बेबीलोन का ऐतिहासिक रेखाचित्र - बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी- "The Richest Man in Babylon" - George S. Clason - जॉर्ज एस. क्लैसन --- बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी - प्राचीन लोगों की सफलता के रहस्य-धन पर लिखी गई सबसे प्रेरणाप्रद पुस्तक -- The Richest Man in Babylon -- Hindi translation of the international bestseller "The Richest Man in Babylon" -- The most inspiring book on wealth and the secrets of success of the ancients -- Writer : George S. Clason
बेबीलोन
का ऐतिहासिक रेखाचित्र - बेबीलोन का सबसे अमीर आदमी- "The Richest Man in
Babylon" - George S. Clason - जॉर्ज एस. क्लैसन
---
बेबीलोन
का सबसे अमीर आदमी - प्राचीन लोगों की सफलता के रहस्य-धन पर लिखी गई सबसे प्रेरणाप्रद
पुस्तक
--
The
Richest Man in Babylon
--
Hindi
translation of the international bestseller "The Richest Man in
Babylon"
--
The
most inspiring book on wealth and the secrets of success of the ancients
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Writer
: George S. Clason
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बेबीलोन का ऐतिहासिक रेखाचित्र
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इतिहास
के पन्नों पर बेबीलोन से ज़्यादा चमकदार शहर नहीं मिलता। इसके नाम से ही संपत्ति और
ऐश्वर्य की झलक मिलती है। इसके सोने और जवाहरातों के खजाने बेशुमार थे। सामान्यतः ऐसी
छवि बनती है कि 1910 ऐसा अमीर शहर किसी विलासिता की जगह में बसा होगा और इसके चारों
और जंगल और खनिज पदार्थों के स्रोत होंगे, पर ऐसा नहीं था। यह यूरेट्स नदी के 11 किनारे
एक समतल और बंजर घाटी में बसा था। इसमें जंगल नहीं थे, खान नहीं थी-इमारत बनाने के
लिए पत्थर भी नहीं थे। यह किसी व्यापार मार्ग पर भी नहीं बसा था। फसलों के लिए पर्याप्त
वर्षा नहीं होती थी।
बेबीलोन
इस बात का उदाहरण है कि एक इंसान थोड़े से उपलब्ध संसाधनों से कितनी बड़ी सफलता प्राप्त
कर सकता है। उस बड़े शहर के सारे संसाधन मनुष्यों द्वारा विकसित किए गए थे। इसकी सारी
संपत्ति इंसानों द्वारा बनाई गई थी।
बेबीलोन
के पास सिर्फ दो प्राकृतिक संसाधन * थे-उपजाऊ जमीन और नदी में पानी। उस समय की सबसे
बड़ी इंजीनियरिंग सफलता को अंजाम देते हुए बेबीलोन के इंजीनियरों ने उस नदी के पानी
को बांधों और नहरों द्वारा नया रास्ता दिया। उन नहरों ने दूर-दूर तक बंजर धरती को पानी
देकर उपजाऊ बना डाला। यह इतिहास में इंजीनियरिंग की सबसे पहली सफलताओं में से एक माना
जाता है। लहलहाती फसलें इसी सिंचाई की तकनीक का परिणाम थीं जिसे उस समय तक दुनिया ने
कभी नहीं देखा था।
सौभाग्य
से अपने लंबे अस्तित्व के दौरान बेबीलोन पर ऐसे राजाओं ने राज किया. जिन्होंने युद्ध
और लूट को पराश्रय नहीं दिया। हालांकि वे कई युद्धों में शामिल हुए, पर उनमें से अधिकतर
युद्ध दूसरे देशों के उन महत्त्वाकांक्षी शासकों से हुए, जो बेबीलोन के खज़ानों को
हड़पना चाहते थे। बेबीलोन के अद्भुत राजा इतिहास में अपनी समझदारी, पुरुषार्थ और न्यायप्रियता
