पृथ्वी पर सबसे बड़ा प्रदर्शन - ऑडियो बुक धन संपत्ति का मनोविज्ञान- ऑडियो बुक From - THE PSYCHOLOGY OF MONEY - Audio Book मॉर्गन हाउज़ल की पुस्तक- धन संपत्ति का मनोविज्ञान - THE PSYCHOLOGY OF MONEY
पृथ्वी पर सबसे बड़ा प्रदर्शन - ऑडियो बुक
धन संपत्ति का मनोविज्ञान- ऑडियो बुक
From - THE PSYCHOLOGY OF MONEY - Audio Book
मॉर्गन हाउज़ल की पुस्तक- धन संपत्ति का मनोविज्ञान -
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हैल्लो दोस्तो, नमस्कार, आदाव,
स्वागत है आपका मेरे चैनल शिवा वॉयस लाइब्रेरी में
आज आपको मॉर्गन हाउज़ल की पुस्तक
धन संपत्ति का मनोविज्ञान - THE PSYCHOLOGY OF MONEY के
चैपटर जिसका नाम है
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पृथ्वी पर सबसे बड़ा प्रदर्शन - की ऑडियो बुक
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के बारे में बताने जा रहे हैं
आईये शुरू करते हैं।
इस चैपटर की ऑडियो बुक
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प्रस्तावना- पृथ्वी पर सबसे बड़ा प्रदर्शन
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मैंने अपने कॉलेज के वर्ष लॉस एन्जेलस के एक बढ़िया होटल में सेवक के रूप में बिताये।
वहाँ एक तकनीकी कार्यकारी अतिथि के रूप में अक्सर आया करता था। वह काफ़ी प्रतिभावान था, उसने लगभग 20 वर्ष से कुछ ही अधिक की आयु में वाई-फ़ाई का एक मुख्य घटक डिज़ाइन कर पेटेंट किया था। वह कई कंपनियां शुरु करके बेच चुका था और बेतहाशा कामयाब था। धन संपत्ति के साथ उसका जो संबंध था, उसे मैं असुरक्षा और बचकानी मूर्खता का मेल कहूँगा।
वह सौ डॉलर के नोटों की कई इंच मोटी गड्डी साथ लेकर घूमता था, जिसे वह हर किसी को दिखाता था, फिर चाहे वे देखना चाहते हों या नहीं। वह बिना किसी संदर्भके अपनी धन सम्पदा की खुलकर डींग मारता, ख़ासकर जब वह नशे में धुत होता।
एक दिन उसने मेरे एक सहकर्मी को कई हज़ार डॉलर की रकम दी और कहा, "गली में जो ज़वाहरात की दुकान है, वहाँ जाओ और $1000 के कुछ सोने के सिक्के लेकर आओ।"
एक घंटे बाद, हाथ में सोने के सिक्के लिये, वह कार्यकारी और उसके दोस्त एक डॉक के चारों तरफ़ इकट्ठा हो गये जो प्रशांत महासागर के सामने था। फिर उन्होंने उन सिक्कों को पानी में फेंकना शुरू कर दिया। वे उन सिक्कों को कंकरों की तरह उछालते, और फिर किसका सिक्का सबसे दूर गया, इस बात पर बहस करते और ठहाके मार कर हँसते। सिर्फ़ मनोरंजन के लिये।
कुछ दिनों बाद उसने होटल के रेस्त्रां में एक लैंप तोड़ दिया। एक मैनेजर ने उससे कहा कि वह $500 का लैंप था और उसे उसकी भरपाई करनी होगी।
