भूमिका - Secrets of Leadership - प्रदीप ठाकुर - की ऑडियो बुक- #Audio #Book- सीक्रेट्स ऑफ लीडरशिप ------- सीक्रेट्स ऑफ लीडरशिप - की ऑडियो बुक- Secrets of Leadership - #Audio #Book - Pardeep Thakur - ----- कैसे बनाएँ खुद को सफल नेतृत्वकर्ता - How to make yourself a successful leader - ------- By : प्रदीप ठाकुर - - Writer : Pardeep Thakur
भूमिका - Secrets of
Leadership - प्रदीप ठाकुर
- की ऑडियो बुक- #Audio #Book- सीक्रेट्स ऑफ लीडरशिप
-------
सीक्रेट्स ऑफ लीडरशिप - की ऑडियो बुक- Secrets
of Leadership - #Audio
#Book - Pardeep Thakur -
-----
कैसे बनाएँ खुद को सफल नेतृत्वकर्ता - How
to make yourself a successful leader -
-------
By : प्रदीप ठाकुर - - Writer : Pardeep Thakur
-----------
-----------
https://www.youtube.com/@shivavoicelibrary
------------------------------------------------
https://www.facebook.com/profile.php?id=61582814052126
------------------------------------------------
https://www.facebook.com/profile.php?id=61585805794623
------------------------------------------------
https://www.instagram.com/shivavoicelibrary/
------------------------------------------------
https://shivabooklibrary.blogspot.com/
--
Secrets of Leadership - प्रदीप ठाकुर -
---
भूमिका
---
कार्य समूह (टीम) के
बिना नेतृत्वकर्ता का कोई अस्तित्व नहीं है। दोनों एक साथ मिलकर समूह के भीतर पारस्परिक
संबंध की रचना करते हैं और समूह की सफलता इस बात निर्भर करती है कि दोनों नेतृत्वकर्ता
व कार्य-समूह कैसे एक साथ मिलकर काम कर पाते हैं लेकिन ऐसा तब हो पाता है, जब कार्यस्थल
में नेतृत्वकर्ता व कार्यकर्ता के बीच का अस्वाभाविक असुरक्षा भाव खत्म हो जाता है
और स्वाभाविक मानवीय सुरक्षा-चक्र (ह्यूमन सेफ्टी सर्किल) का निर्माण होता है। फिर
कार्य-समूह के सदस्य एक-दूसरे पर भरोसा करने लगते हैं, उनके बीच आपसी सहानुभूति बढ़ती
है, वे एक-दूसरे के लिए कुछ करने को तैयार हो जाते हैं और उनके लिए कोई भी लक्ष्य असंभव
नहीं रह पाता है। यही है नेतृत्व का मानव-विज्ञान।
मानव जाति का ज्ञात
इतिहास साबित करता है कि मनुष्य का लगभग हर कुछ इस तरह से बनाया गया है कि वह कठिन-से-कठिन
परिस्थितियों में भी खुद को जीवित रखने के साथ-साथ अपनी प्रजाति को भी आगे बढ़ा पाने
में सफल हो सके। हमारा शरीर-क्रिया विज्ञान व एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत, दोनों
हमारे अस्तित्व के साथ ही हमारे मस्तिष्क में मौजूद हैं। यही कारण है कि जब एक साथ
मिलकर किसी खतरे का सामना करते हैं तो हमारे कार्य-प्रदर्शन की क्षमता अपने उच्चतम
स्तर पर चली जाती है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज की निगमित कंपनियों के अधिकतर नेतृत्वकर्ता
अपने कार्य-समूहों को बाहरी चुनौतियों से मुकाबले के लिए उत्साहित बनाए रखने के लिए
आंतरिक रूप से कार्यस्थल में भी हमेशा आपात स्थिति बनाए रखते हैं और वे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
के नाम पर आपसी प्रतिद्वंद्विता को हवा देते हैं, लेकिन जीव विज्ञान (बायोलॉजी) व मानव
विज्ञान (एंथ्रोपोलॉजी) बताता है कि प्रतिद्वंद्विता हमारी स्वाभाविक सामूहिक-कार्य
भावना को नुकसान पहुँचाती है।
यह बहुत ही
उदात्त विचार है कि हम सभी एक-दूसरे के बराबर
रहें। न कोई कम, और न कोई ज्यादा। लेकिन तथ्य यही है कि हम कभी भी एक-दूसरे के बराबर
नहीं रहे हैं, न अभी हैं और न कभी भी रह सकेंगे। इसके भी तार्किक कारण हैं। जरा सोचिए,
हजारों वर्ष पहले जब पाषण युग में हमारे पूर्वज कंदराओं में रहते थे और शिकार से अपना
पेट भरते थे, तब यदि कोई विधि-नियम (रूल ऑफ लॉ) न होता तो क्या होता? जब वे लोग नए
शिकार को लेकर अपनी जनजाति में लौटते तो हर कोई खाने के लिए दौड़ पड़ता; उन लोगों के
बीच जमकर धक्कामुक्की होती; जो लंबे-तगड़े होते, उन्हें ही सबसे पहले खाने को मिलता
और अपेक्षाकृत छोटे कदवाले कुशल शिकारियों को लगातार पीछे धकेल दिया जाता, शायद उनके
खाने के लिए कुछ बचता ही नहीं। फिर मानव सभ्यता ही विकसित नहीं हो पाती, और हम नेतृत्व
की अनिवार्यता पर चर्चा भी नहीं कर रहे होते।
तो आज के असंतुलित युग
में नेतृत्वकर्ताओं की सबसे बड़ी चुनौती है कि वे मनुष्य को संख्या मानकर फैसले लेने
से बचें। हमेशा याद रखें कि मनुष्य मनुष्य ही होता है, संख्या नहीं। सामाजिक प्राणी
के रूप में जब हम एक-दूसरे पर भरोसा कर आपसी सहयोग से काम करते हैं तो सबसे अधिक उत्पादक
साबित होते हैं और जब नेतृत्वकर्ता की सत्यनिष्ठा प्रमाणित हो जाती है तो कार्यस्थलों
में सुरक्षा-चक्र का निर्माण होता है, आपसी भरोसे व सहयोग का वातावरण कायम होता है
और फिर उत्पादकता भी बढ़ती है।
मुझे विश्वास है कि
यह पुस्तक आप सभी सुधी पाठकों को अपनी दुविधाओं को दूर कर सफल नेतृत्वकर्ता बनाने में
मददगार साबित होगी। - प्रदीप ठाकुर
---
और दोस्तो ये था आज
का चैपटर -
और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
आप हमेशा खुश रहें, आबाद रहें, स्वस्थ रहें,
और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत
------
Reviewed by Shiv Rana RCM
on
जून 14, 2026
Rating:


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें