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मस्तिष्क ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है - आपके अवचेतन मन की शक्ति- "Power of your subconscious mind" - Dr. Joseph Murphy - डा. जोसेफ़े मर्फी --- आपके अवचेतन मन की शक्ति - Power of your subconscious mind -- The international bestseller "Power of your subconscious mind" -- Writer : Dr. Joseph Murphy - लेखक : डा. जोसेफ़े मर्फी

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मस्तिष्क ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है -  आपके अवचेतन मन की शक्ति- "Power of your subconscious mind" - Dr. Joseph Murphy - डा. जोसेफ़े मर्फी

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आपके अवचेतन मन की शक्ति - Power of your subconscious mind

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The international bestseller "Power of your subconscious mind"

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Writer : Dr. Joseph Murphy - लेखक : डा. जोसेफ़े मर्फी

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मस्तिष्क ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है

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आपका मस्तिष्क ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है क्योंकि यह हमेशा आपके साथ है। लेकिन आपको इसका उपयोग कैसे करना है, यह सीखना चाहिए। आपके मस्तिष्क के दो पहलू हैं। पहला चेतन अथवा तर्क करने वाला स्तर और दूसरा अवचेतन अर्थात तर्क हीन का स्तर । आप अपने चेतन मस्तिष्क में सोचते हैं, और अपनी आदत अभ्यास के अनुशार जो भी आप सोचते हैं वह आपके अवचेतन मन में बस जाता है और आपकी सोच की प्रकृति के अनुसार उसकी रचना करता है। आपका अवचेतन मन आपकी भावनाओं का रचनात्मक स्थान है। अच्छा सोचने पर आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे और बुरा सोचने पर बुरे परिणाम मिलेंगे। आपका मस्तिष्क इसी तरह कार्य करना है।

 

यह याद रखने योग्य एकमात्र मुख्य बिंदु है, एक बार जब अवचेतन मन किसी विचार को स्वीकार कर लेता है, तो वह तुरंत इस पर काम करने लगता है। यह एक बहुत दिलचस्प और गूढ़ सत्य है कि अवचेतन मस्तिष्क के नियम अच्छे और बुरे पर एक तरह से काम करते हैं। यह नियम जब नकारात्मक ढंग से प्रयोग में लाया जाता है, तब यह पराजय, हताशा और दुःख का कारण बनता है लेकिन जब आपके सोचने की प्रकृति सामंजस्यपूर्ण और रचनात्मक होती है, तब आप एक उत्तम स्वास्थ्य सफलता और समृद्धि का अनुभव कर पाते हैं। सही तरीके से सोचने से आपको मानसिक शांति और स्वस्थ शरीर मिलते हैं। जब आप सही दिशा में सोचते हैं और अनुभव करते हैं, जिस चीज की आप मानसिक रूप से चाहत और सोच रखेंगे, आपका अवचेतन मन उसे स्वीकार कर आपके अनुभव को साकार करता है। जरूरी बात केवल यह है कि आपको अपने अवचेतन मस्तिष्क का विचार स्वीकार करना होगा, फिर आपका अवचेतन मन का नियम आपकी मनचाही सेहत, शांति और समृद्धि उत्पन्न करना शुरू कर देगा। आपके आदेश देते ही आपके अवचेतन मन पर छोड़ी गई वैचारिक छाप को साकार करने के लिए भी निष्ठा से काम करना शुरू कर देता है।

 

आपके मस्तिष्क का नियम अवचेतन मन की प्रतिक्रिया मन में रखे गए विचार की प्रकृति से तय होती है। मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि जब विचार आपके अवचेतन मन को दिए जाते हैं, तब वे मस्तिष्क की कोशिकाओं में छाप छोड़ जाते हैं। अवचेतन मन एक बार किसी विचार को स्वीकार कर लेता है, तो वह उसे साकार करने में लग जाता है। विचारों के साहचर्य के अनुसार काम करके यह अपने लक्ष्य को साकार करने के लिए ज्ञान के उस हर हिस्से का इस्तेमाल करता है, जो आपने जिंदगी भर इकट्ठा किया है। यह आपके भीतर की असीमित शक्ति, ऊर्जा और वृद्धि का इस्तेमाल करता है। परिणाम पाने के लिए यह प्रकृति के सभी नियमों का इस्तेमाल करता है। कभी-कभी यह आपकी परेशानियों को तुरंत हल कर देता है, लेकिन कभी-कभी इसे कई दिन हफ्ते अथवा इससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इसके हल निकालने के कई तरीके हैं।

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आपके चेतन और अवचेतन में भिन्नताएं

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आपको याद रखना होगा कि आपके चेतन और अवचेतन दो मस्तिष्क नही हैं, बल्कि एक ही मस्तिष्क में होने वाली गतिविधियों के दो क्षेत्र हैं। आपका चेतन मस्तिष्क तर्क करने वाला मस्तिष्क है। यह मस्तिष्क का वह हिस्सा है. जो विकल्प चुनता है। उदाहरण के लिए, आप अपनी पुस्तकें, अपना घर और अपना जीवन साथी चुनते हैं, यह सब निर्णय आप अपने जागृत अथवा चेतन मस्तिष्क से करते हैं। दूसरी ओर, आपके सचेतन चुनाव के बिना ही आपका हृदय अपने आप काम करता है और पाचन, रक्त संचार तथा सांस लेने की अनिवार्य प्रतिक्रियाएं चलती रहती हैं। ये सारे काम आपका अवचेतन मन करता है। इन प्रतिक्रियाओं पर आपके चेतन मन का कोई नियंत्रण नहीं होता।

 

आपका अवचेतन मस्तिष्क वही स्वीकार करता है, जो इसको कहा गया हो अथवा जिस पर आप अपनी समझ के अनुसार विश्वास करते हैं। यह आपके चेतन मन की तरह तर्क नहीं करता है या बहस नहीं करता है। आपका अवचेतन मस्तिष्क, भूमि की तरह है, जो हर प्रकार के सही अथवा खराब बीज स्वीकारती है, चाहे वह अच्छा हो या बुरा। आपके विचार सक्रिय हैं। वे बीज हैं। नकारात्मक या बिध्वंसात्मक विचार आपके अवचेतन मन में नकारात्मक रूप से काम करते हैं। देर-सबेर वे प्रकट हो जाएंगे और अपने अनुरूप किसी नकारात्मक घटना को उत्पन्न कर देंगे।

