एक इंसान जिसने स्वर्ण की इच्छा की - बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी- "The Richest Man in Babylon" - George S. Clason - जॉर्ज एस. क्लैसन --- बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - प्राचीन लोगों की सफलता के रहस्य-धन पर लिखी गई सबसे प्रेरणाप्रद पुस्तक -- The Richest Man in Babylon -- Hindi translation of the international bestseller "The Richest Man in Babylon" -- The most inspiring book on wealth and the secrets of success of the ancients -- Writer : George S. Clason
एक
इंसान जिसने स्वर्ण की इच्छा की - बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी- "The Richest
Man in Babylon" - George S. Clason - जॉर्ज एस. क्लैसन
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बेबीलोन
का सबसे अमीर आदमी - प्राचीन लोगों की सफलता के रहस्य-धन पर लिखी गई सबसे प्रेरणाप्रद
पुस्तक
--
The
Richest Man in Babylon
--
Hindi
translation of the international bestseller "The Richest Man in
Babylon"
--
The
most inspiring book on wealth and the secrets of success of the ancients
Writer : George S. Clason
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एक इंसान जिसने स्वर्ण की इच्छा की
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बेबीलोन
का रथ निर्माता, बंसीर बहुत परेशान था। अपनी संपत्ति के चारों ओर बनी निचली दीवार पर
बैठकर वह अपने घर और अपने वर्कशॉप की ओर देख रहा था, जिसमें एक संपूर्ण रथ तैयार खड़ा
था।
उसकी
पत्नी अक्सर खुले दरवाजे पर दिखाई दे जाती थी। उसकी नजरों से पता चलता था कि खाने का
थैला खाली था और उसे रथ का काम पूरा करना था, उसे हथौड़ा चलाना था, पोलिश और पेंट करना
था, चमड़े को पहिये के चारों ओर चढ़ाना था और इसे अमीर ग्राहक को देने के लिए तैयार
करना था ताकि वे इसे ले सकें।
तब
भी उसका मोटा और मजबूत शरीर उस दीवार पर बैठा था। उसका धीमा दिमाग एक ऐसी समस्या से
जूझ रहा था, जिसका जवाब पाना मुश्किल था। यूरेट्स की घाटी पर आग बरसाता सूरज उसे परेशान
कर रहा था। पसीने की बूंदें उसकी भौंहें पर आकर उसकी छाती के घने बालों पर टपक रही
थीं।
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उसके
घर के आगे राजा के महल को घेरने वाली ऊंची दीवारें थीं। नजदीक में बेल के मंदिर की
रंगीन मीनार थी, जो नीले आसमान में प्रवेश कर रही थी। ऐसी विशाल सुंदरता के सामने उसका
साधारण घर था और वैसे कई लोगों का घर था जो और भी साधारण थे। बेबीलोन ऐसा ही था-विशालता
और साधारण का समावेश, चमकती अमीरी और उदास गरीबी का संगम, जो साथ-साथ मिलकर शहर की
मजबूत दीवारों के बीच वास कर रहे थे।
अगर
उसने पीछे देखा होता तो पता चलता कि उसके पीछे अमीरों के शोर मचाते रथ जा रहे थे और