के कारण जाने जाते हैं। बेबीलोन ने कभी ऐसे राजा नहीं पैदा किए, जिन्होंने अपने अहंकार
की तृप्ति के लिए दुनिया पर जीत हासिल करने की कोशिश की ताकि सारे देश उन्हें सम्मान
दे सकें।
शहर के रूप में बेबीलोन का अब अस्तित्व नहीं है। जिन मानवीय शक्तियों ने इस शहर को बनाया
और हजारों सालों तक संभाला, उनके जाने के बाद ये शहर खंडहर बन गया। अभी इस शहर का स्थान
एशिया में स्वेज़ नहर से छह सौ मील दूर पूरब में पर्शियन खाड़ी के उत्तर में है। यह
एरिजोना के यूमा की तरह भूमध्य रेखा से तीस डिग्री ऊपर अक्षांश पर है। इसकी जलवायु
भी इस अमरीकी शहर की तरह गरम और सूखी है।
यूरेट्स
की घाटी, जो कभी घनी आबादी वाली उपजाऊ जमीन थी, आज फिर से एक बंजर धरती है। यहां की
हल्की घास और रेगिस्तानी झाड़ियां हवा में उड़ती रेत से सामना करके किसी तरह जिंदा
रहती हैं। उपजाऊ खेत चले गए, विशाल शहर गायब हो गए और संपन्न चीजों के लंबे कारवां
विलुप्त हो गए। अरबों के खानाबदोश दस्ते ही यहां बचे हैं। क्रिश्चियन युग की शुरुआत
से अब तक ऐसा ही है।
इस
घाटी पर कई पहाड़ियां हैं। शताब्दियों तक वे यात्रियों द्वारा कुछ और नहीं माने जाते
थे। बर्तनों के टुकड़ों और वर्षा भरी आंधियों के कारण पुरातत्त्वविद इस ओर आकर्षित
हुए। यूरोपियन और अमेरीकन संग्रहालयों द्वारा आयोजित यात्राओं ने यहां खुदाई की और
देखा कि यहां क्या मिलता है। यहां मिली चीजों से साबित हो गया कि ये पहाड़ियां प्राचीन
शहर हैं। आप इन्हें शहरों की कब्र कह सकते हैं।
बेबीलोन
इनमें से एक था। इस पर बीस शताब्दियों तक हवाओं ने रेगिस्तान की धूल बरसाई थी। ईंटों
से बनी इसकी दीवारें टूट गए थीं और वापस धरती में समा गए थीं। महान शहर बेबीलोन आज
इस हालत में है। बस धूल का एक ढेर है, जो इतने समय से सुनसान है कि कोई भी जिंदा इंसान
तब तक इसका नाम नहीं जानता था, जब तक शताब्दियों तक मलबों में छुपी इसकी सड़कों और
मंदिरों और शहरों को वापस नहीं खोजा गया।
कई
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस घाटी में बेबीलोन और अन्य शहरों की सभ्यता दर्ज इतिहास
में सबसे पुरानी है। कई दिनांक 8000 साल से पहले तक जाते हैं। जिन चीजों से इन तिथियों
को निर्धारित किया गया वे भी एक रोचक तथ्य हैं। बेबीलोन के खंडहरों में एक सूर्यग्रहण
का ज़िक्र मिलता है। आधुनिक खगोलविज्ञानियों ने उस समय को मापा, जब ऐसा सूर्यग्रहण
बेबीलोन में दिखा था और उस समय के कैलेंडर और आधुनिक कैलेंडर में संबंध स्थापित किया।
इस तरह यह सिद्ध हुआ कि 8000 साल पहले बेबीलोनिया में रहने वाले सुमेरवासियों ने दीवारों
वाले शहरों में अपना निवास बनाया था। उनके निवासी दीवारों में रहने वाले असभ्य लोग
नहीं थे। वे शिक्षित और संबुद्ध लोग थे। जहां तक लिखित इतिहास की बात है, वे पहले इंजीनियर,
पहले खगोलविज्ञानी, पहले फायनें. सियर और लिखित भाषा वाले पहले लोग थे।
इन
सिंचाई के साधनों का ज़िक्र पहले ही हो चुका है, जिन्होंने इस बंजर धरती को कृषि का
स्वर्ग बनाया। उन नहरों के अवशेष अब भी मिलते हैं, हालांकि अब वे बालू से भर चुके हैं।
कुछ तो इतने बड़े हैं कि इन्हें पानी से खाली रखा जाए, तो दर्जन भर घोड़े इसमें एक
साथ दौड़ सकते हैं। आकार के मामले में वे कोलोरेडो और उतह की सबसे बड़ी नहरों से कम