 

याद रखें, आपका अवचेतन मस्तिष्क इस बात को सिद्ध करने में नहीं लगा रहता है कि आपके विचार अच्छे या बुरे, सच्चे या झूठे हैं, लेकिन यह अपने विचारों अथवा सुझावों के अनुरूप अपनी प्रतिक्रिया देता है। उदाहरण के रूप में, यदि आप किसी चीज को जान बूझकर सत्य समझते हैं, चाहे वह झूठ ही क्यों न हो, आपका अवचेतन मस्तिष्क इसको सत्य मानकर उसके अनुरूप परिणाम देने लगेगा, क्योकि आपने चेतन रूप से इसे सच मान लिया था।

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मनोचिकित्सकों के प्रयोग

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मनोचिकित्सकों और अन्य वैज्ञानिकों ने बहुत से सम्मोहित लोगों पर प्रयोग किए है। उसमें उन्होंने पाया कि अवचेतन मस्तिष्क चुनाव अथवा तुलना करने में सक्षम है, जो किसी भी तार्किक प्रतिक्रिया के लिए जरूरी है। इस पक्ष को उन्होंने कई बार दिखाया कि अवचेतन मस्तिष्क किसी भी सुझाव को स्वीकार कर लेता है। चाहे वह असत्य ही क्यों न हो। सुझाव मानने के बाद यह उसकी प्रकृति के अनुसार प्रतिक्रिया करेगा। अवचेतन मन के डॉक-2026... विधा को समझने के लिए यदि कोई अनुभवी सम्मोहन अपने किसी सम्मोहित व्यक्ति को सुझाव देता है कि वह या कुत्ता या बिल्ली है, तो वह व्यक्ति पूरी गंभीरता नभाने लगेगा। कुछ समय के लिए उसका पूरा व्यक्तित्व अपने उसी रूप पर विश्वास करता है, जिसका सुझाव उसे सम्मोहन विशेषज्ञ ने दिया है।

 

ये साधारण उदाहरण आपके चेतन तार्किक मस्तिष्क और आपके अवचेतन मस्तिष्क के अंतर को साफ-साफ दर्शाते हैं। अवचेतन मस्तिष्क, जो अवैयक्तिक, चुनाव न करने वाला है और जो कुछ चेतन मस्तिष्क कहता है उसे सत्य समझता है। इसलिए यह महत्त्वूर्ण है कि आप ऐसे विचार और आधार वाक्य चुनें, जो सुख पहुंचाएं, आपका उपचार करें और आपकी आत्मा को खुशी से भरें।

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यथार्थवादी और कल्पनावादी मन की कार्यवाही

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चेतन मन को कई बार यथार्थवादी मन कहा जाता है, क्योंकि इसका संबंध बाहरी वस्तुओं से होता है। यथार्थवादी मन बाहरी विश्व के प्रति जागरूक रहता है। इसका निरीक्षण करने का माध्यम आपकी पांच भौतिक इंद्रियां हैं। आपका यथार्थवादी मन आपके वातावरण के साथ संपर्क कराने में आपका मार्गदर्शन और निर्देशक है। आप अपनी इन पांच इंद्रियों के द्वारा ज्ञान प्राप्त करते हैं। यथार्थवादी मन अवलोकन, अनुभव और शिक्षा से सीखता है, क्योंकि यथार्थवादी मन का सबसे बड़ा कार्य तर्क करना है। मान लीजिए कि आप हर वर्ष न्यूयार्क आने वाले उन हजारों-लाखों पर्यटकों में से एक हैं। आप इसके पार्कों, खूबसूरत बगीचों, विशाल अट्टालिकाओं और सुंदर घरों को देख कर इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि यह एक खूबसूरत शहर है। यही आपके यथार्थवादी मन का काम भी है।

 

अक्सर आपके अवचेतन मन को कल्पनावादी मन भी कहा जाता है। आपका कल्पनावादी मन अपने माहौल के प्रति जागरूक तो होता है, लेकिन शारीरिक, इंद्रियों के माध्यम से नहीं। आपका अवचेतन मन आंतरिक ज्ञान से महसूस करता है क्योंकि इसमें ही भावनाओं और यादों का भंडार है। आपका कल्पनावादी मन सबसे उच्च स्तरीय कार्य तक करता है, जबकि आपकी यथार्थवादी इंद्रियां अपना काम नहीं करती हैं। अर्थात जब यथार्थवादी मन शिथिल हो, तब कल्पनावादी बुद्धि सबसे अच्छी तरह काम करती है। आपका कल्पनावादी मन बिना किसी प्राकृतिक रूप देखने वाले अंगों को देखता है। यह एक प्रकार से अतीन्द्रिय क्षमता है, जो आपसे जुड़ी घटनाओं को महसूस कर सकती है।

 

आपका कल्पनावादी मन आँखों की इंद्रियों के बिना देखता है। यह अतीन्द्रिय क्षमता है। यह कहीं और हो रही घटनाओं को देख व सुन सकता है। आपका कल्पनावादी मन दूर देशों की यात्रा कर सकता है और अक्सर बहुत सटीक तथा सच्ची जानकारी ला सकता है। कल्पनावादी मन के माध्यम से आप दूसरों के विचार जान सकते हैं, बंद चिट्ठियों के मज़मूम पढ़ सकते हैं, या कम्प्यूटर डिस्क पर डिस्क ड्राइव के प्रयोग के बिना जानकारी भांप सकते हैं। यदि आपने यथार्थवादी और कल्पनावादी मन की आपसी कार्यविधि को समझ लिया, तो आप प्रार्थना की सच्ची कला सीखने की बेहतर स्थिति में पहुंच जाते हैं।

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अवचेतन मन चेतन मन की तरह तर्क नहीं कर सकता