"तुम्हें $500 चाहिये?" कार्यकारी ने अविश्वासपूर्वक पूछा। और जेब से नोटों की एक गड्डी निकाल कर मैनेजर को देते हुए कहा, "ये रहे पाँच हजार डॉलर। अब मेरे सामने से दफ़ा हो जाओ। और फिर कभी भी दोबारा इस तरह मेरी बेइज़्ज़ती मत करना।"
आप सोच रहे होंगे कि आख़िर इस तरह का व्यवहार कब तक चल सकता था, और इसका जवाब है "ज़्यादा दिन नहीं"। कई वर्षों बाद मुझे पता चला कि वह दिवालिया हो गया।
इस किताब का आधार यह है कि धन-संपत्ति के मामले में आप कितना अच्छा प्रबंधन करते हैं, यह इस पर कम निर्भर करता है कि आप कितने होशियार हैं और इस पर ज़्यादा कि आपका व्यवहार कैसा है। और व्यवहार सिखाना कठिन कार्य है, उन्हें भी जो वास्तव में होशियार हैं।
एक प्रतिभाशाली व्यक्ति, जो अपनी भावनाओं का नियंत्रण खो दे, एक वित्तीय आपदा हो सकता है। इसका विपरीत भी उतना ही सत्य है। सामन्य व्यक्ति जिन्हें वित्तीय ज्ञान नहीं है, धनी हो सकते हैं अगर उनके पास कुछ ऐसे व्यावहारिक कौशल हों जिनके लिये बुद्धिमत्ता की औपचारिक युक्तियों की आवश्यकता नहीं होती।
मेरी पसंदीदा विकिपीडिया प्रविष्टि आरंभ होती है: "रोनाल्ड जेम्स रीड एक अमरीकी जनहितैषी, निवेशक, जैनिटर, और गैस स्टेशन परिचर थे।
रोनाल्ड रीड का जन्म ग्रामीण वरमोंट में हुआ। वे अपने परिवार से हाई स्कूल पास करने वाले पहले सदस्य थे। यह इसलिये भी और अधिक प्रभावशाली है कि वे प्रतिदिन रास्ते में अन्य लोगों से लिफ़्ट लेकर कैंपस जाया करते थे।
जो रोनाल्ड रीड को जानते थे, उनके जीवन के बारे में बताने योग्य ज़्यादा कुछ नहीं था। उनका जीवन इतना सामान्य था जितना किसी का हो सकता है।
रीड ने 25 वर्षों तक एक गैस स्टेशन में कारों की मरम्मत की और 17 वर्षों तक
जे सी पेने में फर्श पर झाडू लगायी। 38 वर्ष की आयु में उन्होंने 12,000 डॉलर में एक दो बेडरूम वाला घर खरीदा और अपना पूरा जीवन वहीं बिताया। 50 वर्ष की आयु में वे विधुर हो गये और उन्होंने फिर दोबारा विवाह नहीं किया। उनके एक मिल का कहना है कि उनका ख़ास शौक ईंधन की लकड़ी काटना था।
वर्ष 2014 में 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। और तब जाकर इस विनीत, ग्रामीण जैनिटर ने सुर्ख़ियाँ रचीं।
2014 में 2,813,503 अमरीकी नागरिकों की मृत्यु हुई। इनमें से 4,000 से भी कम लोगों की शुद्ध सम्पति उनकी मृत्यु के समय 8 मिलियन डॉलर थी। रोनाल्ड रीड उनमें से एक थे।
अपनी वसीयत में इस पूर्व जैनिटर ने अपने सौतेले बच्चों के लिये 2 मिलियन डॉलर और स्थानीय अस्पताल एवं पुस्तकालय के लिये 6 मिलियन डॉलर छोड़े थे।
जो रीड को जानते थे वे चकराये हुए थे। उनके पास इतना सारा पैसा आख़िर कहाँ से आया?
