डेविड जे. श्वार्ट्ज़ की पुस्तक- बड़ी सोच का बड़ा जादू यह पुस्तक आपके लिए क्या करेगी -- बड़ी सोच का बड़ा जादू- सफलता के गुर सीखें! बड़ा सोचें और वो सब पाएँ जिसकी आपको हमेशा चाह थी... ज़्यादा कमाई - आर्थिक सुरक्षा -प्रभावशाली - व्यक्तित्व-आदर्श नौकरी- मधुर संबंध
हैल्लो दोस्तो, नमस्कार, आदाव,
स्वागत है आपका शिवा वॉयस लाइब्रेरी में
आज आपको लेखक - डेविड जे. श्वार्ट्ज़ की पुस्तक
बड़ी सोच का बड़ा जादू - की पुस्तक के चैपटर जिसका नाम है
--
------------------------------------------------
www.youtube.com/@shivavoicelibrary
------------------------------------------------
https://www.facebook.com/profile.php?id=61582814052126
------------------------------------------------
https://www.facebook.com/profile.php?id=61585805794623
------------------------------------------------
https://www.instagram.com/shivavoicelibrary/
------------------------------------------------
https://shivabooklibrary.blogspot.com/
---
यह पुस्तक आपके लिए क्या करेगी- की ऑडियो बुक
---
के बारे में बताने जा रहे हैं
आईये शुरू करते हैं।
इस चैपटर की ऑडियो बुक
---
डेविड जे. श्वार्ट्ज़ की पुस्तक- बड़ी सोच का बड़ा जादू
यह पुस्तक आपके लिए क्या करेगी
--
बड़ी सोच का बड़ा जादू- सफलता के गुर सीखें! बड़ा सोचें और वो सब पाएँ जिसकी आपको हमेशा चाह थी...
ज़्यादा कमाई - आर्थिक सुरक्षा -प्रभावशाली - व्यक्तित्व-आदर्श नौकरी- मधुर संबंध
---
समर्पण
----
डेविड तृतीय को - मेरे छह साल के बेटे डेविड ने जब किंडरगार्टन पास किया, तो मैंने उससे पूछा, "बड़े होकर तुम क्या बनना चाहते हो
डेवी ने मेरी तरफ़ ध्यान से देखा और जवाब दिया, "डैडी, मैं प्रोफ़ेसर बनना चाहता हूँ।"
मैंने पूछा, "प्रोफ़ेसर ? किस विषय का प्रोफ़ेसर ?"
"डैडी," उसने जवाब दिया, "मैं सुख का प्रोफ़ेसर बनना चाहता हूँ।" सुख का प्रोफ़ेसर ! बड़ा महत्वाकांक्षी इरादा था। क्या आपको ऐसा नहीं लगता ?
है। तो यह पुस्तक महान लक्ष्य वाले डेविड और उसकी माँ को समर्पित
------
प्रस्तावना
------
इतनी बड़ी पुस्तक क्यों ? इस पुस्तक पर इतनी चर्चा आख़िर क्यों ? इस साल बारह हज़ार पुस्तकें छपेंगी। फिर एक और पुस्तक क्यों ?
मुझे इस बारे में कुछ कहने दें।
कुछ साल पहले मैंने एक बेहद प्रभावशाली सेल्स मीटिंग में हिस्सा लिया। इस कंपनी का वाइस प्रेसिडेन्ट बहुत ज़्यादा रोमांचित था। वह अपने सेल्समैनों को कोई महत्त्वपूर्ण बात समझाना चाहता था। उसके साथ मंच पर उस संगठन का नंबर वन सेल्समैन था, जो दिख तो साधारण रहा था, परंतु उसने अभी ख़त्म हुए साल में 60,000 डॉलर का बिज़नेस किया था। बाक़ी सेल्समैनों ने औसतन 12,000 डॉलर कमाए थे।
वाइस प्रेसिडेन्ट ने ग्रुप से कहा, "मैं चाहता हूँ कि आप हैरी की तरफ़ ध्यान से देखें। आख़िर हैरी में ऐसा क्या है, जो आप सबमें नहीं है? हैरी ने औसत से पाँच गुना ज़्यादा कमाई की है, परंतु क्या हैरी आपसे पाँच गुना ज़्यादा स्मार्ट है? नहीं, हमारे परीक्षण के हिसाब से ऐसा नहीं है। मैंने खुद यह परीक्षण किया है। परीक्षण से पता चला है कि वह उतना ही स्मार्ट है, जितने कि आप लोग।"
"और क्या हैरी ने आप लोगों से पाँच गुना ज़्यादा मेहनत की है ? नहीं: यह भी सही नहीं है। वास्तव में उसने आप लोगों से ज़्यादा समय छुट्टियों में बिताया है।"
"क्या हैरी का इलाक़ा बहुत बढ़िया है। एक बार फिर मुझे यही कहना पड़ेगा कि यह बात भी नहीं है। उसका इलाक़ा बाक़ी इलाक़ों से ख़ास अलग नहीं है। क्या हैरी ज़्यादा शिक्षित है? क्या उसका स्वास्थ्य ज़्यादा अच्छा है? एक बार फिर, नहीं। हैरी उतना ही औसत इंसान है जितने कि आप लोग हैं, परंतु उसमें और आपमें एक फ़र्क है।"
--------
"हैरी और आप लोगों में," वाइस प्रेसिडेन्ट ने कहा, "यह फ़र्क है कि हैरी की सोच आपकी सोच से पाँच गुना ज़्यादा बड़ी है।"
फिर, एक्ज़ीक्यूटिव ने यह बताया कि सफलता का संबंध इंसान के दिमाग़ के आकार से नहीं होता, बल्कि उसकी सोच के आकार से होता है।
यह एक दिलचस्प विचार था। और यह मेरे दिमाग़ में बार-बार आता रहा। मैंने लोगों को जितना देखा, जितने ज़्यादा लोगों के साथ बात की, मैं सफल लोगों की ज़िंदगी में जितनी गहराई तक गया, मुझे उतना ही लगता गया कि यह सचमुच दिलचस्प और शानदार विचार था। हर घटना मुझे यही बताती थी कि किसी इंसान की सोच के आकार पर ही उसके बैंक अकाउंट, उसके सुख के अकाउंट, और उसकी संतुष्टि के अकाउंट का आकार निर्भर करता है। बड़ी सोच में सचमुच जादू की ताक़त होती है।
"अगर बड़ी सोच से इतना सब हासिल होता है, तो फिर हर व्यक्ति इसी तरीक़े से क्यों नहीं सोचता ?" मुझसे यह सवाल कई बार पूछा जाता है। यहाँ इसका जवाब दिया जा रहा है। हम सभी अपने आस-पास के माहौल से प्रभावित होते हैं। हमारी सोच हमारे आस-पास की सोच का प्रॉडक्ट होती है। और हमारे आस-पास की ज़्यादातर सोच छोटी होती है, बड़ी नहीं। आपके चारों तरफ़ एक ऐसा माहौल है जो आपको पीछे धकेलना चाहता है, आपको धक्के मारकर सेकंड क्लास स्ट्रीट में गिराना चाहता है। आपको बार-बार बताया जाता है कि दुनिया में "लीडर्स भरे पड़े हैं, कमी तो पीछे चलने वाले छोटे लोगों की है।" दूसरे शब्दों में आपको यह समझाया जाता है कि लीडर बनने का मौक़ा मुश्किल से मिलता है, और चूँकि दुनिया में बहुत सारे लीडर्स भरे पड़े हैं, इसलिए आप ज़िंदगी में छोटे आदमी बनकर ही सुखी रहें।
परंतु "लीडर्स भरे पड़े हैं" वाले विचार में सच्चाई नहीं है। हर व्यवसाय में चोटी के लोग आपको बता सकते हैं, "समस्या यह है कि छोटे लोग बहुत ज़्यादा तादाद में होते हैं और बहुत कम लोग लीडर्स होते हैं।"
यह छोटा और घटिया माहौल कुछ और बातें भी कहता है। यह आपको बताता है, "जो-जो होना है, सो-सो होता है।" यानी कि आपकी क़िस्मत पर आपका ज़ोर नहीं चलेगा, क्योंकि आपका "भाग्य" आपके कर्म से ज़्यादा ताक़तवर होता है। इसलिए आप अपने सपनों को भूल जाएँ, बड़े घर की हसरत को भूल जाएँ, बच्चों को कॉलेज भेजने के अपने इरादे को भूल जाएँ, बेहतर ज़िंदगी को भूल जाएँ। सब कुछ क़िस्मत पर छोड़ दें। बिस्तर पर लेट जाएँ और मरने का इंतज़ार करें।
और यह बात भी आप सबने सुनी होगी, "सफलता की क्रीमत बहुत ज़्यादा होती है," क्योंकि चोटी पर पहुँचने के लिए आपको अपनी आत्मा, अपना पारिवारिक जीवन, अपनी अंतरात्मा व अपने जीवनमूल्य बेचने पड़ते हैं। परंतु सच तो यह है कि सफलता की क़ीमत इतनी ज़्यादा नहीं होती। आगे बढ़े हर क़दम से आपको लाभ ही होता है।
हमारे आस-पास का माहौल हमें यह भी बताता है कि जीवन में चोटी के स्थानों के लिए बहुत ज़्यादा प्रतियोगिता होती है। परंतु क्या सचमुच ऐसा है? एक रोज़गार अधिकारी ने मुझे बताया कि 50,000 डॉलर प्रतिवर्ष की नौकरियों के लिए जितने आवेदन उसके पास आते हैं, उससे 50 से 250 गुना आवेदन 10,000 डॉलर प्रतिवर्ष की नौकरियों के लिए आते हैं। इसका मतलब है कि फ़र्स्ट क्लास एवेन्यू में नौकरी की तुलना में सेकंड क्लास स्ट्रीट पर नौकरी करने में कम से कम 50 गुना ज़्यादा प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है। फ़र्स्ट क्लास एवेन्यू, यूएसए छोटी सी वीरान सड़क है। वहाँ पर आप जैसे लोगों के लिए काफ़ी जगह है, उन लोगों के लिए जो बड़ा सोचने का साहस कर पाते हैं।
इस पुस्तक में जो मूलभूत सिद्धांत और विचार हैं, वे बहुत ऊँची जगहों से लिए गए हैं, महान और श्रेष्ठ तरीके से सोचने वाले विचारकों से लिए गए हैं। जैसे प्रॉफ़ेट डेविड, जिन्होंने लिखा था, "जैसा आप अपने दिल में सोचते हैं, आप वैसे ही होते हैं।" या इमर्सन, जिन्होंने कहा था, "महान लोग वे होते हैं जो यह देख सकते हैं कि विचार ही दुनिया पर शासन करते हैं।" या फिर मिल्टन, जिन्होंने पैराडाइज़ लॉस्ट में लिखा है, "मस्तिष्क का अपना स्थान निश्चित होता है और यह स्वर्ग को नर्क बना सकता है और नर्क को स्वर्ग।" शेक्सपियर जैसे महान मस्तिष्क वाले व्यक्ति का कहना था, "कोई भी चीज़ बुरी या अच्छी नहीं होती, हमारा नज़रिया ही उसे अच्छा या बुरा बनाता है।"
परंतु हमें इस बात का प्रमाण कैसे मिलेगा? हमें यह कैसे पता चलेगा कि यह महान विचारक सही थे ? सवाल जायज़ हैं। इसका प्रमाण हमें अपने आस-पास के उन चुनिंदा लोगों से मिलेगा जिन्होंने सफलता, उपलब्धियाँ और सुख हासिल करके यह साबित कर दिया है कि बड़ी सोच सचमुच जादू की तरह काम करती है।
हमने यहाँ जो आसान क़दम सुझाए हैं, वे कोरे सिद्धांत नहीं हैं, जिन्हें बिना जाँचे-परखे हमने आपके सामने परोस दिया है। वे किसी एक आदमी की राय या कल्पना की उपज नहीं हैं। वे जीवन की स्थितियों के बारे में आज़माई हुई तकनीकें हैं और शाश्वत रूप से सफल होने वाली ऐसी तकनीकें हैं जो जादू की तरह काम करती हैं।
आप यह पृष्ठ पढ़ रहे हैं इससे यह साबित होता है कि आप बड़ी सफलता हासिल करने में रुचि रखते हैं। आप अपनी इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं। आप बेहतर जीवनशैली का आनंद लेना चाहते हैं। आप वे सारी चीजें हासिल करना चाहते हैं जो आपको लगता है कि आपके पास होनी चाहिए। सफलता में रुचि रखना एक अद्भुत गुण है।
आपमें एक और अद्भुत गुण है। आप इस पुस्तक को अपने हाथ में पकड़े हुए हैं, इससे यह पता चलता है कि आपमें अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए औज़ार खोजने की बुद्धि भी है। किसी भी चीज़ को बनाने के लिए, चाहे वह कार हो, पुल हो या मिसाइल हो, हमें औज़ारों की ज़रूरत होती है। कई लोग सफल जीवन बनाने की कोशिश करते समय यह भूल जाते हैं कि इस काम में उनकी मदद करने के लिए कई औज़ार भी हैं। आप यह नहीं भूले हैं। आपमें इस तरह दो ऐसे मूलभूत गुण हैं जिनकी वजह से आप इस पुस्तक का सच्चा लाभ उठा सकते हैं : बड़ी सफलता हासिल करने की इच्छा, और उस इच्छा को पूरा करने में किसी औज़ार की मदद लेने की बुद्धि।
बड़ा सोचें और आप जीवन में बड़े बन सकेंगे। आपको बड़े-बड़े सुख मिलेंगे। आपकी उपलब्धियाँ बड़ी होंगी। आपकी आमदनी बड़ी होगी। आपके दोस्त बड़े होंगे। आपको लोग बड़ा सम्मान देंगे।
तो वादे बहुत हो चुके।
अब शुरू करें। अभी। और जानें कि आप अपनी सोच को किस तरह अलादीन के चिराग की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। महान दार्शनिक डिज़राइली के इस विचार से शुरू करें, "ज़िंदगी इतनी छोटी है कि इसे घटिया नहीं होना चाहिए।"
----
यह पुस्तक आपके लिए क्या करेगी ?