आस-पास व्यापारी और नंगे पैर चलते भिखारी थे। अमीर लोगों को भी 'राजा के काम' के लिए
पानी ढोते गुलामों के लिए रास्ता खाली करना पड़ता था, जो झूलते बगीचों के लिए भारी
बकरी के चमड़े में पानी ले जा रहे थे।
बंसीर अपनी समस्या में इतना उलझा हुआ था कि उसे व्यस्त शहर का शोर सुनाई नहीं पड़ रहा था।
एक परिचित वाद्ययंत्र के तारों से आते संगीत ने उसे मानो नींद से जगाया। वह मुड़ा और
उसने अपने सबसे अच्छे दोस्त-संगीतज्ञ कोबी के संवेदनशील और मुसकुराते चेहरे की ओर देखा।
"मेरे
अच्छे दोस्त, भगवान तुम्हें ढेर सारी आजादी दे।" कोबी ने सलाम करते हुए कहा-
"लेकिन तब भी ऐसा लगता है कि वे इतने दयालु हैं कि तुम्हें काम करने की ज़रूरत
नहीं है। मैं तुम्हारे सौभाग्य में तुम्हारे साथ खुश हूं और इसे मैं तुम्हारे साथ बाटुंगा
भी। कृपया अपने बड़े बटुए से दो साधारण सिक्के निकालो और उन्हें मुझे दे दो, जब तक
रात में सज्जन पुरुष के यहां भोज समाप्त न हो जाए। तुम उन्हें खोओगे नहीं, क्योंकि
वे तुम तक वापस आ जाएंगे।"
"अगर
मेरे पास दो सिक्के होते।" बंसीर ने दुख से कहा- "तो मैं उन्हें किसी को
भी नहीं देता-तुम्हें भी नहीं, मेरे प्यारे दोस्त; क्योंकि वे मेरी पूरी संपत्ति होते।
कोई भी इंसान अपनी पूरी संपत्ति किसी को नहीं देता, अपने सबसे अच्छे दोस्त को भी नहीं।"
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"क्या!" कोबी ने आश्चर्य से कहा-'तुम्हारे पर्स में
एक सिक्का भी नहीं है, फिर भी तुम दीवार पर मूर्ति की तरह बैठे हो ! तुम रथ का काम
पूरा क्यों नहीं करते? अपनी भूख तुम कैसे मिटा पाओगे? यह तुम्हारे जैसा बर्ताव नहीं
है, दोस्त। तुम्हारी अंतहीन ऊर्जा कहां है? क्या तुम्हें कोई चीज परेशान कर रही है?
क्या भगवान ने
तुम्हारे लिए समस्याएं खड़ी की हैं?" "भगवान की दी हुई
दिक्कत ही होनी चाहिए। बंसीर ने स्वीकार किया।
"यह एक सपने से शुरू हुआ,
एक ऐसे बेमतलब के सपने से जिसमें मैंने सोचा कि मैं एक पैसे वाला आदमी हूं। मेरे बेल्ट
से एक भारी बटुआ लटका हुआ था, जिसमें सिक्के भरे हुए थे। उसमें सिक्के थे, जिन्हें
मैं भिखारियों को उदारी से दे रहा था; उसमें चांदी के सिक्के थे, जिनसे मैंने अपनी
पत्नी और अपने लिए मनचाही चीजें खरीद रहा था; उसमें सोने के सिक्के थे, जो मुझे सुरक्षित
भविष्य का एहसास देते थे और चांदी को खर्च करने की हिम्मत देते थे। संतुष्टि का एक
एहसास मेरे अंदर था! तुम मुझे एक मेहनतकश दोस्त के रूप में नहीं जानते होते। न ही मेरी
पत्नी मुझे ऐसा जानती, अगर उसका चेहरा झुर्रियों से आजाद और खुशी से चमक रहा होता।
वह फिर से अपने नए विवाहित जीवन की मुसकुराती लड़की होती।"
"सच में एक सुंदर सपना था। कोबी ने कहा-"लेकिन ऐसे खुशनुमा
अहसासों ने तुम्हें दीवार पर बैठी उदास मूर्ति के रूप में कैसे बदल दिया?"
