक सप्ताह तक ऐसा करके देखूँगा। अगली ही सुबह मैंने बाल संवारते समय शीशे में अपना उदास सा चेहरा देखा और खुद से कहा, 'बिल, आज तुम अपने चेहरे से यह तेवर हटाने वाले हो। आज तुम मुस्कराने वाले हो। और बेहतर होगा कि तुम यह काम आज से अभी से शुरू कर दो।' जब मैं नाश्ते की मेज पर आया, तो मैंने मुस्कराते हुए अपनी पत्नी से कहा, 'गुड मॉर्निंग माई डियर' और यह कहते समय मैं मुस्कराया।
"आपने मुझे चेतावनी दे दी थी कि वह हैरान हो जाएगी। आपने उसकी प्रतिक्रिया का अनुमान कम लगाया था। वह तो पागल हो गई। ऐसा लग रहा था जैसे उसे गहरा आघात लगा हो। मैंने उसे बताया कि मैं भविष्य में भी लगातार ऐसा ही करता रहूँगा और मैंने ऐसा ही किया।
"मेरे बदले हुए नज़रिए के कारण दो महीनों में ही हमारे घर में खुशी का माहौल बन गया। हमने दो महीने में इतनी खुशियाँ हासिल कर लीं, जितनी कि पहले पूरे वर्ष में भी हासिल नहीं होती थीं।
"ऑफ़िस जाते समय भी मैं अपनी बिल्डिंग के लिफ्ट वाले को मुस्कराकर 'गुड मॉर्निंग' कहता हूँ। मैं मुस्कराकर दरबान का अभिवादन करता हूँ। मैं छुट्टे माँगते समय कैशियर को देखकर मुस्कराता हूँ। जब मैं स्टॉक एक्सचेंज में पहुँचता हूँ तो वहाँ पर उन लोगों की तरफ़ मुस्कराकर देखता हूँ जिन्होंने मुझे पहले कभी मुस्कराते हुए नहीं देखा।
"मैंने जल्द ही यह पाया कि हर कोई मेरी मुस्कराहट के बदले में मेरी तरफ देखकर मुस्करा रहा है। जो मेरे पास शिकायत या समस्या लेकर आते हैं मैं प्रसन्नता से उनका स्वागत करता हूँ। मैं उनकी बातें सुनते समय मुस्कराता हूँ और मैंने पाया कि इस तरह से समाधान निकालना ज़्यादा आसान हो जाता है। मैंने पाया कि मुस्कराहट की वजह से मैं ज़्यादा डॉलर कमा पा रहा हूँ, हर दिन ज़्यादा डॉलर।
"मैं जिस ऑफ़िस में हूँ, वहीं दूसरे ब्रोकर का ऑफ़िस भी है। वहाँ काम करने वाला एक क्लर्क बहुत बढ़िया आदमी है और मैं मुस्कराहट के परिणामों से इतना उत्साहित हो गया कि मैंने उसे हाल ही में संबंधों को सुधारने की अपनी नई फिलॉसफी के बारे में बताया। उसने उस समय यह स्वीकार किया कि कुछ समय पहले तक वह मुझे बहुत खडूस आदमी समझता था, पर अब मेरे बारे में उसकी धारणा बदल गई है। उसने कहा कि जब मैं मुस्कराता हूँ तो सचमुच ज़िंदादिल लगता हूँ।
"मैंने लोगों की बुराई करना भी छोड़ दिया है। मैं आलोचना करने के बजाय प्रशंसा और सराहना करने लगा हूँ। मैंने यह बोलना छोड़ दिया है कि मैं क्या चाहता हूँ। मैं अब सामने वाले व्यक्ति के नज़रिए को समझने की कोशिश करता हूँ। इन चीज़ों से मेरी ज़िंदगी में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। मैं अब पूरी तरह बदल गया हूँ और पहले से ज़्यादा खुश और अमीर हूँ। मेरे पास अब दोस्तों और खुशियों की दौलत है और यही तो वे चीजें हैं जो असली महत्व की हैं।"