नहीं हैं।
घाटी
की जमीन को सींचने के अलावा बेबीलोनियन इंजीनियर ने इतना ही बड़ा एक और काम किया। उन्होंने
नालियों का एक बड़ा तंत्र तैयार किया, जिसने यूरेट्स और टिग्रिस नदियों के मुहाने पर
जमीन के एक बड़े हिस्से को भी सिंचाई के अंतर्गत डाल दिया।
हेरोडोटस,
जो एक ग्रीक इतिहासकार और यात्री थे, ने बेबीलोन की यात्रा की और वे एकमात्र बाहर के
वासी हैं, जिन्होंने इसका विवरण दिया है। उनके लेखनों से शहर का विस्तृत विवरण और उनकी
अनोखी परंपराओं की जानकारी मिलती है। वे जमीन की उपजाऊ प्रकृति और उसमें होने वाली
गेंहू और जौ की लहलहाती फसलों का भी जिक्र करते हैं।
बेबीलोन
का ऐश्वर्य भले खो गया हो, पर उसका ज्ञान आज भी हमारे लिए सुरक्षित रखा है। इसके लिए
हम उनके रिकॉर्ड के अहसानमंद हैं। उस समय कागज का आविष्कार नहीं हुआ था। इसलिए उन्होंने
गीली मिट्टी के तख्तों पर बड़ी मेहनत से वे चीजें लिख दी थीं। पूरा होने पर उन्हें
आग में पकाया गया और वे मजबूत टाइल बन गए। आकार में वे छह गुना आठ इंच थे और एक इंच
मोटे थे।
मिट्टी के वे टैबलेट, उन्हें इसी नाम से जाना जाता था, उस समय उतने ही काम आते थे जितने आज लिखने
के आधुनिक तरीके काम आते हैं। उन पर कहानियां, कविता, राजाज्ञा के संवाद, धरती के नियम,
संपत्ति के नाम, प्रोमिसरी नोट्स और दूर शहरों में भेजे जाने वाले संदेश भी लिखे जाते
थे। इन्हीं मिट्टी के टैबलेट से हमें उस समय के लोगों के बारे में अंतरंग और निजी जानकारी
मिलती है। उदाहरण के लिए, एक साधारण दुकानदार के एक टैबलेट से पता चलता है कि किस तारीख
को एक ग्राहक ने एक गाय खरीदी और बदले में गेंहू के सात बोरे दिए, जिनमें तीन को उसी
समय दे दिया गया और बाकी चार ग्राहक की अनुमति का इंतज़ार कर रहे थे।
इन
बर्बाद शहरों में पुरातत्त्वविदों ने इन टैबलेट की पूरी लाइब्रेरी पाई है, जिनमें ऐसे
लाखों टैबलेट पड़े थे।
बेबीलोन
की सबसे अनोखी चीजों में से एक हैं, वे विशाल दीवारें जो शहर को घेरती थीं। प्राचीन
काल के लोगों ने उन्हें पिरामिडों के साथ जोड़ते हुए 'दुनिया के सात आश्चर्यों' की
श्रेणी में रखा। रानी सेमीरामिस को शहर के प्रारंभिक इतिहास में पहली दीवारें बनाने
के श्रेय मिलता है। वर्तमान खुदाई करने वालों को असली दीवारों का कोई निशान नहीं मिलता।
उनकी ऊंचाई का भी पता नहीं चलता। शुरुआती लेखकों के अनुसार ऐसा लगता है कि वे पचास
से साठ फीट ऊंचे थे, उनके बाहरी तरफ जली हुई ईंटें थीं और अंदर की तरफ पानी की मोटी
नालियां थीं।
बाद
की ज़्यादा प्रसिद्ध दीवारें ईसा मसीह के छह सौ साल पहले राजा नेबोपोलस्सर ने बनवानी
शुरू की। उसने इतने बड़े स्तर पर काम शुरू करवाया कि वह उसे पूरा होते देखने के लिए
जिंदा नहीं रहा। यह काम उसके बेटे नेबूचड्नेज्जर ने पूरा कराया, जिसका नाम बाइबिल के
इतिहास में मिलता है।
इस
दीवारों की ऊंचाई और लंबाई विश्वास के परे है। विश्वास. जनक स्रोतों से पता चलता है
कि वे एक सौ साथ फीट ऊंची थीं, जो एक आधुनिक पंद्रह तल्ला मकान की ऊंचाई के बराबर है।
उनकी पूरी लंबाई नौ से ग्यारह मील थी। ये अपने शीर्ष पर इतनी चौड़ी थीं कि इस पर छह
घोड़ों वाला रथ दौड़ाया जा सकता था। आज इस विशाल बनावट का सिर्फ आधार और नालियां बचे
हैं। इन खंडहर के बाद जो बचा था, उसकी कसर अरबों ने ईंटों का कहीं और इस्तेमाल करके
पूरी कर दी।
बेबीलोन की दीवारों के चारों ओर उस समय के हर योद्धा की सेना युद्ध में विजय के बाद मार्च किया
करती थी। कई राजाओं ने बेबीलोन पर आक्रमण किया, लेकिन हर बार वे असफल रहे। इतिहासकार
10,000 घुड़सवारों, 25,000 रथों, 1000 पैदल सिपाहियों के 1200 रेजीमेंट की बात करते
हैं। युद्ध सामग्री को जुटाने और युद्ध के लिए जरूरी खाद्य सामग्री जुटाने में अक्सर
दो से तीन साल का समय लगता था।
बेबीलोन
का शहर एक आधुनिक शहर की तरह ही आयोजित किया गया था। वहां सड़कें और दुकानें थीं। फेरी
वाले आवासीय जिलों द्वारा सामान बेचते थे। बड़े मंदिरों में पुजारी रहते थे। शहर के
अंदर राजमहलों का आंतरिक स्थान था। इनकी दीवारें शहर की दीवारों से ऊंची होती थीं।
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बेबीलोन
के लोग कलाओं में दक्ष थे। वे कलाएं थीं-मूर्तिकला, चित्रकला, बुनाई, स्वर्ण का काम
और धातु के हथियार और कृषि के औज़ार बनाना। उनके जौहरी सबसे सुंदर आभूषण बनाते थे।
उनके अमीर लोगों की कब्रों से ऐसे कई आभूषणों के नमूने मिले हैं, जो दुनिया के बड़े
संग्रहालयों में मौजूद हैं।
बहुत
पुराने समय में जब बाकी दुनिया पत्थर की कुल्हाड़ियों से पेड़ काट रही थी या फिर नुकीले
भालों और तीरों से शिकार या युद्ध कर रही थी, उस समय बेबीलोन के लोग धातु के भालों,
कुल्हाड़ियों और तीरों का इस्तेमाल कर रहे थे।
बेबीलोन के लोग चतुर व्यापारी और पूंजीदाता थे। जहां तक हमें पता है, उन्होंने ही विनिमय के लिए
आविष्कार मुद्रा, प्रोमिसरी नोट और संपत्ति के लिखित नामों का आविष्कार किया।
ईसा
मसीह के जन्म के 540 साल पहले तक बेबीलोन में कभी हमला करने वाली सेनाएं नहीं घुसीं।
तब भी इसकी दीवारों को कोई नहीं जीत पाया। बेबीलोन के पतन की कहानी बड़ी अनोखी है।
उस समय का सबसे बड़ा विजेता साइरस इस शहर को जीतना और इसकी दीवारों को भेदना चाहता
था। बेबीलोन के राजा, ने. बोनिडस के सलाहकारों ने उसे सायरस से मिलने और शहर पर आक्रमण
का इंतजार करने के बजाय हमला करने की सलाह दी। बेबीलोन की सेना की हार के बाद वह शहर
से भाग गया। तब सायरस ने खुले दरवाजों से प्रवेश किया और बिना प्रतिरोध के शहर पर कब्जा
कर लिया।
उसके
बाद शहर की ताकत और इज्जत धीरे-धीरे घटती गई और अगले कुछ सौ सालों बाद यह पूरी तरह
वीरान हो गया और इसे हवाओं ने उसी रेगिस्तान में मिला दिया, जहां से इसकी गरिमामयी
शुरुआत हुई थी। बेबीलोन का पतन हो गया था, यह फिर कभी नहीं उठ पाया, लेकिन इसका सभ्यताओं
पर बहुत उपकार है। समय की धारा ने मंदिरों की दीवालों को धूल में मिला दिया है, लेकिन
बेबीलोन का ज्ञान आज भी जिंदा है।
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और
दोस्तो ये था आज का चैपटर -
और अब मिलते हैं अगले नए चैपटर के साथ, नई विडियों में,
आप हमेशा खुश रहें, आबाद
रहें, स्वस्थ रहें, और आपका धन्यावाद, नमस्कार, जय हिन्द, जय भारत
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Reviewed by Shiv Rana RCM
on
जुलाई 08, 2026
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