"सच में, क्यों! क्योंकि जब मैं उठा और मैंने देखा कि मेरा
पर्स कितना खाली है, विद्रोह की एक भावना मेरे शरीर में दौड़ गई। इस बारे में बात करते
हैं, क्योंकि जैसा जहाज़ी कहते हैं, हम दोनों एक ही नाव में सवार हैं। छोटी उम्र में
हम पुजारियों के पास ज्ञान पाने गए। बड़े होने पर भी हम अच्छे दोस्त बने रहे। हम अपनी
तरह के संतुष्ट लोग रहे हैं। हमें लंबे समय तक काम करके और अपनी आमदनी खर्च करके खुशी
मिली है। हमने पिछले सालों में इतने सिक्के कमाए हैं, लेकिन हम उन खुशियों को नहीं
जानते जो पैसों से आती है, हमें सिर्फ उनके सपने आते हैं। वाह ! क्या हम मूर्ख भेड़ों
से ज़्यादा कुछ हैं? हम दुनिया के सबसे अमीर शहर में रहते हैं। व्यापारी कहते हैं किसी
के पास भी हमारे जितना धन नहीं है।
हमारे
आस-पास इतना धन है, लेकिन ये हमारे लिए नहीं है। आधी जिंदगी के श्रम के बाद भी, मेरे
अच्छे दोस्त, तुम्हारे पास एक खाली बटुआ है और तुमने मुझसे कहा- "कृपया अपने बड़े
बटुए से दो साधारण सिक्के निकालो और उन्हें मुझे दे डालो, जब तक रात में सज्जन पुरुष
के यहां भोज समाप्त न हो जाए। नहीं, मैं मानता हूं मेरा पर्स तुम्हारे जितना खाली है।
मामला क्या है? हम सोने और चांदी क्यों नहीं कमा सकते जो खाने और कपड़ों से ज़्यादा
दे सके?"
"ये भी सोचो कि क्या हमारे बेटे। बंसीर ने आगे कहा-"वे भी हमारे कदमों पर नहीं चल रहे
हैं? क्या उन्हें और उनके परिवार को और उनके बेटों और उनके परिवारों को पूरी जिंदगी
इसी तरह बकरी के दूध और दलिया पर बितानी होगी, भले ही उनके चारों ओर सोने के खजाने
भरे हों?"
"बंसीर,
हमारी दोस्ती के इतने सालों में कभी भी तुमने ऐसी बात नहीं की। कोबी चकरा गया।
"इतने
सालों में मैंने कभी इस तरह से नहीं सोचा। सुबह से लेकर रात होने तक, मैंने अपने रथों
पर उतनी मेहनत की ळे, जितना कोई इंसान कर सकता है, अंदर ही अंदर आशा करते हुए कि ईश्वर
मेरे अच्छे कामों को देखेगा और मुझ पर समृद्धि बरसाएगा, पर ऐसा नहीं हुआ। अब लगता है,
ऐसा कभी नहीं होगा। इसलिए मेरा दिल उदास है। मैं एक पैसे वाला आदमी बनना चाहता हूं।
मैं जमीन और मवेशी का मालिक बनना चाहता हूं, मैं अच्छे कपड़े और बटुए में सिक्के रखना
चाहता हूं। मैं अपनी पूरी ताकत से इन चीजों के लिए काम करना चाहता हूं, अपनी पूरी कुशलता
के साथ, अपनी पूरी बुद्धि के साथ, पर मैं चाहता हूं कि मुझे मेरी मेहनत का पुरस्कार
मिले। हमारे साथ मामला क्या है? मैं फिर से पूछता हूं। हम उन लोगों की तरह अच्छी चीजों
को आनंद क्यों नहीं उठा सकते, जिनके पास इन्हें खरीदने के लिए स्वर्ण है?"