आपको मुस्कराना मुश्किल लगता है। तो फिर क्या करें? आप दो काम कर सकते हैं। पहली बात तो यह कि खुद को मुस्कराने पर मजबूर करें। जब आप अकेले हों, तो सीटी बजाएँ या गुनगुनाएँ या गाएँ। इस तरह व्यवहार करें जैसे आप सचमुच खुश हों और कुछ समय बाद आपको खुशी का अनुभव होने लगेगा। मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक विलियम जेम्स ने इसी बात को इस तरह से कहा था :
"हमें लगता है कि हमारे कार्य हमारी भावना का अनुसरण करते हैं, परंतु वास्तव में कार्य और भावना साथ-साथ ही चलते हैं और कार्य पर नियंत्रण करने से हम अपनी भावना को नियंत्रित कर सकते हैं क्योंकि अपने कार्यों पर नियंत्रण करना ज़्यादा आसान है, जबकि अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना अपेक्षाकृत कठिन है।
"तो खुश रहने का इकलौता रास्ता यह है कि चाहे हम खुश न हो, पर हम इस तरह बोलें और व्यवहार करें जैसे हम सचमुच खुश हों...।"
दुनिया में हर व्यक्ति खुशी की तलाश में है और इसे हासिल करना खुशी हमारी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करने का एक ही रास्ता है। अपने विचारों को नियंत्रित करके खुशी करती। यह तो हमारी अंदरूनी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
सुख या दुख का इस बात से कोई संबंध नहीं है कि आपके जान कितना है या आप क्या हैं या आप कहाँ हैं या आप क्या कर रहे हैं। इसका संबंध तो इस बात से है कि आप इस बारे में क्या सोचते हैं। उदाहरण के तौर पर दो लोग एक ही जगह पर एक ही काम करें, और उनके पास एक बराबर पैसा और प्रतिष्ठा हो, तो भी यह हो सकता है कि एक दुखी होगा और एक सुखी। क्यों ? क्योंकि उनका परिस्थितियों को देखने का नज़रिया अलग-अलग है। मैंने उष्णकटिबंधीय प्रदेशों में चिलचिलाती धूप में खेत में काम कर रहे गरीब किसानों को भी उतना ही सुखी देखा है, जितना कि यूयॉर्क, शिकागो या लॉस एंजेलिस के एयरकंडीशंड ऑफ़िसों में शाम करने वालों को।
शेक्सपियर ने कहा था, "कोई भी चीज़ बुरी या अच्छी नहीं होती, हमारा नज़रिया ही उसे अच्छी या बुरी बनाता है।"
लिंकन ने एक बार यह टिप्पणी की थी, "ज़्यादातर लोग उत्तने ही खुश रहते हैं, जितने खुश रहने का वे निर्णय करते हैं।" उन्होंने सच कहा था। मैंने इस बात का जीता-जागता उदाहरण तब देखा जब मैं न्यूयॉर्क में लाँग आइलैंड रेलरोड स्टेशन की सीढ़ियाँ चढ़ रहा या। मेरे ठीक सामने तीस या चालीस लंगड़े बच्चे छड़ी और वैसाखियों को थामे हुए सीढियाँ चढ़ रहे थे। एक बच्चे को तो ऊपर उठाकर ले जाना पड़ा। में यह देखकर हैरान हुआ कि वे हँस रहे थे और मस्ती के मूड में थे। मैंने इस बारे में उनके इंचार्ज से बात की। उसने कहा, "हाँ, जब किसी बच्चे को यह पता चलता है कि वह सारी जिंदगी लंगडा रहेगा तो पहले तो उसे सदमा पहुंचता है। पर आम तौर पर बाद में वह अपनी तकदीर को स्वीकार कर लेता है और सामान्य लड़कों की तरह खुश रहने लगता है।"