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आप अपने अवचेतन मन को कुछ भी संदेश दें, उसमें बहस या विरोध-करने की क्षमता नहीं होती। यदि आप इसे गलत सुझाव देंगे, तो यह सत्य की भाति स्वीकारेगा और उसे परिस्थितियों, अनुभवों और घटनाओं की तरह आगे बढ़ायेगा। आपके साथ जो भी होता है, वह इसलिए भी होता है, क्योंकि आपने विश्वास के माध्यम से अपने अवचेतन मन पर उसकी छाप छोड़ी है। अगर आपने गलत संप्रेषण किया है या अपने अवचेतन मन तर्क विकृति अवध ारणाएं पहुंचाई हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द सुधारना सबसे महत्वपूर्ण है। इसे सुधारने का सबसे अच्छा तरीका अपने अवचेतन मन को लगातार सृजनात्मक और सद्भावनापूर्ण विचार प्रसारित करते रहना महत्वपूर्ण है। बार-बार दोहराने पर आपका अवचेतन मन इन्हें स्वीकार कर लेता है। यहीं से आप अपने जीवन में नई तथा ज्यादा अच्छी आदतें डाल सकते हैं। क्योंकि आपका अवचेतन मन आदत का स्थान है।

 

आपके चेतन मन के आदतन विचार आपके अवचेतन मन में गहरे रूप में अपनी जडे बनाए हुए होते हैं। यदि आपने अपने विचारों में सद्भावनापूण् शांति और सृजनात्मक रुख आख्तियार किया है. तो आपका अवचेतन मन प्रतिक्रिया करते हुए सद्भाव, शांति और सृजनात्मक परिस्थितियां उत्पन्न करेगा। यदि आप डर, चिंता और अन्य प्रकार की विनाशक सोच के शिकार हैं, तो इसका इलाज है, अपने अवचेतन मन की शक्ति को पहचानकर उसे स्वतंत्रता, खुशी और संपूर्ण स्वास्थ्य के संदेश देना शुरू कर दें। आपका अवचेतन मन रचनात्मक और देवी स्रोत के साथ एकरूप है। यह आपकी हार्दिक इच्छानुसार आपके लिए आज़ादी और खुशियां लाने की तैयारी में लग जाएगा।

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आपका चेतन मन 'द्वारपाल' की तरह काम करता है

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हमने अब तक जिन बातों पर विचार किया है, उसमें आप देख सकते हैं कि आपका चेतन मन 'द्वारपाल' की तरह काम करता है। इसका एक बहुत महत्वपूर्ण कार्य गलत सुझावों से आपके अवचेतन मन की रक्षा करना है। यह मस्तिष्क के मूलभूत नियम पर आधारित है कि आपका अवचेतन मन सुझाव के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। जैसा आप जानते हैं, आपका अवचेतन मन तुलना या विरोध नहीं कर सकता है यह तर्क-वितर्क नहीं कर सकता हैं और स्वयं कुछ भी नहीं सोच सकता है। ये सभी काम चेतन मन के हैं। अवचेतन मन केवल चेतन मन द्वारा छोड़ी गई छाप पर प्रतिक्रिया देता है। यह किसी प्रकार से एक कार्य को दूसरे कार्य से बेहतर या कमतर नहीं आंकता।

 

सुझाव में बहुत बड़ी शक्ति होती है। कल्पना करें कि आप किसी ऐसे जहाज पर हैं, जो थोड़ा हिल रहा है। आप एक भयभीत सहयात्री के पास जाकर कहते हैं- "आपकी हालत अच्छी नहीं लग रही है। आपका चेहरा बिल्कुल पीला लग रहा है। आपको देखकर लगता है कि आपको समुद्री यात्रा में होने वाली मतली हो सकती है क्या मैं आपको केबिन तक पहुंचा दूं?"

 

आपकी बात सुन कर यात्री का चेहरा पीला पड़ जाता है। आपने मतली के बारे में उसे सुझाव अभी-अभी दिया है, वह उसके खुद के डर और आशंका से मेल खाता है। वह आपकी मदद लेकर केबिन में डेक से नीचे अपने कबिन में जरूर पहुंच जाता है, लेकिन वहां पहुंचने पर आपका नकारात्मक सुझाव, जिसे उसने सही मान लिया था वह हो जाता है।

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सुझाव एक प्रतिक्रिया अनेक

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हमारे लिए यह समझना अति आवश्यक है कि एक ही सुझाव पर भिन्न-भिन्न मनुष्य भिन्न-भिन्न तरीके से प्रतिक्रियाएं देंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि उनके विश्वास या अवचेतन की कंडीशनिंग अलग-अलग होती है। मान लें, आप अपने सहयात्री की जगह किसी अन्य जहाजी के पास जा कर कहते हैं, हैलो, आपकी हालत ठीक नहीं दिख रही है। कहीं आपको समुद्री यात्रा के कारण मलती तो नहीं आने वाली है?" यह जहाजी के मिजाज पर निर्भर करता है कि वह आपके लचर मजाक पर हंसे या आपको वहां से दफा होने को कह दे। आपके सुझाव का उस पर कोई असर नहीं हुआ, क्योंकि उसके मन में यह विश्वास है, कि समुद्री यात्रा में उसे कभी मलती नहीं हो सकती। उसे जरा भी भय, महसूस नहीं होगा, बल्कि आत्मविश्वास सामने आएगा।

 

शब्दकोष के अनुसार सुझाव एक ऐसा कृत्य अथवा उदाहरण है, जो आप किसी दूसरे के दिमाग में डालते हैं। एक मानसिक प्रक्रिया जिसमें विचार या सोच जिसका सुझाव दिया गया उसे स्वीकार कर कार्यान्वित किया। आपको याद रखना होगा कि कोई भी सुझाव अवचेतन मन में नहीं थोपा जा सकता। जब तक चेतन मन इसके लिए सहमत न हो। जहाजी के समुद्री यात्रा के कारण मलती का कोई डर नहीं था। उसे पूरा भरोसा था कि वह इससे सुरक्षित है, इसलिए नकारात्मक सुझाव में उसे डराने की शक्ति नहीं थी, लेकिन आपकी सहयात्री पहले से बीमार होने के बारे में चिंतित थी। इसलिए आपके सुझाव के अनुरूप परिस्थितियां बन गई।

 