बाद में पता चला कि इसमें कोई भी रहस्य नहीं था। न तो उन्होंने कोई लॉटरी जीती थी और न ही उन्हें यह पैसा विरासत में मिला था। रीड ने जितना संभव था उतनी बचत की और वह पैसा ब्लू चिप स्टॉक्स में लगा दिया। फिर उन्होंने दशकों तक प्रतीक्षा की जब तक वह छोटा सी निवेश राशि बढ़कर 8 मिलियन डॉलर में बदल गयी।
बस इतना ही। और एक जैनिटर से जनहितैषी ।
रोनाल्ड रीड की मृत्यु से कुछ माह पहले, रिचार्ड नाम का एक और व्यक्ति ख़बरों में था।
रिचार्ड फुसकोन वह सब कुछ था जो रोनाल्ड रीड नहीं था। हार्वर्ड से पढ़े इस मेरिल लिंच कार्यकारी के पास एम बी ए की डिग्री थी, और उसने वित्त व्यवसाय मे इतनी सफलता प्राप्त की कि लगभग चालीस की उम्र में ही सेवानिवृत्त होकर एक जनहितैषी बन गया। पूर्व मेरिल सी ई ओ डेविड कोमांस्की ने फुसकोन की "व्यवसाय-कुशाग्रता, नेतृत्व क्षमता, उचित मूल्यांकन और व्यक्तिगत अखंड़ता"। की काफ़ी प्रशंसा की। क्रेन्स बिज़नेस मैगज़ीन ने एक बार उसे सफ़ल कारोबारियों की "फ़ॉर्टी अंडर फ़ॉर्टी" सूचि में शामिल किया।
लेकिन फिर-ठीक सोने के सिक्के उछालने वाले तकनीकी कार्यकारी की तरह-सब बिखर के रह गया।
2000 के पहले दशक के बीच फुसकोन ने ग्रीनविच, कनेक्टिकट में एक 18,000 वर्ग फुट के घर का विस्तार करने के लिये जमकर ऋण लिया। इस घर में 11 गुसलखाने, दो एलिवेटर, दो स्विमिंग पूल और 7 गैराज थे, और इस घर के रखरखाव का मासिक खर्च $90,000 से भी अधिक था।
फिर वर्ष 2008 का वित्तीय संकट आ पड़ा।
इस संकट ने वस्तुतः सभी की आर्थिक स्थिति को चोट पहुँचायी। इसने फुसकोन को प्रत्यक्ष रूप से मिट्टी में मिला कर रख दिया। अत्यधिक ऋण और अनकदी परिसंपत्ति ने उसे दिवालिया बना छोड़ा। "फ़िलहाल मेरी कोई आमदनी नहीं है", उसने 2008 में कथित तौर पर एक दिवालियापन न्यायाधीश को बताया।
पहले उसका पाम बीच वाला घर कब्ज़ा लिया गया।
2014 में ग्रीनविच मैंशन की बारी थी।
अपनी सम्पत्ति दान में देने से पाँच महीने पहले, रिचार्ड फुसकोन का घर-जहाँ अतिथि "घर के अंदर के स्विमिंग पूल के ऊपर आरपार नज़ारे वाले आवरण पर खाने और नृत्य के रोमांच का स्मरण करते थे" उसे इंश्योरेंस कंपनी द्वारा अनुमानित लागत से 75% कम की राशि में नीलाम कर दिया गया।
रोनाल्ड रीड धैर्यवान थे, और रिचार्ड फुसकोन लालची। और बस इतना काफी था दोनों के बीच के शिक्षा और अनुभव के विशाल अंतर को ग्रस्त करने के लिये।
यहाँ सीख रोनाल्ड की तरह ज़्यादा या रिचार्ड की तरह कम बनने की नहीं है-हालांकि यह भी कोई बुरी सलाह नहीं है।
इन कहानियों की दिलचस्प बात यह है कि वित्त के संबंध में ये कितनी अनोखी हैं।
ऐसा कौन सा दूसरा उद्योग है जिसमें एक ऐसा व्यक्ति जो किसी कॉलेज डिग्री, प्रशिक्षण, पृष्ठभूमि, औपचारिक अनुभव और संपर्कों के बिना किसी ऐसे को पछाड़ दे जिसके पास सर्वश्रेष्ठ शिक्षा, प्रशिक्षण और संपर्क हों?