मेरी इच्छा हुई कि मैं इन बच्चों को सलाम करूँ। उन्होंने मुझे एक ऐसा सबक़ सिखाया था, जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा।
ऑफ़िस में बंद कमरे में अकेले काम करना न सिर्फ़ बोरियत भरा होता है, बल्कि इसमें कंपनी के दूसरे कर्मचारियों से दोस्ती करने का मौक़ा भी नहीं मिलता। मेक्सिको की सीनोरा मारिया गॉन्ज़ालेज़ भी ऐसी ही नौकरी करती थी। वह दूसरे कर्मचारियों के हँसी-मज़ाक़ और दोस्ताना माहौल से ईर्ष्या करती थी। जब वह नौकरी के शुरुआती हफ़्तों में उनके पास से गुज़रती थी, तो संकोचवश दूसरी तरफ़ मुँह फेर लेती थी।
कुछ हफ्तों बाद, उसने खुद से कहा, "मारिया, तुम यह उम्मीद क्यों कर रही हो कि यह औरतें तुम्हारे पास आकर तुम्हारी तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाएँ। ऐसा कभी नहीं होगा। तुम्हें खुद पहल करनी होगी और उनसे मिलना होगा।" अगली बार जब वह वॉटर कूलर तक गई तो उसने मनमोहक मुस्कराहट के साथ पूछा, "हलो, आप कैसी हैं?" इसका असर तत्काल हुआ। जवाब में सामने वाले भी मुस्कराए और हाय-हलो के बाद एक दोस्ताना माहौल बन गया। कई लोगों से हुआ उसका परिचय गहरी दोस्ती में बदल गया। अब उसकी नौकरी और ज़िंदगी उसे पहले से बहुत आनंददायक और रोचक लगने लगी थी।
निबंधकार और प्रकाशक अल्बर्ट हबार्ड की इस बुद्धिमत्तापूर्ण सलाह को गौर से पढ़ें- परंतु याद रखें इसे पढ़ने से आपको तब तक कोई फ़ायदा नहीं होगा जब तक कि आप इस पर अमल नहीं करेंगे
जब भी आप बाहर जाएँ, अपनी ठुड्डी अंदर की तरफ खींचें अपने सिर के ऊपरी हिस्से को थोडा ऊपर की तरह तान लें और अपने फेफड़ों में अधिकतम हवा खींच लें सूरज की रोशनी पिएँ: दोस्तों का मुस्कराहट से स्वागत करें और
हर वार दिल से हाथ मिलाएँ। इस बात से न डरें कि आपको गलत समझा जाएगा। अपने दुश्मनों के बारे में सोचकर अपना एक मिनट भी बर्बाद न करें। अपने मस्तिष्क में यह बात अच्छी तरह बिठाने का प्रयास करें कि आप क्या करना चाहते हैं। और फिर दिशा से इधर-उधर भटके बिना सीधे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ जाएँ। अपने मस्तिष्क को उन अच्छे और महान कामों पर केंद्रित करें जो आप करना चाहते हैं और फिर जैसे-जैसे दिन गुज़रते जाएँगे, आप पाएँगे कि आप अपनी आशा की पूर्ति के लिए अवचेतन के माध्यम से आवश्यक अवसर बना रहे हैं, जिस तरह कि मूँगे का कीड़ा लहरों से अपनी आवश्यकतानुसार तत्व लेता है। अपने मस्तिष्क में उस योग्य, गंभीर उपयोगी व्यक्ति की तस्वीर बनाइए जो आप बनना चाहते हैं और आपका यह विचार आपको हर घंटे उस विशिष्ट तस्वीर के क़रीब ले जाएगा... विचार सर्वशक्तिमान है।
सही मानसिक नज़रिया रखिए-साहस, ईमानदारी और खुशी का नज़रिया। सही सोचना रचनात्मक होना है। इच्छा से समस्त वस्तुएँ हासिल हो जाती हैं और सच्चे दिल से की गई हर प्रार्थना पूरी होती है। जैसा हम दिल में सोचते रहते हैं, हम उसी तरह के बन जाते हैं। अपनी ठुड्डी अंदर की तरफ़ खींचें, अपने सिर के ऊपरी हिस्से को थोड़ा ऊपर की तरफ़ तान लें। हम ईश्वर की अविकसित अवस्था हैं।
चीन के दार्शनिक बहुत समझदार थे। वे जानते थे कि दुनिया किस तरह चलती है। उन्होंने एक कहावत लिखी है जिसे हम सभी को काटकर किसी ऐसी जगह पर चिपका लेना चाहिए जहाँ उसे प्रतिदिन पढ़ा जा सके, "जिस व्यक्ति के पास मुस्कराता हुआ चेहरा न हो, उसे दुकान नहीं खोलनी चाहिए।"
आपकी मुस्कराहट आपकी सद्भावना का संदेशवाहक है। आपकी मुस्कराहट उन सभी लोगों की जिंदगियों को रोशन करती है जो इसे देखते हैं। उस व्यक्ति के लिए जिसने दर्जनों लोगों को नाक-भौं सिकोडते, झुंझलाते हुए देखा हो, आपकी मुस्कराहट बादलो के बीच से झाँकते सूर्य की तरह होती है। खास तौर पर तब जब कोई अपने बॉस, ग्राहकों, टीचर या माता-पिता या बच्चों के कारण दबाव या तनाव में हो ऐसे समय में आपकी मुस्कराहट उसे बता सकती है कि निराशा से समस्याएँ हल नहीं होतीं। मुस्कराहट बताती है कि दुनिया अब भी खुशगवार और रंगीन है।
कुछ साल पहले, न्यूयॉर्क शहर के डिपार्टमेंट स्टोर में क्रिसमस की भीड़ के कारण सेल्स क्लर्क दबाव में थे। इस डिपार्टमेंट ने अपने विज्ञापन के पाठकों को यह घरेलू फिलॉसफ़ी बताई :
क्रिसमस पर मुस्कराहट का मूल्य
इसमें कुछ ख़र्च नहीं होता, पर इससे मिलता बहुत है।
जिन्हें यह मिलती है वे समृद्ध हो जाते हैं, परंतु जो देते हैं वे गरीब नहीं होते।
यह एक पल में हो जाती है और इसकी याददाश्त कई बार हमेशा क़ायम रहती है।
कोई भी इतना अमीर नहीं, कि इसके बिना जी सके और कोई भी इतना गरीब नहीं कि इसका लाभ न उठा सके।
यह घर में सुख लाती है, बिज़नेस में सद्भावना भरती है और यह दोस्ती का हस्ताक्षर है।
यह थके हुओं के लिए आराम है, निराश लोगों के लिए आशा की किरण है, दुखी लोगों के लिए सूर्य की रो
परंतु इसे खरीदा या चुराया नहीं जा सकता, उधार नहीं लिया जा सकता, यह भीख में नहीं मिलती क्योंकि इसका तब तक कोई मोल नहीं है जब तक इसे किसी दूसरे को नहीं दिया जाता और क्रिसमस की भीड़ में हमारे कुछ सेल्समैन अगर इतने धके हुए हों कि आपको मुस्कराहट न दे पाएँ, तो क्या आप अपनी मुस्कान उन्हें देने का कष्ट करेंगे ?
क्योंकि मुस्कराहट की उसी व्यक्ति को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है जिसके पास देने के लिए मुस्कानें नहीं बची हैं!
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यह था इस चैप्टर का
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सिद्धांत 2
मुस्कराएँ
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और दोस्तो ये था आज का चैपटर
और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
धन्यावाद, नमस्कार, जै हिन्द
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Reviewed by Shiv Rana RCM
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दिसंबर 14, 2025
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