प्रत्येक मनुष्य में अंदरूनी भय मान्यताएं, राय होती हैं। ये अंदरूनी मान्यताएं हमारे जीवन को नियंत्रित करनी है। सुझाव की अपनी स्वयं की कोई शक्ति नहीं होती है। इसकी शक्ति तो इस बात से उत्पन्न होती है कि आप इसे मानसिक रूप से स्वीकार कर लेते हैं। सिर्फ तभी आपकी अवचेतन शक्तियां सुझाव की प्रकृति के अनुरूप काम करती हैं।

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अवचेतन मन को सिर्फ वही सुझाव दें, जो सही हो

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कई सालों से मैं कैक्सटन हॉल में लंदन टूथ फोरम में नियमित रूप से भाषण दे रहा हूं, यह एक ऐसा मंच है, जिसकी स्थापना मैंने कई वर्ष पहले की थी निदेशक, डी. एवलीन फ्लीट मे मुझे अंग्रेजी समाचार पत्र में सुझाव की शक्ति से निपटने के बारे में बताया। यह एक व्यक्ति द्वारा दो वर्षों में अपने अवचेतन मन को दिए गए सुझाव के बारे में था। उसकी छोटी बेटी को रयूमेटॉइड आर्थराइटिस और दर्दनाक चर्मरोग सोराएसिस था। उसने बेटी को कई डॉक्टरों को दिखाया और उसका इलाज कराया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। तब वह व्यक्ति हताश होकर, स्वयं से और अपने दोस्तों से यही कहता- "मैं अपनी बेटी को ठीक करने के लिए अपना दाहिना हाथ देने को तैयार हूं।"

 

वह व्यक्ति अपनी बेटी को ठीक होने की गहरी कामना रखता था, इसीलिए उसने उसका इजहार उपरोक्त शब्दों में किया। डी-फ्लीट के अनुसार एक दिन उस व्यक्ति का परिवार सैर-सपाटे पर गया, लेकिन इसी बीच कार का एक्सीडेंट हो गया और पिता का दाहिना हाथ कंधे से अलग हो गया। अस्पताल से घर लौटने पर उसने पाया कि उसकी बेटी का आर्थराइटिस और चर्मरोग बिल्कुल ठीक हो गया था। आपको इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि आप अपने अवचेतन मन को केवल उस प्रकार के सुझाव दें जो उपचार, आशीर्वाद, उन्नति और आपको हर प्रकार से प्रोत्साहित करे। याद रखें आपका अवचेतन मन मजाक नहीं समझता यह तो आपके शब्दों को ग्रहण करता है।

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आत्म-सुझाव

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आत्म-सुझाव का अर्थ है स्वयं को स्पष्ट और विशिष्ट सुझाव देना। प्रत्येक साधन की तरह इसके भी गलत प्रयोग से आपको हानि पहुंच सकती है, लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह आपके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। जेनेट आर एक प्रतिभावान गायिका थी। उसे ओपरा प्रोडक्शन में एक महत्वपूर्ण भूमिका के ऑडिशन के लिए जाना था। वह उच्छी ऑडिशन के लिए बेताब तो थी, लेकिन आशंकित थी। उसने पहले भी तीन बार निर्देशकों के सामने ऑडिशन दिया था, लेकिन इसमें वह बुरी तरह असफल रही, क्योंकि उसे असफल होने का भय सता रहा था। उसकी आवाज बहुत अच्छी थी, लेकिन वह खुद से कहती रही थी "जब गाने का समय आएगा, तो मैं बुरा गाऊंगी। शायद मुझे वह भूमिका कभी नहीं मिलेगी। वे मुझे पसंद नहीं करेंगे। वे सोच रहे होंगे कि मैंने फिर से करने की हिम्मत भी कैसे की। मैं ऑडिशन देने तो जाऊंगी, लेकिन मैं जानती हूं कि मैं असफल हो जाऊंगी।" उसके अवचेतन मन ने इस नकारात्मक आत्म-सुझावों को आग्रह मान लिया। अवचेतन मन इन्हें सच साबित करने में जुट गया और उन्हे परिस्थितियों में बदल दिया। क्योंकि यह अनचाहा सुझाव था। उसका डर हकीकत में बदल गया और उसके विचार सत्य हो गए।

 

आखिरकार यह युवा गायिका अपने नकारात्मक आत्म-सुझावों से से उबरने में सफल हो गई, क्योंकि उसने सकारात्मक आत्म-सुझावों से नकारात्मकता का विरोध किया वह हर दिन तीन बार एक शांत कमरे में अकेली जाती थी और एक कुर्सी पर आराम से बैठकर अपने शरीर को ढीला छोड़ कर अपनी आँखें बंद कर लेती थी। उसने अपने मस्तिष्क और शरीर को यथासंभव स्थिर करके शारीरिक निष्क्रियता, मानसिक निष्क्रियता को प्रेरित किया और मस्तिष्क को सुझाव के प्रति अधिक ग्रहणशील बना दिया। डर के सुझाव का प्रतिपाद करने के लिए वह अपने आपसे बार-बार कहती थी- "मैं बहुत अच्छा गाती हूं। मैं शांत, संतुलित आत्मविश्वासी हूं।" प्रत्येक बार वह इस कथन को धीरे-धीरे शांति से और भावना के साथ पांच से दस बार दोहराती थी। उसने दिन में कई बार यह काम किया और एक बार रात को साने से ठीक पहले भी। यह सब करने के बाद वह बहुत शांत और आत्मविश्वासी हो गई। जब निर्णायक दिन आया, तो उसने बहुत बढ़िया ऑडिसन दिया और उसे भूमिका मिल गई।

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प्रतिक्रिया को उलटने का संकल्प

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एक स्त्री थी, जिसकी उम्र पचहत्तर साल की थी। उस स्त्री की एक आदत थी। वह कहती "मेरी याद्दाश्त खो रही है।" हालांकि बाकी सबकी तरह वह भी कभी-कभार चीजें भूल जाती थी, लेकिन उसने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। लेकिन जब उसकी उम्र बढ़ने लगी, तो उसने भूलने वाले मौकों पर अधिक ध्यान देना शुरू कर दिया और उसके बारे में सोचना भी शुरू कर दिया। किसी वस्तु के भूल जाने पर वह स्वयं से कहती - 'बुढ़ापे के कारण मेरी याद्दाश्त कमजोर होती जा रही है,' तो वह रुक जाती थी। यही नहीं, वह जान-बूझकर इस प्रतिक्रिया को उलट देती थी वह दिन में कई बार सकारात्मक आत्म-सुझाव का अभ्यास करती थी। वह अपने-आपसे कहती थी- "आज से मेरी याद्दाश्त सुधर रही है। जो भी याद रखना चाहिए, वह मुझे हर पल, हर जगह, हमेशा याद रहेगा। मुझे घटनाएं स्पष्टता से याद रहेंगी। मैं जो भी याद करना चाहूंगी, वह मुझे तत्काल याद आ जाएगा। मेरे में तेजी से सुधार हो रहा है। मेरी याद्दाश्त पहले से भी बहुत जल्दी अच्छी हो जाएगी।"