----
इस पुस्तक के हर अध्याय में आपको दर्जनों शानदार, व्यावहारिक विचार, तकनीकें और सिद्धांत मिलेंगे। इन सिद्धांतों से आप बड़ी सोच की जादुई शक्ति का दोहन कर पाएँगे। ऐसा करने से आप मनचाही सफलता, सुख, और संतोष हासिल कर पाएँगे। हर तकनीक को ज़्यादा अच्छी तरह से समझाने के लिए असली ज़िंदगी का एक उदाहरण भी दिया गया है। आप न सिर्फ़ यह समझ लेंगे कि आपको क्या करना है, बल्कि आप यह भी समझ लेंगे कि इन सिद्धांतों को असली ज़िंदगी की स्थितियों और समस्याओं में किस तरह लागू करना है। तो यहाँ यह बताया जा रहा है कि यह पुस्तक आपके लिए क्या करेगी और आपको सफलता पाने के लिए किस रास्ते पर चलना चाहिए।
----
विश्वास करें कि आप सफल हो सकते हैं और आप हो जाएँगे
----
सफलता यानी बहुत सी अद्भुत और अच्छी चीज़ें। सफलता का मतलब है अमीरी शानदार घर, मज़ेदार छुट्टियाँ, यात्रा, नई चीजें, आर्थिक सुरक्षा, अपने बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा खुशहाली देना। सफलता का मतलब है प्रशंसा का पात्र बनना, लीडर बनना, अपने बिज़नेस और सामाजिक जीवन में सम्मान पाना। सफलता का मतलब है आज़ादी- चिंताओं, डर, कुंठाओं और असफलता से आज़ादी। सफलता का मतलब है आत्म-सम्मान, ज़िंदगी का असली सुख और जीवन में संतुष्टि, जो लोग आप पर निर्भर हैं उनके लिए अधिक से अधिक करने की क्षमता।
सफलता का मतलब है जीतना।
सफलता उपलब्धि मनुष्य के जीवन का लक्ष्य है।
हर इंसान सफलता चाहता है। हर इंसान चाहता है कि उसे ज़िंदगी का हर सुख मिले। कोई भी घिसट-घिसटकर औसत ज़िंदगी नहीं जीना चाहता। कोई भी सेकंड क्लास नहीं दिखना चाहता या इस तरह का जीवन नहीं गुज़ारना चाहता।
सफल जीवन का व्यावहारिक रास्ता हमें बाइबल की उस पंक्ति में दिखाया गया है जिसके अनुसार आस्था से पहाड़ हिलाए जा सकते हैं।
---
विश्वास करें, सचमुच विश्वास करें कि आप पहाड़ हिला सकते हैं और आप वाक़ई ऐसा कर सकते हैं। अधिकतर लोगों को यह विश्वास ही नहीं होता कि उनमें पहाड़ हिलाने की क्षमता है। इसका परिणाम यह होता है कि वे ऐसा कभी नहीं कर पाते।
किसी मौक़े पर आपने शायद किसी को यह कहते सुना होगा, "यह सोचना बकवास है कि आप किसी पहाड़ को यह कहकर हिला सकते हैं, 'पहाड़, मेरे रास्ते से हट जाओ।' यह असंभव है।"
जो लोग इस तरह से सोचते हैं उन्होंने आस्था और इच्छा के बीच के अंतर को ठीक से नहीं समझा है। यह सच है कि केवल इच्छा करने भर से आप पहाड़ को नहीं हटा सकते। केवल इच्छा करने भर से आप एक्जीक्यूटिव नहीं बन जाते। केवल इच्छा करने भर से आप पाँच बेडरूम और तीन बाथ वाले घर के मालिक नहीं बन जाते या आप अमीर नहीं बन जाते। केवल इच्छा करने भर से आप लीडर नहीं बन जाते।
परंतु अगर आपमें विश्वास हो, तो आप पहाड़ को हिला सकते हैं। अगर आपको अपनी सफलता का विश्वास हो, तो इस विश्वास के सहारे. आप सफलता हासिल कर सकते हैं।
विश्वास की शक्ति के बारे में कुछ भी जादुई या रहस्यमय नहीं है।
विश्वास इस तरह काम करता है। "मुझे विश्वास है कि मैं यह कर सकता हूँ" वाला रवैया हमें वह शक्ति, योग्यता और ऊर्जा देता है जिसके सहारे हम वह काम कर पाते हैं। जब आपको यक़ीन होता है कि आप कोई काम कर सकते हैं, तो आपको अपने आप पता चल जाता है कि इसे कैसे किया जा सकता है।
हर दिन देश भर में युवा लोग नई नौकरियाँ शुरू कर रहे हैं। ये सभी युवक-युवतियाँ "चाहते" हैं कि किसी दिन वे सफलता की चोटी पर पहुँचें और सफल बनें। परंतु इनमें से ज़्यादातर लोगों को यह विश्वास नहीं है कि वे कभी चोटी पर पहुँच पाएँगे। और इसी कारण वे चोटी पर नहीं पहुँच पाते। अगर आप यह मान लेते हैं कि चोटी पर पहुँचना असंभव है, तो आप उन सीढ़ियों को नहीं ढूँढ़ पाएँगे जिनके सहारे आप चोटी पर पहुँच सकते हैं। ऐसे लोग जिंदगी भर "औसत" व्यक्तियों की तरह ही व्यवहार करते रहते हैं।
परंतु इनमें से कुछ युवक-युवतियों को विश्वास होगा कि वे सफल हो सकते हैं। वे अपने काम के प्रति "मैं चोटी पर पहुँचकर दिखाऊँगा" वाला रवैया रखते हैं। और चूँकि उनमें ज़बर्दस्त विश्वास होता है इसलिए वे चोटी पर पहुँच जाते हैं। यह जानते हुए कि वे भी सफल हो सकते हैं - और ऐसा असंभव नहीं है यह लोग अपने वरिष्ठ एक्जीक्यूटिव्ज के व्यवहार को ध्यान से देखते हैं। वे सीखते हैं कि सफल लोग किस तरह समस्याओं को सुलझाते हैं और निर्णय लेते हैं। वे सफल लोगों के रवैए को ध्यान से देखते हैं।
जिस आदमी को विश्वास होता है कि वह काम कर लेगा, उसे हमेशा उस काम को करने का तरीक़ा सूझ जाता है।
मेरी एक परिचित महिला ने दो साल पहले यह फ़ैसला किया कि वह मोबाइल होम बेचने की सेल्स एजेंसी बनाएगी। उसे कई लोगों ने सलाह दी कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह ऐसा नहीं कर पाएगी।
उस महिला के पास पूँजी के नाम पर सिर्फ़ 3000 डॉलर थे और उसे बताया गया कि इस काम को शुरू करने के लिए इससे कई गुना ज़्यादा पूँजी की ज़रूरत होती है।
उसे समझाया गया, "इसमें प्रतियोगिता बहुत है। और इसके अलावा, आपको मोबाइल होम्स बेचने का कोई अनुभव भी नहीं है। आपको बिज़नेस चलाने का अनुभव भी नहीं है।"
परंतु इस युवा महिला को अपनी क्षमताओं पर विश्वास था। उसे विश्वास था कि वह सफल होगी। वह मानती थी कि उसके पास पूँजी नहीं थी, कि बिज़नेस में सचमुच बहुत प्रतियोगिता थी, और यह कि उसके पास अनुभव नहीं था।
"परंतु," उसने कहा, "मुझे यह साफ़ दिख रहा है कि मोबाइल होम उद्योग तेज़ी से फैलने जा रहा है। इसके अलावा, मैंने अपने इस बिज़नेस में प्रतियोगिता का अध्ययन कर लिया है। मैं जानती हूँ कि मैं इस बिज़नेस को इस शहर में सबसे अच्छे तरीक़े से कर सकती हूँ। मैं जानती हूँ कि मुझसे थोड़ी-बहुत गलतियाँ तो होंगी, परंतु मैं चोटी पर तेजी से पहुँचना चाहती हूँ।"
और वह पहुँच गई। उसे पूँजी जुटाने में कोई ख़ास समस्या नहीं आई। इस बिज़नेस में सफलता के उसके दृढ़ विश्वास को देखकर दो निवेशकों ने उसके व्यवसाय में निवेश करने का जोखिम लिया। और संपूर्ण आस्था के सहारे उसने 'असंभव' को कर दिखाया उसने बिना पैसा दिए एक ट्रेलर निर्माता से माल एडवांस ले लिया।