मैं ऐसा कोई और उद्योग नहीं सोच सकता।
एक ऐसी कहानी की कल्पना करना जहाँ रोनाल्ड रीड किसी हार्वर्ड-प्रशिक्षित सर्जन से बेहतर हृदय प्रत्यारोपण कर सके, यह बिल्कुल असंभव है। या फिर श्रेष्ठ प्रशिक्षित वास्तुकारों से बेहतर गगनचुंबी इमारतें बना सके। ऐसी भी कभी कोई कहानी नहीं होगी जहाँ एक जैनिटर किसी विश्व के जाने माने परमाणु इंजीनियरों को मात दे सके।
लेकिन निवेश के क्षेल में ऐसी कहानियाँ होती हैं।
रोनाल्ड रीड के रिचार्ड फुसकोन का सहवर्ती होने के दो स्प्ष्टीकरण हैं। पहला,
वित्तीय परिणाम भाग्य द्वारा संचालित होते हैं, और इसका बुद्धिमत्ता एवं प्रयास से कोई संबंध नहीं होता। यह कुछ हद तक सच है, और यह किताब इस पर विवरण में चर्चा करेगी। या, दूसरा (और जो मेरे अनुसार अधिक सामान्य है), कि वित्तीय सफ़लता कोई कठिन विज्ञान नहीं है। यह एक व्यावहारिक कौशल है, जहाँ आप किस प्रकार व्यवहार करते हैं, यह अधिक महत्वपूर्ण है बजाय इसके कि आप क्या जानते हैं।
मैं इस व्यावहारिक कौशल को धन-संपत्ति का मनोविज्ञान कहता हूँ। इस किताब का उद्देश्य लघु कहानियों के द्वारा आपको यह विश्वास दिलाना है कि व्यावहारिक कौशल संपत्ति के तकनीकी पहलू से अधिक महत्वपूर्ण है। मैं ऐसा इस प्रकार करूँगा कि सभी रीड से लेकर फुसकोन और बीच में बाकी सब-बेहतर वित्तीय निर्णय लेना सीख सकें।
और जैसा कि मैंने जाना है यह व्यावहारिक कौशल काफी अगोचर हैं। वित्त को मुख्य तौर पर गणित-आधारित क्षेन के रूप में पढ़ाया जाता है, जहाँ आप किसी फ़ार्मूले में डेटा ड़ालते हैं और फ़ार्मूला आपको बताता है कि आपको क्या करना है, और यह मान लिया जाता है कि बस आप यह कर लेंगे।
व्यक्तिगत वित्त में यह सच है, जहाँ आपको बताया जाता है कि आपके पास छह माह की आपातकालीन राशि और आय का 10% बचत के रूप में होना चाहिये।
निवेश में यह सच है जहाँ हमें ब्याज दर और मूल्यांकन के बीच पहले का सह-संबंध यथार्थरूप से पता होता है।
और यह कॉर्पोरेट वित्त में भी लागू होता है जहाँ सी एफ़ ओ पूंजी का सटीक मूल्य माप सकते हैं।
ऐसा नहीं है कि इनमें से कोई भी बात बुरी या गलत है। बात यह है कि यह जानने से कि क्या करना है आपको यह पता नहीं चलता कि जब आप ऐसा करने की कोशिश करेंगे तो आपके दिमाग में क्या कुछ होगा।
दो विषय ऐसे हैं जो सभी को प्रभावित करते हैं, फिर चाहे आप उनमें दिल्चस्पी रखते हों या नहीं- स्वास्थ्य और धन।
स्वास्थ्य सेवा उद्योग आधुनिक विज्ञान की एक विजय है जिससे विश्व भर में आयु-संभाव्यता बढ़ रही है। वैज्ञानिक आविष्कारों ने मानव शरीर के क्रिया संबंधी डॉक्टरों के पुराने विचारों को पलट कर रख दिया है और इसके कारण वस्तुतः सभी अधिक स्वस्थ हैं।
धन उद्योग- निवेश, व्यक्तिगत वित्त, व्यवसाय आयोजन यह अलग ही कहानी है।
वित्त ने पिछले दो दशकों में विश्वविद्यालयों से सबसे होशियार दिमाग वालों को बटोरा है। एक दशक पहले प्रिंसटन स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग में फ़ाइनैश्यल इंजीनियरिंग सबसे लोकप्रिय मुख्य विषय था। क्या यह इस बात का प्रमाण है कि इससे हम बेहतर निवेशक बने हैं?
मुझे तो ऐसा नहीं लगता।
वर्षों की सामूहिक प्रयत्न त्रुटि विधि से हमने बेहतर किसान, कुशल प्लम्बर, और विकसित रसायनज्ञ बनना सीखा है। लेकिन क्या प्रयत्न लुटि विधि ने हमें अपने व्यक्तिगत वित्त में बेहतर होना सिखाया है? क्या ऋण में डूबने की हमारी संभावना कम हुई है? या फिर क्या हम बुरे दिनों के लिये बचत करने के लिये अधिक योग्य है?
या सेवानिवृत्त होने को अधिक तैयार है? या फिर धन-दौलत हमारे सुख के लिये क्या करती है और क्या नहीं, क्या इस बारे में हमारे विचार यथार्थवादी है?
मैंने तो इन बातों का कोई दमदार प्रमाण नहीं देखा।
मेरे अनुसार ऐसा होने का कारण यह है कि हम धन-दौलत के बारे में जो सोचते हैं और सीखते हैं वह बिल्कुल उसी प्रकार है जैसे हम भौतिक विज्ञान सीखते हैं (नियमों और विधियों के साथ) और न कि मनोविज्ञान की तरह (भावनाओं और बारीकी से)।
और यह मेरे लिये उतना ही दिलचस्प है जितना आवश्यक ।
पैसा हर जगह है, यह हम सबको प्रभावित करता है और हममें से अधिकांश को 'भ्रमित भी। हर कोई पैसे के बारे में कुछ लग ही ढंग से सोचता है। यह हमें ऐसे सबक़ सिखाता है जो हमारे जीवन के कई पहलुओं में लागू होते हैं जैसे जोखिम उठाना, आत्म-विश्वास और सुख। कुछ विषय ऐसे हैं जो यह जानने और समझने के लिये अधिक शक्तिशाली आवर्धक लैस प्रदान करते हैं कि लोग जिस प्रकार पैसे के प्रति आचरण करते हैं, वे आख़िर ऐसा क्यूं करते हैं। यह पृथ्वी पर सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक है।
धन-दौलत के मनोविज्ञान के प्रति मेरा स्वयं का अभिमूल्यन इस विषय पर एक दशक से भी अधिक लेखन के द्वारा विकसित हुआ है। मैंने वित्त संबंधी लेखन 2008 के शुरुआती दिनों में आरंभ किया। यह एक वित्तीय संकट का भोर काल था और 80 वर्षों की सबसे बुरी मंदी।
यह लिखने के लिये कि क्या हो रहा है, मेरे लिये यह समझना आवश्यक था कि आख़िर क्या हो रहा था। लेकिन इस वित्तीय संकट के बाद सबसे पहली चीज़ जो मैंने सीखी वह यह थी कि कोई भी यथार्थ रूप से नहीं बता सकता था कि क्या हुआ और क्यूँ, और इसे लेकर क्या सकते थे वह तो दूर की बात थी। हर अच्छे स्पष्टीकरण के लिये उतना ही विश्वसनीय खंड़न भी था।
इंजीनियर किसी पुल के ढ़हने का कारण बता सकते हैं क्योंकि इस बात पर सहमति है कि अगर किसी हिस्से में एक निश्चित मात्ना में बल ड़ाला जाये तो वह हिस्सा टूट जायेगा। भौतिक विज्ञान विवादास्पद नहीं होता। वह नियमों से चलता है। वित्त अलग है। यह लोगों के आचरण से चलता है। और मैं कैसा व्यवहार करता हूँ यह मेरे लिये सही हो सकता है, पर फिर भी आपको मूर्खतापूर्ण लग सकता है।