इस प्रकार तीन हफ्ते में ही उसकी याद्दाश्त सामान्य हो गई।

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सकारात्मक आत्म-सुझाव का प्रयोग

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एक बार एक व्यक्ति मुझसे परामर्श लेने आया कि उसका वैवाहिकं जीवन और कैरियर दोनों ही गंभीर संकट में पड़ गए हैं। ड्यूडी की समस्या यह थी कि वह बेहद चिड़चिड़ा और गुस्सेबाज था। इसके बारे में वह बहुत चिंतित रहने लगा लेकिन जब कभी भी दूसरा उससे इस बारे में बात करने की कोशिश करता था, तो वह आग बबूला हो जाता था। वह अपने आप से कहता रहता कि हर व्यक्ति मुझे परेशान कर रहा है और मुझे उन सभी से अपनी रक्षा करनी है।

 

उसके इस नकारात्मक सुझाव को दूर करने के लिए मैंने उसे सकारात्मक आत्म-सुझाव का प्रयोग करने की सलाह दी। दिन में कई बार सुबह, दोपहर, शाम और रात को सोने से पहले स्वयं से कहता कि "आज से मैं अधिक अच्छे स्वभाव का बनने की कोशिश करूंगा। अब मेरी मनोदशा हर खुशी, सुख और खुशमिजाजी की हो रही है। हर दिन अधिक प्रेम करने के काबिल और समझदार बन रहा हूं। मैं अपने आस-पास के सभी लोगों के लिए आनंद और सद्भावना का केन्द्र रहूंगा तथा अपने अच्छे व्यवहार से उन्हें खुश कर दूंगा। यह सुखद, खुशनुमा स्वभाव अब मेरी सामान्य, सहज मानसिक स्थिति बन रही है।"

कुछ दिन बाद वह व्यक्ति सामान्य हो गया, तो उसकी पत्नी और सहकर्मी कहने लगे कि अब उसके साथ रहना बहुत अच्छा लगता है।

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सुझाव की शक्ति

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बाहरी सुझाव का मतलब है किसी दूसरे व्यक्ति के सुझाव सभी युगों और विश्व के प्रत्येक हिस्से में सुझाव की शक्ति ने मानव जीवन में महत्वपूर्ण एफ भूमिका निभाई है। राजनीतिक मान्यताएं धार्मिक आस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं बाहरी सुझाव की शक्ति की बदौलत ही फलती-फूलनी और कायम रहती हैं। सुझाव का प्रयोग स्वयं को अनुशासित करने के लिए किया जा सकता है। इसका प्रयोग दूसरों पर नियंत्रण करने के लिए भी किया जा सकता है। सृजनात्मक रूप से यह बेहतरीन नकारात्मक रूप से यह मस्तिष्क की प्रतिक्रिया के सभी प्रतिमानो में सबसे विध्वंसात्मक है। इसके परिणाम दुःख, असफलता, कष्ट, बीमारी और तबाही हो सकते हैं। क्या कभी आपने इसमें से किसी एक को भी स्वीकार किया है?

मनुष्य के पैदा होने के बाद से ही उस पर नकारात्मक सुझावों की बारिश होने लगती है, परन्तु हमें यह पता नहीं होता कि उनका विरोध कैसे करें इसलिए हम अवचेतन रूप से स्वीकार कर लेते हैं और अपने अनुभव बदल लेते हैं। एक प्रकार से हम बाहरी सुझावों को स्वीकार करके उन्हें साकार करने में सहयोग देते हैं। चूंकि हम बचपन में दूसरों के सुझावों का विरोध नहीं कर सके और इस बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं थी। हमारा मस्तिष्क और इसके चेतन तथा अवचेनन हिस्से एक रहस्य थे, जिसके बारे में हम सोच भी नहीं सकते थे, लेकिन अब हम बड़े हो चुके हैं और किसी भी सुझाव का चयन कर सकते हैं। सकारात्मक आत्म-सुझाव का प्रयोग करके अपनी परिस्थितियां दोबारा बना सकते हैं और अतीत को बदल सकते हैं।

हमें सबसे पहले उन बाहरी सुझावों के प्रति जागरूक बनना पड़ेगा, जो पहले से ही काम कर रहे हैं। यदि इसकी जांच न की जाए, तो वे व्यवहार के ऐसे संस्कार डाल सकते हैं, जो आपको व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में असफल बना देंगे। सृजनात्मक आत्म-सुझाव नकारात्मक परिस्थितियों से स्वतंत्र कर सकता है। अगर ऐसा न हुआ, तो नकारात्मक परिस्थितियां आपके जीवन को विकृत कर देंगी और अच्छी आदतों के विकास को मुश्किल या असंभव बना देगी।

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नकारात्मक सुझावों के कुछ उदाहरण

तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।

इससे कोई फायदा नहीं होगा।

तुम बिल्कुल गलत हो।

तुम कुछ नहीं कर सकते।

तुम असफल हो जाओगे।

तुम कभी कुछ नहीं कर पाओगे।

तुम्हारी उम्र अब ज्यादा हो चुकी है।

महत्वपूर्ण यह नहीं है कि तुम क्या जानते हो महत्वपूर्ण तो यह है कि तुम किसे जानते हो।

 

क्या फायदा, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।

प्रेम सिर्फ पक्षियों के लिए है।

तुम कभी नहीं जीत सकते।

स्थितियां बिगड़ती जा रही है।

विश्व रसातल को जा रहा है।

तुम्हारी सफलता की बिल्कुल संभावना नहीं है।

सावधान रहना, तुम्हे भयंकर बीमारी हो सकती है।

इतनी ज्यादा कोशिश करने से कोई फायदा नहीं है।

कोई भी भरोसे के काबिल नहीं है।

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विध्वंसात्मक विचारों का विरोध

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अखबार टी. वी. पर प्रत्येक दिन आप दर्जनों ऐसी खबरों को पढ़ेंगे, जो हताशा, भय चिंता और निराशा और आने वाले विनाश के बीज बो सकते हैं। यदि यह आपके द्वारा स्वीकार कर लिए गए हों, तो यह भय से भरी सोच आपके जीवन जीने की इच्छा को खो सकती है। यह जानते हुए कि आप अपने अवचेतन मन को रचनात्मक सुझाव दें, इस प्रकार आप सभी बिनाशकारी विचारों का विरोध कर सकते हैं। आप दूसरों के थोपे गए नकारात्मक सुझावों की जांच करते रहे। आपको इन विनाशक आत्म-सुझावों पर दया करने की जरूरत नहीं है।

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हम सभी ने बचपन और अपनी किशोरावस्था में इसकी पीड़ा सही है। यदि आप पलटकर देखें, तो आप आसानी से याद कर सकते हैं कैसे माता, पिता, दोस्तों, रिश्तेदारों और सहयोगियों ने नकारात्मक सुझावों के आंदोलन में सहयोग दिया था उनकी बातों का विश्लेषण और उनमें छिपे अर्थ पर गौर करें, तो आप पाएंगे उनमें से ज्यादातर बातें झूठी थी। उनका छिपा हुआ उद्देश्य भय पैदा करके आपको नियंत्रित करना था।

 

इस तरह के विषय सुझाव प्रतिक्रिया हर घर, ऑफिस, फैक्ट्रियों और क्लबों में चलते रहते हैं। धीरे-धीरे आपको पता चलेगा कि जाने अनजाने में सभी के सुझाव का उद्देश्य होता है कि आप वैसा ही सोचें, महसूस करें और काम करें, जैसा चाहते हैं, ताकि उन्हें फायदा पहुंचे। भले ही आपको नुकसान हो जाए।

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भविष्यवक्ता का नकारात्मक सुझाव

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मेरे दूर के एक रिश्तेदार ने भारत की एक मशहूर महिला भविष्यवक्ता से अपना भविष्य पूछा। ज्योतिषी ने उसे बताया कि उसका दिल बहुत कमजोर है और वह आने वाली अमावस्या को मर जाएगा। यह सुनकर मेरा रिश्तेदार स्तब्ध रह गया। उसने अपने परिवार के प्रत्येक व्यक्ति को यह भविष्यवाणी बता दी और अपने वकील से मिलकर वसीयत ठीक करवा ली। जब मैंने उसे उसके विश्वास से डिगाने की कोशिश की, तो उसने मुझे बताया कि उस भविष्यवक्ता में पारलौकिक शक्तियां हैं। भविष्यवक्ता लोगों का भला या बुरा कर सकती है। इसलिए उसे भविष्यवाणी की सच्चाई पर पूरा भरोसा था।

 

कुछ दिन बाद जब आमावस्या करीब आने लगी, तो वह गुमसुम रहने लगा। इससे पहले वह व्यक्ति बहुत खुश, स्वस्थ, उत्साही और जोशीला था। अब वह बीमार दिखने लगा। अमावस्या के दिन उसे बहुत बुरा हार्ट अटैक आया और तुरंत ही उसकी मौत का कारण हो गई। हालांकि उसे यह पता ही न था कि अपनी मौत का कारण वह स्वयं था। हमने इस तरह की न जाने कितनी कहानियां सुनी हैं और यह सोच कर कांप जाते हैं कि यह विश्व रहस्यमयी अनियंत्रित शक्तियों से भरा पड़ा है। लेकिन वे न तो रहस्यमय है और न ही अनियंत्रित। मेरे रिश्तेदार ने स्वयं अपनी जान ली थी, क्योंकि उसने एक गलत सुझाव को अपने अवचेतन मन में दाखिल होने दिया। उसे भविष्यवक्ता की शक्तियों पर भरोसा था, इसलिए उसने उसकी भविष्यवाणी को पूरा स्वीकार कर लिया।

 

आइए, अब हम अवचेतन मन की कार्य विधि के आधार देखेंगे कि मनुष्य का चेतन या तार्किक मस्तिष्क जिस बात पर विश्वास करता है, अवचेतन मन उसे स्वीकार लेता है और उसके अनुरूप कार्य करता है। वह रिश्तेदार उस भविष्यवक्ता के पास गया, तो वह सुझाव दिया, जिसे उसने सच मान लिया। वह दहशत में आ गया। उसे पूरा विश्वास था कि अगली अमावस्या को वह मर जाएगा। उसने इसके बारे में सबको बता दिया और अपनी मौत की तैयारी करने लगा। भविष्यवक्ता के सुझाव को उसके अवचेतन मन ने सत्य मान लिया तथा उसकी मौत को हकीकत में बदल दिया।

 

जिस भविष्यवक्ता ने उसकी मौत की भविष्यवाणी की थी, उसकी शक्ति मैदान के पत्थरों और लकड़ियों से ज्यादा नहीं थी। यदि वह आदमी अपने मन के नियमों को जानता, तो नकारात्मक सुझाव को पूरी तरह से अस्वीकार कर देता और भविष्यवक्ता के शब्दों पर जरा भी ध्यान नही देता। यदि वह अपने ही विचारों और भावनाओं पर नियंत्रित कर पाता, तो वह जिंदा रह सकता था। भविष्यवाणी बख्तरबंद टैंक पर फेंकी गई रबड़ की गेंद की तरह होती है। वह आसानी से उसके सुझाव को नकार सकता था और हवा में उड़ा सकता था, जिससे उसे कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन जागरूकता और समझ की कमी के कारण उसने अपनी मौत को खुद बुला लिया। याद रखें दूसरों के सुझावों में आपकी कोई शक्ति नहीं होती है। आप अपने विचारों द्व ारा उन्हें शक्ति देते हैं। आपको अपनी मानसिक सहमति देती है। अपको उस विचार को स्वीकार करना होता है। तब वह विचार आपका बन जाता है। और आपका अवचेतन मन उसे साकार करने के लिए काम करता है। याद रखें, आपके पास जिंदगी, प्रेम और सेहत चुनने की शक्ति है।

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आधार वाक्य सही हैं तो निष्कर्ष भी सही होगा

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आपका मस्तिष्क एक न्याय व्यवस्था की तरह काम करता है। इसका अर्थ है कि जिस किसी भी मुख्य आधार-वाक्य को आपका चेतन मन सत्य समझता है उसी के आधार पर आपके मन के किसी विशेष प्रश्न अथक समस्या पर आपका अवचेतन मन परिणाम निश्चित करता है। यदि आपका आधार वाक्य सही है, तब परिणाम भी अवश्य ही सही होगा।

उदाहरण के लिए जैसे- सभी बनाई गई चीजें बदलती हैं और नष्ट हो जाती है, मिस्र के पिरामिड निर्मित चीजें हैं। इसलिए, पिरामिड बदलेंगे और खत्म होंगे।

दूसरा उदाहरण- प्रत्येक गुण प्रशंसनीय है, दयालुता एक सदाचार गुण है, इसलिए दयालुता प्रशंसनीय है।

दूसरा उदाहरण को प्रमुख आधार-वाक्य कहते हैं और सही आधार वाक्य से सही निष्कर्ष निकलता है।

कॉलेज के एक प्रोफेसर ने मुझे बताया कि मेरी जिंदगी में सब कुछ उल्टा-पुल्टा है, मैंने अपना स्वास्थ, धन और मित्र खो दिए हैं। जिस चीज को भी मैं स्पर्श करता हूं, वह गलत हो जाती है। तव मैंने उन्हें समझाया कि उनकी समस्याएं तार्किक रूप से उनके आत्म-विनाशक प्रमुख आधार वाक्य से उत्पन्न हुई है। अपने जीवन को बदलने के लिए आपको अपने चिंतन में एक नया प्रमुख आधार वाक्य स्थापित करना पड़ेगा। उन्हें इस विश्वास को सही मानना होगा कि उनके अवचेतन मन की असीमित बुद्धिमता उन्हें आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक मार्गदर्शन दे रही हैं, निर्देशित कर रही हैं और समृद्ध वना रही है। ऐसा करने से उनका अवचेतन मन अपने आप समझदारी से निर्णय लेने के लिए निर्देशित करेगा, उनके शरीर का उपचार कर देगा और उनकी मानसिक शाति लौटा देगा।

प्रोफेसर ने जिस तरह का जीवन वह चाहते थे, तस्वीर बनाई। उनका प्रमुख आधारवाक्य था- 'अनंत ज्ञान मेरे सभी रास्तों का मार्गदर्शन और नेतृत्व कर रहा है।' मैं स्वस्थ हूं और मेरे मस्तिष्क तथा शरीर में सामंजस्य का नियम काम कर रहा है। मेरे पास सौदर्य, प्रेम शांति की प्रचुरता है। सही कर्म और देवीय विधान के सिद्धांत मेरे पूरे जीवन को नियंत्रित करते हैं। मैं मानता हूं कि मेरा प्रमुख आधारवाक्य जीवन के शाश्वत नियमों पर आधारित है और मैं महसूस करता हूं कि मेरा अवचेतन मन मेरे चेतन मन की विचार-प्रकृति के अनुरूप प्रतिक्रिया करेगा।

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कुछ दिन बाद उन्होंने मुझे खत द्वारा सूचित किया कि मैंने उपरोक्त कथन को धीरे, शांति और प्यार से दिन में कई बार कहा, क्योंकि मैं जानता था कि यह सब मेरे अवचेतन मन में गहराई तक जा रहे थे और इसका परिणाम अवश्य आएगा। मैं आपके साथ हुई बातचीत के लिए आपका बहुत धन्यवाद करता हूं और मैं यह भी कहना चाहूंगा कि मेरे जीवन के सभी क्षेत्रों में बहुत सुधार हो रहा है। यह कारगर है।

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अवचेतन मन की बुद्धिमत्ता

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आपका अवचेतन मन हर तरह से समझदार और बुद्धिमान है। यह आपके हर सवाल का जवाब जानता है। यह आपके साथ बहस अथवा आपको पलटकर जवाब नहीं देता। यह नहीं कहता कि आप मुझे इस चीज से प्रभावित न करें। उहाहरण के तौर पर जब आप कहते है, मैं यह नहीं कर सकता, 'मेरी उम्र ज्यादा हो गई है, मैं इस जिम्मेदारी को नहीं निभा सकता, मैं गलत जगह, गलत घर में पैदा हो गया, मैं सही नेताओं को नहीं जानता हूं, तब आप अपने अवचेतन मन में नकारात्मक विचारों को भर रहे होते हैं और इसी के अनुरूप यह प्रतिक्रिया देगा। वास्तव में आप अपनी भलाई को रोक रहे हैं। इस प्रकार अपने जीवन में कभी सीमा और कुंठ उत्पन्न कर रहे हैं।

 

जब आप अपने चेतन मन में बाधा, अवरोध और विलंब की कल्पना करते हैं, तो आप अपने अवचेतन मन के अंदर की बुद्धिमता और ज्ञान से वंचित होते हैं। वास्तव में आप कह रहे हैं कि आपका अवचेतन मस्तिष्क आपकी समस्याएं हल नहीं कर सकता। इससे मानसिक और भावनात्मक जमाव होगा, जिसके फलस्वरूप बीमारी और नसों में विकार की प्रवृत्ति होगी। यदि आप अपनी इच्छाओं को साकार करना और कुंठ से उबरना चाहते हैं, तो दिन में कई बार दृढता से कहें- 'असीमित बुद्धिमत्ता ने मुझे यह मनोकामना दी है और यही मुझे इसे साकार करने की आदर्श योजना की राह दिखाती है, उस ओर ले जाती है और आवश्यक बातें बताती है। मैं जानता हूं कि मेरे अवचेतन मन की अधिक गहरी समझ अब प्रतिक्रिया कर रही है और मैं जो महसूस कर रहा हूं तथा जिस पर मन में दावा करता हूं, वह बाहर व्यक्त होती है। संतुलन और समबुद्धि हर तरफ है।