पिछले साल उसने 1,000,000 डॉलर से ज़्यादा क़ीमत के ट्रेलर बेचे।
"अगले साल," उसका कहना है, "मुझे उम्मीद है कि मैं 2,000,000 डॉलर का आँकड़ा पार कर जाऊँगी।"
विश्वास, दृढ़ विश्वास, मस्तिष्क को प्रेरित करता है कि वह लक्ष्य को प्राप्त करने के तरीके, साधन और उपाय खोजे। और अगर आप यक़ीन कर लें कि आप सफल हो सकते हैं, तो इससे दूसरे भी आप पर विश्वास करने लगते हैं।
ज़्यादातर लोग विश्वास की शक्ति में भरोसा नहीं करते। परंतु कई लोग करते हैं, जैसे अमेरिका के सक्सेसफुल विले में रहने वाले नागरिक। कुछ सप्ताह पहले मेरे एक दोस्त ने जो स्टेट हाइवे डिपार्टमेंट में अधिकारी है मुझे एक "पहाड़ हिलाने वाला" अनुभव बताया।
"पिछले महीने," मेरे दोस्त ने बताया, "हमारे विभाग ने कई इंजीनियरिंग कंपनियों को टेंडर नोटिस दिए। हमें अपने हाइवे बनाने के लिए किसी फ़र्म से आठ पुलों की डिज़ाइन बनवानी थी। पुलों की लागत 5,000,000 डॉलर थी। जिस भी इंजीनियरिंग फ़र्म को चुना जाता, उसे डिज़ाइनिंग के काम के लिए 4 प्रतिशत का कमीशन दिया जाना प्रस्तावित था, यानी 2,00,000 डॉलर।
"मैंने इस बारे में 21 डिज़ाइनिंग फ़र्म्स से बात की। सबसे बड़ी चार फ़र्मों ने तो तत्काल प्रस्ताव भेज दिए। बाक़ी 17 कंपनियों छोटी थीं, जिनमें केवल 3 से 7 इंजीनियर ही थे। प्रोजेक्ट इतना बड़ा था कि इनमें से 16 तो इसके बड़े आकार को देखकर ही घबरा गई। उन्होंने इतने बड़े प्रोजेक्ट को देखा, अपने सिर को हिलाया और इस तरह की बात कही, 'यह हमारे लिए बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। काश हम इसे कर पाते, परंतु कोशिश करने से कोई फ़ायदा नहीं।'
"परंतु इनमें से एक छोटी फ़र्म ने, जिसके पास केवल तीन इंजीनियर थे, प्रोजेक्ट का अध्ययन किया और कहा, 'हम इसे कर सकते हैं। हम एक प्रस्ताव तो भिजवा ही देते हैं।' उन्होंने प्रस्ताव भिजवाया, और उन्हें वह काम मिल गया।"
जिन्हें यक़ीन होता है कि वे पहाड़ हिला सकते हैं, वे ऐसा कर पाते हैं। जिन्हें यक़ीन होता है कि वे पहाड़ नहीं हिला सकते, वे ऐसा नहीं कर पाते। विश्वास से ही ऐसा करने की शक्ति मिलती है।
दरअसल, आज के आधुनिक दौर में विश्वास के दम पर पहाड़ हिलाने से भी ज़्यादा बड़ी चीजें करना संभव है। आज के अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम का सबसे मूलभूत तत्व यह है कि अंतरिक्ष को जीता जा सकता है। मनुष्य अंतरिक्ष में यात्रा कर सकता है, इस दृढ़ विश्वास के बिना हमारे वैज्ञानिकों में वह साहस, उत्साह, और रुचि पैदा नहीं हो पाती जिससे उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिलता। यह विश्वास कि कैंसर का इलाज किया जा सकता है, हमें इस बात के लिए प्रेरित करता है कि हम इसके उपचार को खोजें और अंततः ऐसा उपचार हम खोज ही लेंगे। अभी यह चर्चा चल रही है कि इंग्लिश चैनल के नीचे एक टनल बनाई जाए और इंग्लैंड को महाद्वीप से जोड़ दिया जाए। यह टनल बन पाएगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे बनाने वाले लोगों के पास ऐसा कर पाने का विश्वास है या नहीं।
प्रबल विश्वास ही वह शक्ति है जो महान पुस्तकों, नाटकों, वैज्ञानिक खोजों के पीछे होती है। सफलता में विश्वास ही हर सफल बिज़नेस, चर्च और राजनीतिक संगठन के पीछे होता है। सफलता में विश्वास ही वह मूलभूत, अनिवार्य तत्व है जो हर सफल व्यक्ति में पाया जाता है।
विश्वास करें, सचमुच विश्वास करें, कि आप सफल हो सकते हैं और आप हो जाएँगे।
बरसों तक मैंने ऐसे कई लोगों से बात की है जो अपने बिज़नेस या दूसरे करियर में असफल हो गए थे। मैंने असफलता के बहुत से कारण और बहुत से बहाने सुने हैं। असफलता के बारे में हुई इन चर्चाओं में हमे एक महत्वपूर्ण जानकारी मिली। असफल आदमी के मुँह से इस तरह की कोई न कोई बात ज़रूर सुनने में आई, "सच कहूँ तो, मुझे लग ही नहीं रहा था कि हम सफल हो पाएँगे" या "मैंने काम शुरू किया उसके पहले ही मुझे इसकी सफलता पर शक हो रहा था" या "दरअसल जब यह असफल हुआ तो मुझे ज़रा भी हैरानी नहीं हुई।"
"ठीक-है-मैं-कोशिश-करके-देखता हूँ-पर-मुझे नहीं लगता-कि-यह-होगा" वाले रवैए की वजह से ही आदमी असफल होता है।
अविश्वास नकारात्मक शक्ति है। जब मस्तिष्क किसी बात पर अविश्वास करता है या किसी बात पर संदेह करता है तो मस्तिष्क ऐसे "कारणों" को खोज लेता है जिससे उस अविश्वास को बल मिले। ज़्यादातर असफलताओं के लिए ज़िम्मेदार हैं शंका, अविश्वास, असफल होने की अवचेतन इच्छा व सफल होने की सच्ची इच्छा न होना।
शंका करें और असफल हो जाएँ।
जीत के बारे में सोचें और सफल हो जाएँ।
एक युवा कहानीकार अपनी लेखन महत्वाकांक्षाओं को लेकर मुझसे हाल में मिली। चर्चा उसके क्षेत्र के एक महान लेखक के बारे में होने लगी।
"ओह," उसने कहा, "मिस्टर एक्स असाधारण लेखक हैं, परंतु मैं उनके जितनी सफल नहीं हो सकती।"
उसके रवैए से मुझे बहुत निराशा हुई, क्योंकि मैं उस मिस्टर एक्स को जानता हूँ। उनमें न तो असाधारण बुद्धि है, न ही असाधारण प्रेरणा है, न ही वे किसी और बात में सुपर हैं, उनमें केवल एक ही बात असाधारण है और वह है उनका असाधारण आत्मविश्वास। उन्हें दृढ़ विश्वास है कि वे सर्वश्रेष्ठ लेखक हैं और इसीलिए वे सर्वश्रेष्ठ लिखते हैं।
लीडर का सम्मान करना अच्छी बात है। उससे सीखें। उसे ध्यान से देखें। उसका अध्ययन करें। परंतु उसकी पूजा न करें। यह विश्वास करें कि आप उससे आगे निकल सकते हैं। यह विश्वास करें कि आप उससे ऊपर जा सकते हैं। जिन लोगों का रवैया सेकंड क्लास होता है वे सेकंड क्लास काम ही कर पाते हैं।
