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बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी- "The Richest Man in Babylon" - George S. Clason - जॉर्ज एस. क्लैसन --- बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - प्राचीन लोगों की सफलता के रहस्य-धन पर लिखी गई सबसे प्रेरणाप्रद पुस्तक -- The Richest Man in Babylon -- Hindi translation of the international bestseller "The Richest Man in Babylon" -- The most inspiring book on wealth and the secrets of success of the ancients -- Writer : George S. Clason

 

बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी- "The Richest Man in Babylon" - George S. Clason - जॉर्ज एस. क्लैसन  ---  बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - प्राचीन लोगों की सफलता के रहस्य-धन पर लिखी गई सबसे प्रेरणाप्रद पुस्तक  --  The Richest Man in Babylon  --  Hindi translation of the international bestseller "The Richest Man in Babylon"  --  The most inspiring book on wealth and the secrets of success of the ancients  --  Writer : George S. Clason

बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी- "The Richest Man in Babylon" - George S. Clason - जॉर्ज एस. क्लैसन

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बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - प्राचीन लोगों की सफलता के रहस्य-धन पर लिखी गई सबसे प्रेरणाप्रद पुस्तक

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The Richest Man in Babylon

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Hindi translation of the international bestseller "The Richest Man in Babylon"

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The most inspiring book on wealth and the secrets of success of the ancients

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Writer : George S. Clason

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बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी -

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प्राचीन बेबीलोन में एक बहुत अमीर आदमी रहता था, जिसका नाम था अरकद। वह अपनी संपत्ति के लिए चारों ओर मशहूर था। साथ ही वह अपनी उदारता के लिए भी मशहूर था। वह संस्थाओं को जमकर दान करता था। वह अपने परिवार के प्रति उदार था। वह अपने खर्चों में दिलदार था। हर साल उसकी संपत्ति खर्च करने से भी ज़्यादा रफ्तार से बढ़ती जाती थी।

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और उसके पुराने दिनों के कुछ दोस्त उसके पास आए और उन्होंने कहा- "अरकद, तुम हमसे ज़्यादा खुशनसीब हो। तुम बेबीलोन के सबसे अमीर इंसान हो गए हो, जबकि हम अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तुम सबसे अच्छे कपड़े पहन सकते हो और सबसे दुर्लभ भोजन कर सकते हो, जबकि हम अगर अपने परिवार को साधारण कपड़े पहना सकें और जो भी उपलब्ध है वही खिला सकें तो हमें संतुष्ट रहना पड़ता है।"

"लेकिन, एक समय हम बराबर थे। हमने एक ही शिक्षक से पढ़ाई की। हम एक ही खेल खेलते थे। तुम हमसे पढ़ाई और खेल में बेहतर नहीं थे और तब के सालों से तुम हमसे ज़्यादा सम्मानजनक नागरिक नहीं रहे हो।

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"ऐसा भी नहीं है कि तुमने हमसे ज़्यादा मेहनत की है, जहां तक हम जानते हैं। तब ऐसा क्यों है कि सौभाग्य ने तुम्हें सारी चीजें दे डाली हैं और हमें अनदेखा कर दिया, जबकि हम सभी बराबर अधिकारी हैं?"

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तब अरकद ने उन्हें डांटा और कहा- "अगर युवावस्था से अब तक के सालों में तुम दाल-रोटी के अलावा कुछ और नहीं कमा सके तो इसका कारण है कि तुमने उन नियमों को नहीं सीखा और जाना और जिनसे संपत्ति बनती है।"

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"सौभाग्य एक ऐसी देवी है, जो किसी का स्थाई भला नहीं करती। इसके विपरीत वह उस हरेक इंसान को बर्बाद कर डालती है, जिस पर बिना मेहनत के स्वर्ण की बारिश होती है। वह अनियंत्रित लोगों को खर्चीला बना देती है, जो पाई गई संपत्ति को लुटा देते हैं और उनमें ऐसी इच्छाएं पैदा हो जाती हैं, जो वह पूरा नहीं कर पाते, लेकिन बाकियों पर वह कृपा दिखाती है, तो वे कंजूस बन जाते हैं और संपत्ति को जमा करने लगते हैं और खर्च करने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें नहीं लगता कि वह दुबारा कमा पाएंगे। वे डाकुओं के डर से घबराए रहते हैं और अपने आपको खालीपन और दुख में धकेल देते हैं।