वित्तीय संकट के बारे में जितना मैंने पढ़ा और लिखा, उतना ही मुझे एहसास हुआ कि आप इसे वित्त के बजाय मनोविज्ञान और इतिहास के लेंस के द्वारा बेहतर समझ सकते हैं।
यह समझने के लिये कि लोग ऋण में क्यूँ डूब जाते हैं, आपको ब्याज दर का अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं है; आवश्यकता यह है कि आप लालच, असुरक्षा और आशावाद के इतिहास का अध्ययन करें। यह जानने के लिये कि निवेशक बियर मार्केट के तल पर क्यूं बेच देते हैं, आपको भविष्य के अपेक्षित रिटर्न का गणित समझने की आवश्यकता नहीं, आवश्यकता यह है कि आप उस व्यथा के बारे में सोचें जो आपको अपने परिवार की ओर देखकर होगी यदि आपके निवेश उनके भविष्य को ख़तरे में डाल रहे हों।
मुझे वोल्टेयर का यह अवलोकन बहुत पसंद है कि "इतिहास कभी खुद को नहीं दोहराता; मनुष्य हमेशा दोहराता है।" पैसे को लेकर हमारा आचरण कैसा है, इस बात पर यह बहुत अच्छे से लागू होता है।
2018 में मैंने उन 20 सबसे महत्वपूर्ण खामियों, पूर्वाग्रह और बुरे व्यवहार के कारणों को रेखांकित करते हुए एक रिपोर्ट लिखी, जिन्हें मैंने धन संबंधी लेन-देन में लोगों को प्रभावित करते देखा है। इसका शीर्षक "धन-संपत्ति का मनोविज्ञान" था और लगभग दस लाख से भी अधिक लोगों ने इसे पढ़ा। इस किताब ने इस विषय का और गहराई से अवलोकन किया है। रिपोर्ट में से कुछ लघु पैसेज बिना बदलाव के लिये गये हैं।
आपके हाथ में फ़िलहाल ये 20 अध्याय हैं, जिनमें से हर एक मेरे अनुसार धन-संपत्ति के मनोविज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण और प्रति-अंतः प्रज्ञात्मक विशेषताओं का वर्णन करता है। सभी अध्याय एक मूल-विषय के इर्द गिर्द घूमते हैं, लेकिन साथ ही अपना एक अस्तित्व भी रखते हैं और स्वतंत्र रूप से भी पढ़े जा सकते हैं।
यह एक लम्बी किताब नहीं है। आपका स्वागत है। अधिकतर पाठक उन पुस्तकों को समाप्त नहीं कर पाते जिन्हें वे पढ़ना आरंभ करते हैं क्योंकि अधिकांश इकलौते विषयों को 300 पृष्ठों के विवरण की आवश्यकता नहीं होती। इसके बदले मैं 20 लघु बिंदु लिखना पसंद करूंगा जिन्हें आप समाप्त कर सकें, बजाय एक लम्बी किताब के जिसे आप बीच में पढ़ना छोड़ दें।
और अब हम आगे नए चैप्टर की ओर बढ़ते हैं।
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और दोस्तो ये था आज का चैपटर - पृथ्वी पर सबसे बड़ा प्रदर्शन
और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
तब तक आप खुश रहें, स्वस्थ रहें, आबाद रहें, और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत
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Reviewed by Shiv Rana RCM
on
जनवरी 28, 2026
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