इसे इस तरह से देखें। विश्वास ही वह थर्मोस्टेट है जो हमारी उपलब्धियों को नियमित करता है। उस व्यक्ति का अध्ययन करें जो औसत ज़िंदगी के जाल में उलझा हुआ है। उसे विश्वास है कि यह अयोग्य है, इसीलिए उसे अयोग्य समझा जाता है। वह मानता है कि वह बड़े काम नहीं कर सकता और इसीलिए वह उन्हें नहीं कर पाता। वह मानता है कि वह महत्वपूर्ण नहीं है, इसलिए जो भी वह करता है वह काम महत्वहीन बन जाता है। समय के साथ-साथ आत्मविश्वास का अभाव उसकी बातों, चाल-ढाल और कामों में दिखने लगता है। जब तक कि वह अपने थर्मोस्टेट को फिर से संतुलित नहीं करेगा, तब तक वह सिकुड़ता रहेगा, बौना होता जाएगा और अपनी नज़रों में छोटा होता जाएगा। और चूँकि दूसरे हममें वही देखते हैं जो हम अपने आपमें देखते हैं इसलिए वह अपने आस-पास के लोगों की नज़रों में भी छोटा होता जाएगा।
अब उस व्यक्ति की तरफ़ देखें जो आगे बढ़ रहा है। उसे विश्वास है कि वह योग्य है और इसलिए बाक़ी लोग भी उसे योग्य समझते हैं। उसे विश्वास है कि वह बड़े, कठिन काम कर सकता है- और इसलिए वह इन्हें कर लेता है। जो भी वह करता है, जिस तरह भी वह लोगों से बात करता है, उसका चरित्र, उसके विचार, उसका दृष्टिकोण; सभी बातों में यह झलकता है कि "यह व्यक्ति प्रोफ़ेशनल है। यह एक महत्वपूर्ण व्यक्ति है।"
कोई भी व्यक्ति वैसा ही होता है, जैसे उसके विचार होते हैं। बड़ी बातों में यक़ीन करें। अपने थर्मोस्टेट को आगे की तरफ़ सेट करें। अपने सफलता के अभियान की शुरुआत इस सच्चे, संजीदा विश्वास से करें कि आप सफल हो सकते हैं। अगर आपको यक़ीन है कि आप महान बन सकते हैं तो आप सचमुच महान बन जाएँगे।
कई साल पहले मैं डेट्रॉइट में एक बिज़नेसमेन समूह को संबोधित कर रहा था। चर्चा के बाद एक व्यक्ति मेरे पास आया और उसने अपना परिचय देने के बाद कहा, "मुझे आपकी बातें पसंद आईं। क्या आप मुझे कुछ मिनट का समय दे सकते हैं? मैं आपके साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव पर चर्चा करना चाहता हूँ।"
कुछ ही समय बाव हम एक रेस्तराँ में बैठे हुए थे।
"मेरा एक व्यक्तिगत अनुभव है," उसने शुरू किया. "जो आपकी इस शाम की चर्चा से संबंधित था, जिसमें आपने कहा था कि आप किस तरह अपने दिमाग़ को अपना सहयोगी बनाएँ, न कि अपना विरोधी। मैंने आज तक यह किसी को नहीं बताया है कि मैंने किस तरह अपने आपको औसत लोगों की दुनिया से ऊपर उठाया है, परंतु मैं आपको यह बताना चाहता हूँ।"
"और मैं यह सुनना चाहूँगा," मैंने कहा।
"आज से पाँच साल पहले मैं भी औरों की ही तरह था- मेरी ज़िंदगी घिसट भर रही थी। मेरी कमाई औसत थी। परंतु यह आदर्श नहीं थी। हमारा घर बहुत छोटा था और हमारे पास अपनी मनचाही चीज़ों को ख़रीदने के लिए पैसे नहीं रहते थे। मेरी पत्नी, भगवान उसका भला करे, इस बात की शिकायत नहीं करती थी, परंतु उसके चेहरे पर यह साफ़ लिखा हुआ था कि उसने भाग्य के सामने हार मान ली है और वह सचमुच खुश नहीं है। अपने अंदर मैं बहुत असंतुष्ट महसूस कर रहा था। जब मैंने देखा कि मैं किस तरह अपनी अच्छी पत्नी और दो बच्चों को आदर्श जीवनशैली नहीं दे पा रहा हूँ, तो मुझे अंदर से बहुत चोट पहुँची।"
"परंतु आज सब कुछ बदल गया है," मेरे दोस्त ने कहा। "आज हम दो एकड़ के प्लॉट पर बने अपने सुंदर नए घर में रहते हैं, जो यहाँ से दो सौ मील दूर है। आज हमें इस बात की चिंता नहीं है कि हम अपने बच्चों को अच्छे कॉलेज में भेज पाएँगे या नहीं। आज मेरी पत्नी जब नए कपड़े ख़रीदती है तो उसे यह नहीं लगता, जैसे उसने कोई गुनाह कर दिया है। अगली गर्मियों में हम लोग एक महीने की छुट्टियाँ मनाने यूरोप जा रहे हैं। हम सचमुच ज़िंदगी का आनंद ले रहे हैं।"
"ऐसा कैसे हुआ?" मैंने पूछा।
उसका जवाब था, "आपने आज रात एक बात कही थी, 'अपने विश्वास की शक्ति का दोहन करें।' मैंने वही किया और परिणाम आपके सामने है। पाँच साल पहले मैंने डेट्रॉइट की एक टूल-एंड-डाई कंपनी के बारे में सुना। हम उस वक़्त क्लीवलैंड में रह रहे थे। मैंने फ़ैसला किया कि कोशिश करने में हर्ज ही क्या है, शायद यहाँ थोड़ी ज़्यादा तनख्वाह मिल जाए। मैं यहाँ रविवार की शाम को ही आ गया, जबकि इंटरव्यू सोमवार को था।
"डिनर के बाद मैं अपने होटल के कमरे में बैठा हुआ था और न जाने क्यों, मैं खुद को कोसने लगा, 'आख़िर क्यों,' मैंने खुद से पूछा, 'आख़िर क्यों, मैं एक असफल आदमी की तरह मिडिल क्लास के दलदल में फँसा हुआ हूँ? आख़िर क्यों थोड़ी ज़्यादा तनख्वाह के लिए मैं यह नौकरी हासिल करने की कोशिश कर रहा हूँ?'
"मैं आज तक यह नहीं जान पाया कि मैंने ऐसा क्यों किया, परंतु इसके बाद मैंने होटल का नोटपैड लिया। नोटपैड में मैंने अपने से ज़्यादा सफल पाँच लोगों के नाम लिखे, जिन्हें मैं वर्षों से जानता था और जिनकी आमदनी और नौकरी मुझसे काफ़ी बेहतर थीं। दो तो मेरे पुराने पड़ोसी थे जो अब एक पॉश कॉलोनी में रहते थे। दो लोगों के लिए मैं पहले काम किया करता था और एक मेरा रिश्तेदार था।
"इसके बाद मैंने खुद से पूछा कि मेरे इन पाँच दोस्तों में ऐसा क्या था जो मुझमें नहीं था। मैंने अपनी और उनकी बुद्धि की तुलना की और ईमानदारी से विश्लेषण करने पर यह पाया कि जहाँ तक बुद्धि का सवाल था, वे मुझसे बेहतर नहीं थे। न ही वे मुझसे शिक्षा, चरित्र या व्यक्तिगत आदतों में बेहतर थे।
"आख़िरकार मैं सफलता के एक ऐसे गुण पर आया, जिसके बारे में काफ़ी चर्चा होती है। पहल करना। मुझे यह मानने में काफ़ी दिक़्क़त हुई, पर इसे मानने के सिवा कोई चारा नहीं था। इस मामले में मेरा रिकॉर्ड उनकी तुलना में काफ़ी नीचे था।
"यह सब सोचते-सोचते सुबह के 4 बज गए, परंतु मेरा दिमाग बिलकुल स्पष्ट सोच रहा था। जीवन में पहली बार मैं अपनी कमज़ोरी को देख पाया था। मैंने पाया कि इसी चीज़ के कारण मैं जीवन में इतना पीछे रह गया था। मैंने हमेशा सहारे के लिए अपने साथ एक छोटी छड़ी रखी थी। मैं अपने अंदर जितनी गहराई तक गया, मैंने पाया कि मैं इसलिए पहल नहीं करता था, क्योंकि मुझे अंदर से यह विश्वास नहीं था कि मैं ऐसा कर सकता था, कि मैं सचमुच इस क़ाबिल हूँ।