 

"कुछ ऐसे भी हैं जो बिना कमाए स्वर्ण को लेते हैं, इसमें संपत्ति जोड़ते हैं और खुश एवं संतुष्ट नागरिक के रूप में जीवन गुजार देते हैं, लेकिन ऐसे बहुत कम हैं, मैंने उनके बारे में सिर्फ सुना है। उन लोगों के बारे में सोचो जिन्हें अचानक बहुत संपत्ति मिली है और देखो कि मेरी बात सही है या नहीं।"

 

उसके दोस्तों ने माना कि उनकी जानकारी में जिन लोगों को विरासत में संपत्ति में मिली है उनके बारे में ये बातें सही है और उन्होंने उससे पूछा कि वे लोग कैसे इतनी संपत्ति के मालिक बन गए, इसलिए उसने बताया- "अपनी जवानी में मैंने खुद की ओर देखा और उन चीजों पर ध्यान दिया, जो मुझे खुशी और संतुष्टि देने वाले थे और मैंने पाया कि संपत्ति से इन चीजों की शक्ति बढ़ती जाती थी।

"धन एक शक्ति है। धन से कई चीजें संभव हो जाती हैं।

"इंसान अपने घर को सबसे महंगी चीजों से सजा सकता है।

"इंसान दूर समुद्रों की यात्रा कर सकता है।

"इंसान दूर देश के भोजन का आनंद ले सकता है।

"इंसान सुनारों और पत्थर पर पोलिश करने वालों के बनाए आभूषण पहन सकता है।

"इंसान देवताओं के लिए बड़े-बड़े मंदिर बना सकता है।

"इंसान वे सारी चीजें और कई अन्य चीजें कर सकता है, जिनसे इंद्रियों को सुख मिलता है और आत्मा को संतुष्टि मिलती है।

"और, जब मैंने ये सब महसूस किया, मैंने यह निर्णय लिया कि मैं जिंदगी की सारी अच्छी चीजों का आनंद लूंगा। मैं वह इंसान नहीं बनूंगा, जो दूर रहकर चीजों को देखते हैं और दूसरों को चीजों का आनंद लेते ईर्ष्या से देखते हैं। मैं सबसे सस्ते कपड़े नहीं पहनूंगा जिनमें सम्मानीय देखूं। मैं एक गरीब इंसान की चीजों से संतुष्ट नहीं हूंगा। बदले में मैं अपने आपको अच्छी चीजों के बाजार में मेहमान बनाऊंगा।

"एक सामान्य व्यापारी का बेटा होने के कारण, जिसके पास बड़ा परिवार होने के कारण विरासत की कोई उम्मीद नहीं थी और जैसा तुमने कहा, जिसके पास ज़्यादा बुद्धि और प्रतिभा नहीं थी, मैंने तय किया कि मुझे अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए समय और अध्ययन की ज़रूरत होगी।

"जहां तक समय की बात है, हर इंसान के पास यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। तुम में से हरेक के पास खुद को अमीर बनाने का पर्याप्त समय है। तब भी तुम स्वीकार करते हो कि तुम्हारे पास अपने अच्छे परिवारों के अलावा कुछ भी दिखाने लायक नहीं है, जिस पर तुम्हें बहुत गर्व हो।

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"जहां तक अध्ययन की बात है, क्या हमारे बुद्धिमान शिक्षक ने नहीं सिखाया था कि हमने दो चीजें सीखी हैं: पहली वे चीजें जिन्हें हमने सीखा है और जिन्हें हम जानते हैं, दूसरा वह प्रशिक्षण जिसने हमें सिखाया कि हम उन चीजों को कैसे खोजें जिन्हें हम नहीं जानते हैं?

"इसलिए मैंने तय किया कि संपत्ति अर्जित करने का तरीका सीखूंगा और उसे सीखने के बाद उसे मैं अच्छी तरह आजमाऊंगा। क्या यह समझदारी नहीं है कि हम सूरज की रोशनी में चीजों का आनद लें जब तक वह हैं, क्योंकि जब हम आत्माओं की दुनिया के लिए प्रस्थान करेंगे, तब दुख तो आ ही जाएंगे?

"मुझे रिकॉर्ड्स के हॉल में स्क्राइब का काम मिला और हर दिन मैं घंटों मिट्टी के टैबलेट पर मेहनत करता था। हफ्ते-दर-हफ्ते, महीने-दर-महीने, मैंने मेहनत की, तब भी मेरे आमदनी नहीं बढ़ी। भोजन, कपड़े और ईश्वर के लिए दान और बाकी चीजें मेरी आमदनी को खा जाती थीं, लेकिन मेरे संकल्प ने मेरा साथ नहीं छोड़ा।

और एक दिन अलगमिश, जो पैसे उधार देता था, शहर के मालिक के घर आया और उसने नौवें नियम की कॉपी ऑर्डर की और उसने मुझसे कहा- "मुझे ये दो दिनों में चाहिए और अगर ये काम समय पर हो गया, तो मैं तुम्हें तांबे के दो सिक्के दूंगा।"

"इसलिए मैंने मेहनत की, लेकिन वह नियम लंबा था और जब अलगमिश लौटा, तब तक तक काम अधूरा था। वह गुस्से में था और मैं उसका गुलाम था, वह मुझे पीट सकता था, लेकिन यह जानते हुए कि शहर का मालिक उसे ऐसा नहीं करने देगा, मैंने निडर होकर कहा- "अलगमिश, आप बहुत अमीर हैं। मुझे बताइए कि मैं भी कैसे अमीर बनूं और मैं सारी रात जागकर मिट्टी पर लिखूंगा और जब सूर्य उगेगा, तब तक आपका काम खत्म हो चुका होगा।"

"वह मुझ पर मुस्कुराया और उसने जवाब दिया- "तुम एक हिम्मती गुलाम हो, पर हम इस समझौते को मानते हैं।"

"पूरी रात मैं लिखता रहा, हालांकि मेरी पीठ में दर्द होता रहा और गंध से मेरे सिर में दर्द होने लगा, जिससे मेरे आंखें देख नहीं पा रही थीं, लेकिन जब वह वापस लौटा, तब तक टैबलेट पूरे बन चुके थे।

"अब।' मैंने कहा- "मुझे बताइए जो आपने वादा किया था।"

"बेटे, तुमने अपने हिस्से का वादा पूरा किया है।' उसने मुझसे मिठास से बात की-"और अब मैं अपना वादा पूरा करूंगा। मैं तुम्हें वह चीजें बताना चाहता हूं, जो तुम जानना चाहते हो, क्योंकि मैंने बूढ़ा हो रहा हूं और बूढ़े लोगों की जुबान काफी चलती है और जब युवावस्था सलाह लेने बुढ़ापे के पास आती है, तो उसे सालों का ज्ञान मिलता है, लेकिन कई बार युवावस्था को लगता है कि बुढ़ापे को सिर्फ बीते समय की जानकारी है, इसलिए उसे पूरा लाभ नहीं मिलता ।"

"युवावस्था के विचार।' उसने कहा- "उस धूमकेतु की तरह चमकीले होते हैं, जो आकाश को चमका डालते हैं, लेकिन बुढ़ापे का ज्ञान उन तारों की चमक की तरह होता है, जो कभी नहीं बदलती और जिससे जहाज़ी दिशाओं का पता करते हैं।"

"मेरे शब्दों को याद रखो, क्योंकि अगर तुमने ऐसा नहीं किया, तो तुम उस सच को नहीं पकड़ पाओगे, जो मैं बताना चाह रहा हूं और तुम्हें लगेगा कि तुम्हारी रात की मेहनत बर्बाद गई।'

"तब उसने मेरी ओर अपनी घनी भौहों के बीच से चतुराई से देखा और एक धीमी, लेकिन मजबूत आवाज़ में कहा- "मैंने संपत्ति का रास्ता तब पाया जब मैंने सीखा कि मेरी कमाई का एक हिस्सा मुझे अपने लिए बचाकर रखना है और तुम भी ऐसा ही करोगे।"

"तब वह मुझे भेदने वाली नज़रों से देखता रहा पर उसने कुछ नहीं कहा।

"बस इतना ही?' मैंने पूछा।

"ये एक भेड़ चराने वाले को सूदखोर में बदलने के लिए काफी था।' उसने जवाब दिया।

पूछा। "लेकिन जो मैं कमाता हूं, वह सब मेरे लिए ही है न?' मैंने

"नहीं, ऐसा नहीं है।' उसने जवाब दिया- "तुम्हें दर्जी याद नहीं है? क्या तुम मोची को पैसे नहीं देते? क्या तुम खाना खाने के पैसे नहीं देते? क्या तुम बेबीलोन में बिना पैसे खर्च किए रह सकते हो? पिछले महीने की कमाई के बारे में तुम्हारे पास बताने के लिए क्या है? और पिछले साल की कमाई के बारे में? मूर्ख ! तुम सबको पैसे देते हो, खुद को नहीं देते। बेवकूफ, तुम दूसरों के लिए मेहनत करते हो। इससे अच्छा है कि गुलाम बन जाओ और उस मालिक के लिए काम करो, जो खाने और पहनने के लिए देता है। अगर तुम अपनी कमाई का दसवां हिस्सा बचाकर रखते, तो साल भर में तुम्हारे पास कितना ज़्यादा जमा हो जाता?"

 

"मेरे गणित के ज्ञान ने मुझे छोड़ा नहीं था और मैंने जवाब दिया- "जितना मैं साल भर में कमाता हूं।"

"तुम आधा सच कहते हो।' उसने जवाब दिया- "स्वर्ण का जो हिस्सा तुम बचाते हो, उसे तुम्हारे लिए काम करना है। इससे जो तांबे का सिक्का कमाते हो वह ऐसा बच्चा है, जो तुम्हारे लिए काम करेगा। अगर तुम्हें अमीर बनना है तो तुम्हें कमाई का एक हिस्सा बचाना होगा और इसके बच्चों को कमाना होगा और इससे तुम्हें वह संपत्ति मिलेगी, जो तुम चाहते हो।"

 

"तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हें सारी रात की मेहनत के एवज में धोखा दे रहा हूं।' उसने कहा- "लेकिन मैं तुम्हें हजार गुना ज़्यादा कीमत दे रहा हूं, अगर तुम मेरी बात की सच्चाई को समझ सको।"

 

"अपनी कमाई का एक हिस्सा तुम्हें अपने पास रखना है। तुम कितना भी कम कमाओ, पर ये हिस्सा दसवें हिस्से से कम नहीं होना चाहिए। अगर हो सके तो ये हिस्सा ज़्यादा रखो। पहले अपने आप को भुगतान करो। दर्जी से या मोची से उतना ही खरीदो कि भोजन और ईश्वर के लिए दान देने के लिए तुम्हारे पास बचा रहे।

 

"धन, पेड़ की तरह, एक छोटे बीज से उगता है। पहला तांबे का सिक्का, जो तुम बचाओगे उससे ही संपत्ति का पेड़ निकलेगा। जितनी जल्दी बीज बोओगे, उतनी ही जल्दी पेड़ निकलेगा और इस पेड़ को बचत से जितना ज़्यादा खाद और पानी दोगे, उतनी ही जल्दी तुम्हें इसकी छाया मिलने लगेगी।

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"ऐसा कहकर वह अपने टैबलेट को लेकर चला गया।

"उसने जो कहा था मैं उसके बारे में सोचता रहा और उसकी बात मुझे सही लगी। इसलिए मैंने तय किया कि मैं इसे आजमाऊंगा। जब भी मुझे पैसे मिले, मैंने हर दस तांबे के सिक्कों में से एक को लिया और छुपा लिया। भले ही सुनने में अजीब लगे, पर मेरे पास पैसों की कमी नहीं रही। मैंने देखा कि मुझे उसके बिना ज़्यादा दिक्कत नहीं हुई, लेकिन जैसे मेरी जमापूंजी बढ़ती गई, मुझे इच्छा होती थी कि इससे व्यापारियों द्वारा दिखाई गई अच्छी चीजें खरीदूं जो वे ऊंटों और जहाजों से फोनिशियन के जहाजों से लाते थे, लेकिन मैंने खुद पर काबू रखा।

"जाने के बारह महीने बाद अलगमिश वापस आया और उसने कहा- "बेटे, क्या तुमने पिछले साल अपने-आपको कमाई का दसवां हिस्सा भुगतान किया है?

"मैंने गर्व से कहा-"हां, महोदय, मैंने किया है।"

"यह अच्छी बात है। उसने चमकते चेहरे से मुझको जवाब दिया-"और तुमने इसके साथ क्या किया?"

"मैंने इसे ईंट बनाने वाले अजमूर को दे दिया, जिसने कहा कि वह दूर समुद्र की यात्रा कर रहा है और टायर में वह मेरे लिए फोनिशियन के दुर्लभ आभूषण खरीदेगा। जब वह वापस आएगा, हम उसे महंगे दामों में बेचकर आपस में आधा-आधा बांट लेंगे।

"हर मूर्ख को सीखना चाहिए।' वह चिल्लाया- "लेकिन एक ईंट बनाने वाले पर आभूषणों के बारे में क्यों विश्वास किया जाए? क्या तुम रोटी बनाने वाले के पास जाकर सितारों के बारे में पूछोगे? नहीं, मेरे हिसाब से, अगर तुम्हारे पास बुद्धि है तो तुम ज्योतिषी के पास जाओगे। बेटे, तुम्हारी बचत बर्बाद गई, तुमने अपने धन का पेड़ जड़ से ही उखाड़ लिया। अब दूसरा पेड़ बोओ और इस बार तुम्हें आभूषणों के बारे में जानना हो, तो आभूषण बनाने वाले के पास जाना। अगर तुम्हें भेड़ों के बारे में जानना हो, तो गड़ेड़िए के पास जाओगे। सलाह एक ऐसी चीज है जो आसानी से दे दी जाती है, लेकिन तुम्हें वही रखना चाहिए, जो रखने लायक है।"

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"जो अपनी बचत के बारे में उनसे सलाह लेता है जिन्हें कोई अनुभव नहीं है, वे गलत सलाहों के कारण अपनी बचत का पैसा खो बैठते हैं। यह कहकर वह चला गया।

"और ऐसा उसने कहा। फोनिशियन लोग धोखेबाज हैं और उन्होंने अजमूर को शीशे के टुकड़े बेच डाले, जो रत्नों की तरह दिखते थे। लेकिन जैसा अलगमिश ने बताया, मैंने फिर तांबे का दसवां हिस्सा बचाया, जो बहुत आसान था, क्योंकि मैंने आदत बना ली थी।

फिर, बारह साल बाद, अलगमिश स्क्राइब के कमरे में आया और उसने मुझसे कहा-"अंतिम मुलाकात के बाद तुमने क्या बदलाव किए?"

"मैंने खुद को वफादारी से भुगतान किया है। मैंने जवाब दिया-"और मैंने अपनी बचत शील्ड बनाने वाले अग्गर को दे दिए हैं ताकि वह तांबे खरीद सके और हर महीने वह मुझे किराया देता है।"

"यह अच्छी बात है और तुमने किराए का क्या किया?'

"मैंने उससे शहद, शराब और मसालेदार केक का भोज किया। मैंने अपने लिए स्कारलेट ट्यूनिक भी खरीदा है और एक दिन एक जवान गधा भी ख़रीदूंगा जिस पर चढ़ सकूं।'

 

इस पर अलगमिश हंस पड़ा- "तुम अपनी बचत के बच्चों को खा जाते हो। तब वह तुम्हारे लिए कैसे काम करेंगे? और तब उनके बच्चे कैसे होंगे, जो तुम्हारे लिए काम करेंगे? पहले अपने लिए सुनहरे गुलामों की सेना बनाओ और उसके बाद बिना किसी अफसोस के अच्छा भोज खाओ।' यह कहकर वह चला गया।

 

उसके बाद मैंने उसे दो सालों के लिए नहीं देखा, एक बार जब वह फिर लौटा तब उसके चेहरे पर भारी रेखाएं थीं और उसकी आंखें बोझिल थीं, क्योंकि वह बहुत बूढ़ा हो रहा था और उसने मुझसे कहा- "अरकद, क्या तुमने वह संपत्ति बना ली, जिसका तुमने सपना देखा था?"

"और मैंने जवाब दिया- "जितनी इच्छा थी उतना तो नहीं बना पाया, लेकिन मैंने कुछ बनाया है, जो मेरे लिए पैसे कमाता है और इसकी कमाई से और भी कमाई होती है।"

"और क्या तुम अब भी ईंट बनाने वालों से सलाह लेते हो?'

"ईंट बनाने के बारे में वे अच्छी सलाहें देते हैं। मैंने जवाब दिया।

"अरकद !' वह बोलता गया- "तुमने अपने पाठ अच्छी तरह सीखे हैं। तुमने अपनी आमदनी से कम खर्च पर रहना सीखा। फिर तुमने उनसे सलाह लेना सीखाए जो अपने अनुभवों के कारण सक्षम हैं और अंत में, तुमने सीखा कि अपने स्वर्ण से खुद के लिए कैसे काम कराया जा सकता है।"

 

"तुमने खुद को सिखाया कि कैसे पैसे कमाए जाएं, कैसे रखे जाएं और कैसे उनका इस्तेमाल किया जाए। इसलिए तुम एक जिम्मेदार पद के लिए तैयार हो। मैं एक बूढ़ा आदमी होता जा रहा हूं। मेरे बेटे सिर्फ खर्च करने का सोचते हैं, कभी कमाने का नहीं सोचते। मेरे कई जगहों पर निवेश हैं और मेरे लिए सबकी देखभाल करना संभव नहीं है। अगर तुम निप्पुर जाओ और मेरी जमीन की देखभाल करो तो मैं तुम्हें पार्टनर बना लूंगा और तुम मेरी जायदाद में हिस्सा पाओगे।'

 

"इसलिए मैं निप्पुर गया और उसकी जमीन की ज़िम्मेदारी संभाल लीए जो काफी बड़ी थी और चूंकि मैं महत्त्वाकांक्षा से भरा हुआ था और मैंने संपत्ति के तीन नियमों को अच्छी तरह सीख लिया था, मैं उस संपत्ति की कीमत को तेजी से बढ़ाने में सक्षम था। इसलिए मैं तरक्की करता गया और जब अलगमिश की आत्मा ने शरीर छोड़ दिया, मुझे उसकी संपत्ति में हिस्सा मिला, जो उसने कानूनी रूप से दिया था।"

 

अरकद ने ऐसा कहा और जब उसकी कहानी समाप्त हुई, उसके एक दोस्त ने कहा- "तुम सच में भाग्यशाली थे कि अलगमिश ने तुम्हें अपना उत्तराधिकारी बना लिया।"

 

"भाग्यशाली सिर्फ इस मायने में था कि उससे मिलने से पहले मुझमें तरक्की करने की आकांक्षा थी। क्या चार सालों तक मैंने कमाई का दसवां हिस्सा बचाकर मैंने लक्ष्य के प्रति अपने समर्पण को सिद्ध नहीं किया? क्या तुम उस मछुआरे को किस्मत वाला कहोगे, जो सालों तक मछलियों की आदतों को पढ़ता है ताकि हवा के बदलते रुख के साथ वे जाल डाल सके? अवसर एक ऐसा हठी देवता है, जो बिना तैयारी वालों के साथ वक़्त बर्बाद नहीं करता।"

 

"पहले साल की बचत लुट जाने के बाद भी तुम में लगे रहने की हिम्मत थी। तुम इस मामले में अलग हो।" दूसरे ने कहा।

 

"इच्छा शक्ति !" अरकद ने जवाब दिया- "क्या बकवास है। क्या तुम्हें लगता है कि इच्छा शक्ति एक इंसान को इतनी ताकत देती है कि वे उस बोझ को उठा सके, जो ऊंट नहीं उठा सकते या उस बोझ को खींच सके, जो बैलों के बस की बात नहीं है? इच्छा शक्ति उस लक्ष्य के प्रति लगन का नाम है, जो तुम्हें काम पूरा होने तक लगाए रखे। अगर मैं अपने लिए कोई काम सोचता हूं, तो उसे करके रहता हूं भले ही वह कितना ही छोटा हो। इसके बिना मुझमें बड़े कामों को करने का आत्म-विश्वास कैसे आएगा? अगर मैं अपने आप से कहता हूं-'सौ दिनों के लिए मैंने शहर के पुल पर चलूंगा और नदी में एक पत्थर फेंकूंगा', तो मैं ये करता हूं। अगर सातवें दिन मैं ऐसा करना भूल गया, तो मैं खुद से ये नहीं कहता कि 'कल मैं दो पत्थर डालूंगा, जो इस कमी को पूरा कर देगा।' इसके बदले मैं वापस जाऊंगा और वह पत्थर डालूंगा या फिर बीसवें दिन मैं खुद से ये नहीं कहूंगा-'अरकद, यह बेकार काम है। हर रोज एक पत्थर डालने से क्या फायदा होगा? एक ही बार में मुट्ठी भर डाल दो और हो जाएगा।' नहीं, मैं कभी ये नहीं कहूंगा और करूंगा। जब खुद के लिए कोई काम सोचता हूं तो मैं इसे पूरा करता हूं। इसलिए मैं सावधान रहता हूं कि मैं मुश्किल और अव्यावहारिक काम शुरू नहीं करता, क्योंकि मुझे खाली बैठना पसंद है।"

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और तब दूसरे दोस्त ने कहा- "अगर जो आप कहते हैं वह सही है और ऐसा लगता है कि आप सही कह रहे हैं, तो इस चीज को अगर हर इंसान करे तो उसे कभी संपत्ति की कमी नहीं होगी।"

"जहां भी इंसान ऊर्जा डालता है, वहां संपत्ति बढ़ती है।" अरकद ने जवाब दिया- "अगर एक अमीर इंसान नया महल बनाता है, तो उसके द्वारा कमाया स्वर्ण खो जाता है? नहीं, ईंट बनाने वाले का इसमें हिस्सा होता है और मजदूर का इसमें हिस्सा होता है और कलाकार का इसमें हिस्सा होता है और इस घर पर मेहनत करने वाले हर इंसान का इसमें हिस्सा होता है, लेकिन जब महल बनकर तैयार होता है तो क्या ये अपनी कीमत से ज़्यादा मूल्य का नहीं होता? और इससे जुड़ी जमीन क्या ज़्यादा कीमत की नहीं होती? संपत्ति जादुई तरीकों से बढ़ती है। कोई इंसान इसकी सीमा नहीं आंक सकता। क्या फोनीशियन लोगों ने बंजर धरती पर उस पैसे से महान शहर नहीं बनाए, जो समुद्र पर होने वाले व्यापार से आते हैं?"

 

"तब आप हमें क्या सलाह देते हैं, जिससे हम भी अमीर बन जाएं?" उसके एक और दोस्त ने कहा- "साल गुजर गए हैं और हम उतने युवा नहीं रहे और हमारे पास कुछ भी नहीं बचा।"

 

"मैं सलाह देता हूं कि तुम अलगमिश की सलाह मानो और खुद से कहो- 'मेरी आमदनी का एक हिस्सा मेरे लिए है।" सुबह उठने पर सबसे पहले खुद से ये कहो। इसे दोपहर में कहो। इसे रात में कहो। इसे रोज हर घंटे कहो। इसे खुद से इतनी बार कहो कि ये शब्द आकाश में आग से बने अक्षरों की तरह छा जाएं।

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"अपने आप में ये आइडिया अच्छी तरह डाल लो। अपने आपको इस विचार से भर दो। फिर जो भी हिस्सा सही लगे वह ले लो। यह हिस्सा दस प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। अपने अन्य खर्चों को इस तरह करो कि यह संभव हो सके, लेकिन पहले वह हिस्सा निकाल लो। जल्दी ही तुम यह महसूस करोगे कि उस खजाने का मालिक होने से कितना फर्क पड़ता है, जो सिर्फ तुम्हारा है। जैसे जैसे यह बढ़ेगा, यह तुम्हें आनंदित करेगा। जीवन का नया जोश तुम में भर जाएगा। ज़्यादा कमाने के और भी रास्ते खुलेंगे, क्योंकि ज्यादा आमदनी होने पर भी तुम उतना प्रतिशत अपने लिए रखोगे न?