दूसरी ओर यदि आप कहते हैं कि अब कोई रास्ता नहीं बचा है। अब समझो मेरा खेल खत्म हो गया। इस उलझन से बाहर निकलने का कोई तरीका नहीं है। मैं बाधित और अवरुद्ध हूं, तो आपको अपने अवचेतन मन से कोई जवाब या प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी। यदि आप चाहते हैं कि आपका अवचेतन आपके लिए काम करे, तो इसका सहयोग पाने के लिए आपको इससे सही आग्रह करना होगा। यह आपके लिए हमेशा काम कर रहा है। यह इस समय भी आपके कृत्य की धड़कन और सांस को नियंत्रित कर रहा है। यदि आपकी उंगली कट जाए, तो उपचार की प्रक्रिया शुरु कर देना है, इसकी सबसे मूलभूत प्रवृति जीवन की ओर है। यह हमेशा आपकी देखभाल करता है और आपको सुरक्षित रखता है।

 

जैसा कि आप जानते हैं कि आपके अवचेतन के पास अपनी खुद की बुद्धि है, लेकिन यह आपके विचारों और छवियों के पैटर्न को स्वीकार कर लेता है। जब आप किसी समस्या का जवाब तलाशते हैं, तो आपका अवचेतन प्रतिक्रिया करेगा। यह आपसे उम्मीद करेगा कि आप अपने चेतन मन में किसी सच्चे निर्णय या फैसले पर पहुंच जाएं। आपको यह जानना होगा कि आपके अवचेतन मन के पास जवाब है लेकिन आप कहते हैं कि मुझे नहीं मालूम कि कोई रास्ता है भी या नहीं। मैं पूरी तरह दुविधा और उलझन में हूं मुझे जवाब क्यों नहीं मिलता? तो आप अपनी प्रार्थना को नकार रहे हैं। समय काटते सैनिक की तरह आप ऊर्जा का प्रयोग तो करते हैं, लेकिन आगे नहीं बढ़ पाते हैं।

 

अपने मास्तिष्क के पहियों को विराम दें, आराम से बैठ जाएं और शिथिल होकर शांति से कहें- "मेरा अवचेतन मन जबाव जानता है। यह अब मेरा जवाब दे रहा है। मैं धन्यवाद देता हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि मेरे अवचेतन का अनंत ज्ञान सभी कुछ जानता है और अब वह मुझे उत्तम जवाब दिखा रहा है। मेरा दृढ़ विश्वास मेरे अवचेतन की महिमा और महानता को आजाद कर रहे हैं। ऐसा होने पर मुझे बड़ी प्रसन्नता हो रही है।"

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याद रखने योग्य मुख्य बिंदु

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आप अपनी आत्मा (अवचेतन मन) के कप्तान और अपनी तकदीर के मालिक हैं। याद रखें, आपके पास चुनने की क्षमता है। जिंदगी चुनें। प्रेम चुनें। सेहत चुनें। खुशी चुनें।

दूसरों के सुझावों और बातों में आपको चोट पहुंचाने की जरा भी शक्ति नहीं है। एक मात्र शक्ति आपके अपने विचारों में है। आप दूसरे के विचारों या सुझावों को स्वीकार करने का चुनाव कर सकते हैं। और अच्छे विचारों को दृढ़ता से कह सकते हैं। आपके पास यह चुनाव करने की शक्ति है कि आप कैसे प्रतिक्रिया करेंगे।

डर अज्ञान और अंधविश्वास के बाजय शाश्वत सत्यों और जीवन के सिद्धांतों के दृष्टिकोण से सोचना शुरु करें। दूसरों को अपने लिए सोचने की अनुमति न दें। अपने विचार खुद चुनें और निर्णय खुद लें।

अच्छा सोचोगे, तो अच्छा होगा, बुरा सोचोगे, तो बुरा होगा। आप वहीं बनेंगे जो आप दिनभर सोचते हैं।

आपका मस्तिष्क बुरा नहीं है। प्रकृति की कोई भी शक्ति बुरी नहीं होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप प्रकृति की शक्तियों का कैसे प्रयोग करते हैं। अपने मस्तिष्क का प्रयोग हर जगह सभी लोगों को वरदान देने, उपचार करने और प्रेरित करने के लिए करें।

 

आपके पास चुनने की शक्ति है। स्वास्थ्य और खुशी को चुनें। आप दोस्ताना या गैर-दोस्ताना होने का चुनाव कर सकते हैं। सहयोगी, खुश, दोस्ताना, प्रेम करने योग्य बनने का चुनाव करेंगे, तो सारा संसार प्रतिक्रिया करेगा। अद्भुत व्यक्तित्व विकसित करने का यह सबसे अच्छा तरीका है।

आपका अवचेतन मन आपके साथ बहस नहीं करता है। यह आपके चेतन मन के आदेश को चुपचाप मान लेता है। अगर आप कहते हैं, मैं इसका खर्च नहीं उठा सकता, तो आपका अवचेतन इसे सच बनाने के लिए काम करने लगता है। कोई ज्यादा अच्छा विचार चुनें। इसके बजाय इसे यह आदेश दें, 'मैं इसे खरीदूंगा। मैं इसे अपने मन में स्वीकार करता हूं।

कभी यह न कहें, 'मैं नहीं कर सकता।' इस वाक्य की जगह पर आगे दिया वाक्य रख कर इस डर से उबरें। 'मैं अपने अवचेतन मन की शक्ति के सारे काम कर सकता हूं।

आपका चेतन मन जिसे भी सच मानता है, आपका अवचेतन मन उसे स्वीकार कर लेगा। और हकीकत बना देगा। खुशकिस्मती, दैवी मार्गदर्शन सही कर्म और जीवन की सभी नियामतों में विश्वास करें।

अपने शब्दों पर ध्यान दें। आपको हर आलसी शब्द का हिसाब देना होगा। कभी यह न कहें, 'मैं असफल हो जाऊंगा, मेरी नौकरी छूट जाएगी, मैं किराया नहीं चुका सकता। अपका अवचेतन मन मजाक नहीं समझ सकता। यह इन तीन चीजों को हकीकत में बदल देगा।

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और दोस्तो ये था आज का चैपटर -

और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,

आप हमेशा खुश रहें, आबाद रहें, स्वस्थ रहें, और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत 

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