"पूरी रात मैं यही सोचता रहा कि आत्मविश्वास की कमी के कारण ही मैंने अपने मस्तिष्क को अपना विरोधी बना लिया था। मैंने पाया कि मैं खुद को यही बताता था कि मैं आगे क्यों नहीं बढ़ सकता, जबकि मुझे खुद को यह बताना चाहिए था कि मुझे आगे क्यों बढ़ना चाहिए। मैं अपने आपको सस्ते में बेच रहा था। अपनी नज़रों में गिरा होने के कारण ही मैं लोगों की नज़रों में भी गिरा हुआ था। यह मेरी हर बात में स्पष्ट रूप से दिख रहा था। तभी मुझे यह समझ में आया कि जब तक मैं खुद में विश्वास नहीं करूँगा, तब तक कोई दूसरा भी मुझ पर विश्वास नहीं करेगा।
"उसी समय मैंने फ़ैसला किया, 'अब सेकंड क्लास की ज़िंदगी ख़त्म । आगे से मैं खुद को सस्ते में नहीं बेचूँगा।'
"अगली सुबह भी मुझ में वही आत्मविश्वास था। नौकरी के उस इंटरव्यू में मेरे विश्वास का पहला इम्तहान हुआ। इंटरव्यू के लिए अपने घर से चलते समय मैंने सोचा था कि मैं हिम्मत करके अपनी वर्तमान नौकरी से 750 या 1000 डॉलर ज़्यादा माँग लूँगा। परंतु अब, जब मैं जान गया था कि मैं एक योग्य आदमी था, मैंने 3500 डॉलर ज़्यादा माँगे। और यह मुझे मिले भी। मैं खुद को महँगे दाम में इसलिए बेच पाया, क्योंकि एक रात तक चले लंबे आत्म-विश्लेषण के बाद मैं यह जान गया था कि मुझ में ऐसे गुण हैं जिन्हें महँगे दामों पर बेचा जा सकता है।
"दो साल में ही मैंने अपनी प्रतिष्ठा एक सफल बिज़नेसमैन के रूप में बना ली। सभी जान गए कि यह आदमी बिज़नेस ला सकता है। फिर मंदी का दौर आया। इस दौर में में और भी ज़्यादा मूल्यवान बन गया, क्योंकि मुझ में अपनी इंडस्ट्री में सबसे अच्छा बिज़नेस हासिल करने की क़ाबिलियत थी। कंपनी का पुनर्गठन हुआ और मुझे बहुतं ज़्यादा तनख्वाह मिलने लगी और इसके अलावा मुझे कंपनी के काफ़ी सारे शेयर भी मिले।":
लगेंगी। अपने आपमें विश्वास करें और आपके साथ अच्छी घटनाएँ होने आपका दिमाग़ "विचारों की फ़ैक्टरी" है। यह एक व्यस्त फैक्टरी है, जो एक दिन में अनगिनत विचारों का उत्पादन करती है।
आपके विचारों की इस फ़ैक्टरी में उत्पादन के इन्चार्ज दो फोरमैन हैं, जिनमें से एक को हम मिस्टर विजय और दूसरे को मिस्टर पराजय का नाम देंगे। मिस्टर विजय सकारात्मक विचारों के निर्माण के इन्चार्ज हैं। उनकी विशेषज्ञता इस तरह के कारण देने में है कि आप क्यों सफल हो सकते हैं, आपमें इस काम की क़ाबिलियत क्यों है, और आप इसमें क्यों सफल होंगे।
दूसरा फ़ोरमैन मिस्टर पराजय नकारात्मक, कमतरी के विचारों का उत्पादन करता है। यह फ़ोरमैन इस तरह के कारण ढूँढ़ने में महारत रखता है कि आप कोई काम क्यों नहीं कर सकते, कि आप क्यों कमज़ोर हैं, कि आप क्यों अक्षम हैं। उसकी विशेषज्ञता इस तरह के विचारों की श्रृंखला ढूँढ़ने में है कि "आप क्यों असफल हो जाएँगे?"
मिस्टर विजय और मिस्टर पराजय दोनों ही बेहद आज्ञाकारी होते हैं। वे तत्काल आपकी बात पर ध्यान देते हैं। आपको दोनों में से किसी भी फ़ोरमैन को मानसिक रूप से संकेत भर देना होता है। अगर संकेत सकारात्मक होता है तो मिस्टर विजय आगे आ जाएँगे और काम में जुट जाएँगे। इसी तरह नकारात्मक संकेत देखते ही मिस्टर पराजय सक्रिय हो जाएँगे।
दोनों फ़ोरमैन आपके लिए किस तरह काम करते हैं, इसे स्वयं आज़माकर देखें। अपने आपसे कहें, "आज तो बड़ा ही बुरा दिन है।" इससे मिस्टर पराजय हरकत में आ जाएँगे और वे आपको सही साबित करने के लिए कुछ तथ्यों का उत्पादन कर देंगे। वे आपको यह सुझाव देंगे कि मौसम ज़्यादा गर्म या ज़्यादा ठंडा है, आज बिज़नेस बुरा रहेगा, बिक्री कम होगी, दूसरे लोग चिड़चिड़े रहेंगे, आप बीमार पड़ सकते हैं, आपकी पत्नी आज बात का बतंगड़ बना देगी। मिस्टर पराजय बेहद सक्षम होते हैं। वे कुछ ही मिनटों में आपको पूरी तरह विश्वास दिला देते हैं कि आज का दिन सचमुच बहुत बुरा है। और आपका दिन सचमुच बुरा साबित होता है।
--
परंतु अपने आपसे कहें, "आज कितना बढ़िया दिन है।" और तत्काल मिस्टर विजय सक्रिय हो जाते हैं। वे आपको बताते हैं, "आज शानदार दिन है। खुशगवार मौसम है। कितना सुखद जीवन है। आज आप जो भी काम करेंगे बढ़िया करेंगे और आप उसमें निश्चित रूप से सफल होंगे।" और आपका वह दिन सचमुच बहुत अच्छा गुज़रता है।
इसी तरह से मिस्टर पराजय आपको यह बताते हैं कि आप मिस्टर स्मिथ को माल क्यों नहीं बेच सकते,
जबकि मिस्टर विजय आपको बताते हैं कि आप मिस्टर स्मिथ को माल किस तरह बेच सकते हैं। मिस्टर पराजय आपको यह विश्वास दिलाते हैं कि आप असफल हो जाएँगे, जबकि मिस्टर विजय आपको यह विश्वास दिलाते हैं कि आप क्यों सफल होंगे। मिस्टर पराजय टॉम को नापसंद करने के कई कारण गिना देंगे, जबकि मिस्टर विजय टॉम को पसंद करने के कई कारण गिना देंगे।
आप इन दोनों फ़ोरमैनों में से जिसे ज़्यादा काम देंगे, वह उतना ही ताक़तवर बनता जाएगा। अगर मिस्टर पराजय को ज़्यादा काम दिया जाएगा तो वह अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ा लेगा और आपके दिमाग़ की ज़्यादा जगह पर क़ब्ज़ा कर लेगा। एक दिन ऐसा आएगा जब वह आपके दिमाग़ के विचारों का पूरा उत्पादन अपने हाथ में ले लेगा और इसके बाद आपकी मानसिकता पूरी तरह नकारात्मक हो जाएगी।
समझदारी इसी में है कि आप मिस्टर पराजय को तत्काल नौकरी से निकाल दें। आपको उनकी ज़रूरत नहीं है। आपको उनकी इस सलाह की ज़रूरत नहीं है कि आप कोई काम क्यों नहीं कर सकते, कि आप क्यों अक्षम हैं, और आप क्यों असफल होंगे इत्यादि। जहाँ आप पहुँचना चाहते हैं, वहाँ तक आपको पहुँचाने में मिस्टर पराजय आपकी कोई मदद नहीं कर सकते, इसलिए मिस्टर पराजय को आप धक्के मारकर अपने दिमाग की फ़ैक्टरी से बाहर निकाल दें।
पूरे समय मिस्टर विजय से ही काम लें। जब भी आपके दिमाग में कोई विचार आए तो मिस्टर विजय को ही वह काम सौंपें। वह आपको बताएँगे कि आप किस तरह सफल हो सकते हैं।
अगले चौबीस घंटों में अमेरिका में 11,500 नए ग्राहक आ जाएँगे।
जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है। अगले दस सालों में 3.5 करोड़ लोगों की वृद्धि का अनुमान है। इसका मतलब है पाँच बड़े शहरों की वर्तमान जनसंख्या : न्यूयॉर्क, शिकागो, लॉस पैजेलिस, डेट्रॉइट और फिलाडेल्फिया। कल्पना करें।