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"तब अपने खजाने से अपने लिए काम कराना सीखो। इसे अपना गुलाम बना लो। इसके बच्चों और इसके बच्चों के बच्चों से अपने लिए काम कराओ।

 

"अपने भविष्य के लिए एक आमदनी सुरक्षित कर लो। बूढ़े लोगों को देखो और यह मत भूल जाओ कि एक दिन तुम भी इनमें शामिल हो जाओगे। इसलिए अपने खजाने को इस तरह से निवेश करो कि वह 88खो न जाए। निवेश पर बहुत ज़्यादा वापसी की दरों से सावधान रहो, क्योंकि ये वे धोखेबाज घंटियां हैं, जो लापरवाह इंसान को बर्बाद कर डालती हैं।

 

"अपने परिवार के लिए भी इंतज़ाम कर लो ताकि भगवान के पास तुम्हारे जाने के बाद भी उनकी जरूरतें पूरी हो सकें। ऐसी सुरक्षा के लिए यह हमेशा संभव है कि थोड़े अंतराल पर उन्हें भुगतान होता रहे। इसलिए सावधान इंसान ऐसी जरूरत के लिए किसी बड़ी रकम के इंतजार में नहीं रहता।

 

"समझदार लोगों से सलाह लो। उन लोगों की सलाह लो जिनका काम पैसे संभालना है। वे तुम्हें वैसी गलती करने से बचाएंगे, जो गलती मैंने ईंट बनाने वाले अजमूर को पैसे देकर की थी। खतरे से ज़्यादा अच्छा है कि थोड़ा और सुरक्षित रिटर्न मिले।

 

"जब तक ज़िंदगी है, उसका आनन्द लो। खुद पर ज़्यादा बचत के लिए दबाव मत डालो। अगर सिर्फ दसवां हिस्सा बचा सकते हो तो उतना ही बचाओ। अन्यथा अपनी आमदनी के हिसाब से रहो और कंजूस बनकर खर्च करने से मत डरो। जिंदगी अच्छी और समृद्ध होती है उन चीजों से जिनका तुम आनंद उठाते हो।'

 

उसके दोस्तों ने धन्यवाद दिया और वे चले गए। कुछ शांत थे, क्योंकि उनके पास कल्पना शक्ति नहीं थी और वे समझ नहीं सकते थे। कुछ व्यंग्य कर रहे थे, क्योंकि उन्हें लगा था कि इतना अमीर इंसान कुछ संपत्ति अपने पुराने और कम भाग्यशाली दोस्तों को देगा।

 

लेकिन कुछ की आंखों में नई रोशनी थी। उन्होंने महसूस किया कि वह हर बार स्क्राइब के कमरों में वापस आया, क्योंकि उसने एक इंसान को अंधेरे से रोशनी की ओर जाने के लिए श्रम करते हुए देखा। रोशनी मिलने के बाद उस इंसान के लिए एक स्थान प्रतीक्षा कर रहा था। कोई भी इंसान उस स्थान को भर नहीं सकता था, जब तक वे अपनी समझ का विकास न कर लें और उस अवसर के लिए तैयार न हो जाए।

 

ये वही लोग थे, जिन्होंने अरकद से बार-बार मुलाकात की और अरकद ने उनका स्वागत किया। उसने उन्हें सलाह दी और वैसी बातें सिखाई, जो अनुभव से भरे लोग सिखाते हैं और उसने उनकी बचत करने में सहायता की ताकि उन्हें अच्छा ब्याज मिले और वे ऐसे निवेशों में पैसे न बर्बाद करें, जिनसे कोई लाभ नहीं मिलने वाला। इन लोगों की जिंदगी में बदलाव का मोड़ तब आया, जब उन्होंने उस सत्य को सीखा जो अलगमिश से अरकद को और अरकद से उन तक आया था।

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अपनी आमदनी का एक हिस्सा अपने पास रखो।

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और दोस्तो ये था आज का चैपटर -

और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,

आप हमेशा खुश रहें, आबाद रहें, स्वस्थ रहें, और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत 

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