"अगर
मैं इसका जवाब जानता!" कोबी ने जवाब दिया- "तो मैं भी तुम्हारी तरह ही संतुष्ट
होता। संगीत से मेरी कमाई जा चुकी है। अक्सर मुझे इस तरह से प्लान बनाना पड़ता है कि
मेरा परिवार भूखा न रह जाए। साथ ही मेरे सीने में एक ऐसे बड़े वाद्ययंत्र के लिए गहरी
इच्छा है, जिससे मैं ऐसा संगीत पैदा कर सकूं, जो मेरे मन की गहराई से आए। इस तरह के
यंत्र से मैं ऐसा संगीत बना सकता हूं, जो राजा ने कभी न सुना हो।"
"तुम्हारे पास ऐसा वाद्ययंत्र होना चाहिए। पूरे बेबीलोन में कोई भी इंसान इतना मधुर नहीं गा
सकता; इतना मीठा नहीं गा सकता, जिससे सिर्फ राजा नहीं, बल्कि देवता भी खुश हो जाएं।
लेकिन तुम ऐसा कैसे कर सकते हो, जब हम दोनों राजा के गुलामों की तरह गरीब हों? घंटी
को सुनो! देखो वे यहां आ रहे हैं।" उसने अधनंगे, पसीने से तरबतर पानी ढोते लोगों
की कतार की ओर इशारा किया, जो नदी से पतली सड़क की ओर जा रहे थे। मार्च करने वाले वे
पांच थे, हरेक के ऊपर बकरी की खाल के भारी थैले में पानी था।
"एक
अच्छे कद वाला आदमी उन लोगों का नेतृत्व कर रहा था।" कोबी ने घंटी वाले इंसान
की ओर इशारा किया, जो बिना किसी बोझ के आगे बढ़ रहा था। "अपने देश का एक शक्तिशाली
आदमी है, यह साफ दिखता है।"
"इस
कतार में कई अच्छे कद वाले लोग हैं।" बंसीर ने स्वीकार किया-"हमारी तरह अच्छे
लोग हैं। लंबे, गोरे लोग जो उत्तर से हैं, दक्षिण से हंसते हुए काले लोग हैं, आस-पास
के देशों से छोटे भूरे लोग हैं। सभी एक साथ नदी से बगीचों की ओर जा रहे हैं, आगे पीछे,
हर रोज, हर साल। इनके पास सामने देखने के लिए खुशी नहीं है। टैंकों के बिस्तर पर सोते
हैं-खाने के लिए मोटा दलिया है। इन बेचारे लोगों पर दया आती है, कोबी !"
"उस
पर मुझे भी दया आती है। तब भी मुझे दिखता है कि हमारी हालत इनसे खास अच्छी नहीं है,
हालांकि हम खुद को आज़ाद कहते हैं।"
यह
सच है, कोबी। भले ही सुनने में कितना बुरा लगे। हम हर साल इसी तरह से गुलामों वाली
जिंदगी नहीं जीना चाहते। काम, काम, बस काम ! पर कहीं पहुंच नहीं रहे।"
"क्या
हम नहीं सीख सकते कि कैसे उनकी तारह स्वर्ण पा सकें?" कोबी ने पूछा।
"शायद
हम उन लोगों से कोई रहस्य सीख सकें, जो जानते हैं।" बंसीर ने सोचकर जवाब दिया।
"आज
के दिन।" कोबी ने सलाह दी "मैं अपने पुराने दोस्त अरकद से मिला, जो अपने
सोने के रथ में जा रहा था। मैं कहूंगा कि उसने मुझे वैसे अनदेखा नहीं किया जैसा करना
बहुत लोग अपना अधिकार समझेंगे। बदले में, उसने अपना हाथ हिलाया ताकि सारे देखने वाले
लोग उसे संगीतकार कोबी को संबोधित करते और उसकी ओर दोस्ती भरी मुस्कान देते हुए देखें।"
"उसे बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी माना जाता है।" बंसीर ने सोचा।
"वह
इतना अमीर है कि राजा भी उससे खजाने के लिए मदद लेते हैं।" कोबी ने कहा-
"इतना अमीर।" बंसीर ने कहा- "मुझे डर लगता है कि कहीं मैं अपने हाथ
उसके मोटे बटुए पर न डाल दूं।"
"बकवास
।" कोबी ने फटकारा-"एक इंसान की संपत्ति उसके बटुए में नहीं होती। एक मोटा
बटुआ तुरंत खाली हो जाता है, अगर उसे भरने के लिए स्वर्ण की धारा न हो। अरकद के पास
आमदनी है, जो इसे लगातार भरती रहती है भले ही वह कितना ही क्यों न खर्च करे।"
"आमदनी,
यही वह चीज है।" बंसीर ने कहा- "काश मेरे पास आमदनी का एक ऐसा स्रोत होता,
जो मेरे बटुए को भरता रहता भले ही मैं दीवार पर बैठूं या दूर देशों की यात्रा करूं।
अरकद को पता होना चाहिए कि कैसे एक आदमी अपने लिए आमदनी बना सकता है। क्या तुम्हें
लगता है कि वह ये तरीका मेरे जैसे धीमे दिमाग वाले को भी समझा सकता है?"
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"मुझे
लगता है उसने यह तरीका अपने बेटे नोमासिर को सिखाया।" कोबी ने जवाब दिया-
"क्या वह नीनेवह के पास नहीं गया, जैसा यह बताया जाता है और वह अपने पिता की सहायता
के बिना शहर का सबसे अमीर आदमी बन गया?"
"कोबी,
तुम्हारी बात से मुझे एक दुर्लभ विचार आया है।" बंसीर की आंखों में एक चमक आ गई।
"एक अच्छे दोस्त से सलाह लेने में कुछ खर्च नहीं होता और अरकद वैसा ही अच्छा दोस्त
है। माना कि हमारा बटुआ एक गिद्ध के घोंसले की तरह खाली है, लेकिन हमें इससे परेशान
नहीं होना चाहिए। हम इस संपन्न जगह में बिना स्वर्ण के होने के कारण थक गए हैं। अब
हमें पैसे वाला आदमी बनना है। आओ, अरकद के पास चलते हैं और पूछते हैं कि हम भी अपने
लिए कैसे कमा सकते हैं?"
बंसीर, तुमने सच्ची प्रेरणा से कहा है। तुम मेरे दिमाग में एक नई समझ लाए हो। तुमने मुझे
एहसास दिलाया कि हम अब तक पैसे क्यों नहीं कमा पाए। हमने कभी इसे खोजा नहीं। तुमने
बड़े धीरज से बेबीलोन में सबसे मजबूत रथ बनाए हैं। इस लक्ष्य से तुमने सबसे बेहतर कोशिश
की है। इसलिए इस काम में तुम सफल हुए। मैंने एक सफल संगीतज्ञ बनने की कोशिश की और इस
कारण से मैं सफल हुआ।
"जिन
चीजों पर हमने कोशिश की, हम उनमें सफल हुए। देवता हमें ऐसा करने देते रहे। अब अंत में
हम सूरज की तरह चमकीली रोशनी देखते हैं। इसने हमें सीखने की दिशा दिखाई है ताकि हम
और तरक्की कर सकें। इस नई समझ के साथ हम अपनी इच्छाओं को पूरी करने के लिए अच्छे तरीके
पाएंगे।"
"अरकद
के पास आज ही जाते हैं।" बंसीर ने कहा- "साथ ही, हम बचपन के अपने दोस्तों
से भी पूछते हैं जिन्होंने हमसे ज़्यादा सफलता नहीं पाई है ताकि वे भी इस ज्ञान को
पा सकें।"
"बंसीर,
तुम हमेशा अपने दोस्तों के बारे में सोचते रहे हो। इसीलिए तुम्हारे इतने दोस्त हैं।
जैसा कह रहे हो, वैसा ही होगा। हम आज ही जाकर उन्हें साथ ले चलेंगे।"
---
और
दोस्तो ये था आज का चैपटर -
और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
आप हमेशा खुश रहें, आबाद
रहें, स्वस्थ रहें, और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत
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Reviewed by Shiv Rana RCM
on
जुलाई 08, 2026
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