नए उद्योग, नए वैज्ञानिक आविष्कार, बढ़ते हुए बाज़ार- हर तरफ़ अवसर ही अवसर हैं। यह अच्छी खबर है। जिंदा रहने के लिए यह अद्भुत समय है।
हर क्षेत्र में ऐसे अवसर बिखरे हैं जहाँ चोटी के लोगों की रिकॉर्ड माँग है- उन लोगों की जिनमें दूसरों को प्रभावित करने की अधिकतम योग्यता है, जो दूसरों का मार्गदर्शन कर सकते हैं, जो उनके लीडर बनकर उनकी सेवा कर सकते हैं। और जो लोग ऐसे लीडर बनेंगे, वे सभी आज बयस्क हैं या वयस्क बनने वाले हैं। उनमें से एक आप भी हो सकते हैं।
आर्थिक व्यवस्था में उछाल का यह मतलब नहीं है कि आप व्यक्तिगत रूप से सफल हो ही जाएँगे। देखा जाए तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उछाल हमेशा ही रहा है। परंतु इसके बाद भी लाखों-करोड़ों लोग संघर्ष ही करते रहते हैं और सफल नहीं हो पाते। ज़्यादातर लोग औसत ज़िंदगी के दलदल में ही फँसे रहते हैं और पिछले दो दशकों से लगातार चल रहे रिकॉर्ड अवसर का लाभ नहीं उठा पाते। और आगे आने वाले अच्छे समय में भी ज़्यादातर लोग चिंता ही करते रहेंगे, डरते ही रहेंगे, जिंदगी भर खुद को अयोग्य मानते हुए घिसटते ही रहेंगे, और वह काम नहीं कर पाएँगे जो वे करना चाहते हैं। इसका परिणाम यह होगा कि उन्हें उनके काम के बदले में कम तनख्वाह ही मिलेगी, उनकी खुशी छोटी खुशी ही होगी।
जो लोग अवसर का भरपूर लाभ उठाते हैं (और यहाँ मैं यह कहना चाहता हूँ कि आप भी उन लोगों में से एक हो सकते हैं, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो आप इस पुस्तक को पढ़ने के बजाय क़िस्मत के भरोसे ही बैठे होते), वे ऐसे समझदार लोग होंगे जो यह सीख लेंगे कि बड़ी सोच के सहारे खुद को सफलता के रास्ते पर किस तरह ले जाया जा सकता है।
----
अंदर चले जाएँ। सफलता का दरवाज़ा आज पहले की तुलना में ज़्यादा खुला हुआ है। यह ठान लें कि आप भी सफल लोगों के समूह में शामिल होना चाहते हैं, आप भी अपनी मनचाही चीज़ हासिल करना चाहते हैं।
सफलता की तरफ़ यह आपका पहला क़दम होगा। यह एक मूलभूत क़दम है। इस क़दम को उठाए बिना काम नहीं चलेगा। क़दम एक- खुद में विश्वास करें, विश्वास करें कि आप सफल हो सकते हैं।
विश्वास की शक्ति को किस तरह विकसित करें
विश्वास की शक्ति को प्राप्त करने और विश्वास को दृढ़ बनाने के लिए तीन उपाय किए जा सकते हैं:
1-) सफलता की बात सोचें, असफलता की बात न सोचें। नौकरी में, घर में, असफलता की जगह सफलता के बारे में सोचें। जब आपके सामने कोई कठिन परिस्थिति आए, तो सोचें "मैं जीत जाऊँगा," यह न सोचें "शायद मैं हार जाऊँगा।" जब आप किसी से प्रतियोगिता करें, तो सोचें, "मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ", यह न सोचें "मैं उसके जितना योग्य नहीं हूँ।" जब अवसर नज़र आए, तो सोचें "मैं यह कर सकता हूँ," यह न सोचें "मैं इसे नहीं कर सकता।" अपनी चिंतन प्रक्रिया पर इस विचार को हावी हो जाने दें, "मैं सफल होकर दिखाऊँगा।" सफलता के बारे में सोचने से आपका दिमाग़ ऐसी योजना बना लेता है जिससे आपको सफलता मिलती है। असफलता के बारे में सोचने से इसका ठीक उल्टा होता है। असफलता के बारे में चिंतन करने से आपका दिमाग़ ऐसे विचार सोचता है, जिन से आपको असफलता हाथ लगती है।
2. अपने आपको बार-बार याद दिलाएँ कि आप जितना समझते हैं, आप उससे कहीं बेहतर हैं। सफल लोग सुपरमैन नहीं होते। सफलता के लिए सुपर-इन्टेलेक्ट का होना ज़रूरी नहीं है। न ही सफलता के लिए किसी जादुई शक्ति या रहस्यमयी तत्व की आवश्यकता होती है।
और सफलता का भाग्य से भी कोई संबंध नहीं होता। सफल लोग साधारण लोग ही होते हैं, पर ऐसे लोग होते हैं ते हैं जिन्हें अपने आप पर विश्वास है, अपनी क्षमताओं पर विश्वास है और जो मानते हैं कि वे सफल हो सकते हैं। कभी भी, हाँ, कभी भी, खुद को सस्ते में न बेचें।
3. बड़ी सोच में विश्वास करें। आपकी सफलता का आकार कितना बड़ा होगा, यह आपके विश्वास के आकार से तय होगा। अगर आपके लक्ष्य छोटे होंगे, तो आपकी उपलब्धियों भी छोटी होंगी। अगर आपके लक्ष्य बड़े होंगे, तो आपकी सफलता भी बड़ी होगी। एक बात कभी न भूलें। बड़े विचार और बड़ी योजनाएँ अक्सर छोटे विचारों और छोटी योजनाओं से आसान होते हैं।
जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के चेयरमैन राल्फ जे. कॉर्डिनर ने लीडरशिप कॉन्फ्रेंस में कहा था, "... जो भी लीडर बनना चाहता है, उसे स्वयं के और स्वयं की कंपनी के विकास की योजना बना लेनी चाहिए और इसका दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिए। कोई भी किसी दूसरे व्यक्ति के विकास का आदेश नहीं दे सकता कोई व्यक्ति दौड़ में आगे रहेगा या पीछे रह जाएगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी तैयारी कैसी है। यह ऐसी चीज़ है जिस में समय लगता है, मेहनत लगती है और इस में त्याग की आवश्यकता होती है। आपके लिए यह कोई दूसरा नहीं कर सकता।"
मिस्टर कॉर्डिनर की सलाह में दम है और यह व्यावहारिक है। इस पर चलें। जो लोग बिज़नेस मैनेजमेंट, सेल्स लाइन, इंजीनियरिंग, धार्मिक संस्थाओं, लेखन, अभिनय और दूसरे क्षेत्रों में चोटी पर पहुँचते हैं. वे निष्ठा और लगन के साथ आत्म-विकास की योजना पर चलकर ही वहाँ पहुँच पाए हैं।
किसी भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में और यही इस पुस्तक का लक्ष्य भी है- तीन बातें होनी चाहिए। इसमें सामग्री होनी चाहिए यानी क्या किया जाए। दूसरी बात यह कि इसमें तरीक़ा होना चाहिए यानी कैसे किया जाए। और तीसरी बात यह कि इसे एसिड टेस्ट में खरा उतरना चाहिए - यानी कि इससे परिणाम मिलना चाहिए।
क्या किया जाए, इस बारे में सफलता का आपका व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम सफल लोगों के रवैए और तकनीकों के अध्ययन से संबंधित है। वे किस तरह स्वयं को सफल बनाते हैं? ये किस तरह बाधाओं का सामना करते हैं और उन्हें पार करते हैं? वे किस तरह दूसरों का सम्मान प्राप्त करते हैं? कौन सी चीज़ है जो उन्हें साधारण लोगों से अलग करती है? सफल लोग किस तरह सोचते हैं ?
आत्म-विकास कैसे किया जाए, वाला हिस्सा आपकी कार्ययोजना बनाएगा। यह हर अध्याय में मिलेगा। इससे काम को दिशा मिलती है। इस पर अमल करें और इसके परिणामों को स्वयं महसूस करें।
और इस पुस्तक में इस प्रशिक्षण के सबसे महत्वपूर्ण भाग यानी कि परिणामों पर भी ध्यान दिया गया है। यहाँ पर जो कार्यक्रम दिया जा रहा है, अगर आप उसे अमल में लाते हैं तो आपको ऐसी सफलता मिलेगी और इतने बड़े पैमाने पर मिलेगी जिसकी आपने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी। सफलता के आपके व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम में आपको कई लाभ होंगे- आपका परिवार आपका ज़्यादा सम्मान करने लगेगा, आपके मित्र और आपके सहयोगी आपकी प्रशंसा करने लगेंगे, आप अधिक उपयोगी होंगे, आपके पास प्रतिष्ठा होगी, लोकप्रियता होगी, ज़्यादा तनख्वाह होगी और आप बेहतर जीवनशैली का आनंद ले पाएँगे।
अपने को सिखाने का ज़िम्मा आप ही का है। कोई दूसरा व्यक्ति आपके सिर पर खड़ा रहकर आपको यह नहीं बताएगा कि आपको क्या करना है और कैसे करना है। यह पुस्तक आपको रास्ता दिखाएगी, परंतु आप और केवल आप ही स्वयं को समझ सकते हैं।
केवल आप ही स्वयं को यह आदेश दे सकते हैं कि आप इस पुस्तक में दिए गए सिद्धांतों पर चलेंगे। केवल आप ही अपनी प्रगति का मूल्यांकन कर सकते हैं। जब आप अपने रास्ते से थोड़ा सा भटक जाएँ, तो केवल आप ही अपनी ग़लती सुधारकर सही रास्ते पर आ सकते हैं। सौ बात की एक बात, आपको ही स्वयं को इस योग्य बनाना है कि आप बड़ी से बड़ी सफलता प्राप्त कर सकें।
आपके पास पहले से ही एक ऐसी प्रयोगशाला है जिसमें आप काम करते हैं और अध्ययन करते हैं। आपकी प्रयोगशाला आपके आस-पास ही है। आपकी प्रयोगशाला में इंसान रहते हैं। इस प्रयोगशाला में मानवीय कार्यों के हर तरह के उदाहरण हैं। अगर आप अपनी इस प्रयोगशाला विश्वास करें कि आप सफल हो सकते हैं और आप हो जाएँगे 37
में स्वयं को वैज्ञानिक समझ लें तो आप बहुत कुछ सीख सकते हैं। और इससे भी बड़ी बात यह कि यहाँ आपको कुछ ख़रीदना नहीं पड़ता। इसका कोई किराया नहीं देना पड़ता। यहाँ किसी तरह की फ़ीस नहीं लगती। आप इस प्रयोगशाला का उपयोग मुफ़्त में कर सकते हैं।
अपनी प्रयोगशाला के डायरेक्टर के रूप में, आपको वही करना होगा जो हर वैज्ञानिक करता है- आपको अवलोकन और प्रयोग करना होगा।
क्या आपको इस बात से हैरानी नहीं होती कि हमारे चारों तरफ़ ज़िंदगी भर इतने सारे लोग रहते हैं, फिर भी ज़्यादातर लोग यह नहीं जान पाते कि इंसान के व्यवहार के पीछे क्या कारण होते हैं? ज़्यादातर लोग यह जानते ही नहीं कि अवलोकन कैसे किया जाता है। इस पुस्तक का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य आपको यह सिखाना भी है कि आप अवलोकन कैसे करें, इंसान के कामों के पीछे छुपे कारणों को किस तरह समझें। आप स्वयं से यह सवाल पूछ सकते हैं, "ऐसा क्यों है कि जॉन इतना सफल है, जबकि टॉम सिर्फ़ दिन काट रहा है?" "कुछ लोगों के इतने सारे दोस्त क्यों होते हैं, जबकि कई लोगों के बहुत कम दोस्त क्यों होते हैं?" "लोग एक व्यक्ति की कही बातों पर विश्वास क्यों कर लेते हैं, जबकि वे किसी दूसरे व्यक्ति की कही हुई उसी बात पर विश्वास क्यों नहीं करते ?"
एक बार आप प्रशिक्षित हो जाएँ, तो आपको केवल अवलोकन करने की आसान प्रक्रिया से ही बहुमूल्य सबक़ सीखने को मिलेंगे।
यहाँ दो विशेष सुझाव दिए गए हैं, जिनके माध्यम से आप अवलोकन की कला सीख सकते हैं। आप अपने आस-पास के दो सबसे सफल और सबसे असफल लोगों को अध्ययन के लिए चुनें। फिर, जैसे-जैसे आप यह पुस्तक पढ़ते जाएँ, यह देखें कि आपका सफल मित्र किस तरह सफलता के इन सिद्धांतों पर चलता है। यह भी देखें कि इस तरह के दोनों लोगों के अध्ययन से आप स्वयं इस पुस्तक में दिए गए सिद्धांतों की सच्चाई को परख सकेंगे।
दूसरे व्यक्ति के साथ किसी भी तरह के संपर्क में आपको सफलता के सिद्धांत आज़माने का मौक़ा मिलता है। आपका लक्ष्य यह होना चाहिए कि आप सफलता की कार्ययोजना बनाने की आदत डाल लें। हम जितना ज़्यादा अभ्यास करेंगे, हम उतनी ही जल्दी सफल होंगे।
हममें से ज़्यादातर लोगों के ऐसे दोस्त होते हैं जिन्हें गार्डनिंग का शौक़ होता है। और हम सब ने इस तरह की बातें सुनी हैं, "पौधों को बढ़ते हुए देखना कितना रोमांचक होता है। किस तरह खाद-पानी से वे तेज़ी से बढ़ते हैं। पिछले सप्ताह वे जितने बड़े थे, आज वे उस से कितने ज़्यादा बड़े हो गए हैं।"
निश्चित रूप से, जब आदमी सावधानी से प्रकृति के साथ समन्वय कर लेता है तो इसके परिणाम रोमांचक होते हैं। परंतु अगर आप सावधानी से विचार-मैनेजमेंट कार्यक्रम पर चलेंगे, तो इसके परिणाम उससे दस गुना अधिक रोमांचक होंगे। यह देखना सुखद होगा कि आप हर महीने, हर दिन ज़्यादा आत्मविश्वासी, ज़्यादा प्रभावशाली, ज़्यादा सफल बनते जाएँ। जीवन में कोई दूसरी चीज़ आपको इतनी संतुष्टि नहीं दे सकती, जितना यह जानना कि आप सफलता और उपलब्धि की सही राह पर चल रहे हैं। और इस राह पर चलने के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि आप अपनी क्षमताओं का अधिकतम लाभ उठाएँ।
---------
और दोस्तो ये था आज का चैप्टर
और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
और आप खुश रहें, स्वस्थ रहें, आबाद रहें, आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत
------
Reviewed by Shiv Rana RCM
on
अप्रैल 28, 2026
Rating:


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें